लिपुलेख दर्रे से 7 साल बाद शुरू होगा भारत-चीन व्यापार, पिथौरागढ़ प्रशासन ने बनाई पूरी कार्ययोजना
पिथौरागढ़, 21 मार्च (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार 7 साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों के द्वारा लगातार कई वर्षों से भारत-चीन व्यापार शुरू करने की मांग की जा रही थी।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई की अध्यक्षता में भारत–चीन सीमा व्यापार को वर्ष 2026 में पुनः प्रारम्भ किए जाने के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक जिला आपदा परिचालन केंद्र के सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत–चीन सीमा व्यापार पुनः प्रारम्भ करने पर अनापत्ति प्रदान किए जाने के बाद वर्ष 2026 के प्रस्तावित व्यापार सत्र को दृष्टिगत रखते हुए सीमा व्यापार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि भारत–चीन समझौते के अनुसार व्यापार अवधि जून से सितम्बर तक निर्धारित है, लेकिन मौसम की अनुकूलता के आधार पर अवधि बढ़ाए जाने हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा जा सकता है।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं पर्यटन कार्यालय के संचालन के लिए स्थानीय व्यक्तियों को संविदा के आधार पर नियुक्त किए जाने और व्यापार अवधि के दौरान पीआरडी स्वयंसेवकों/ सुरक्षा कर्मियों की तैनाती किए जाने के संबंध में अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई।
बैठक में ट्रेड पास, यात्रा पास जारी किए जाने के संबंध में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उपजिलाधिकारी, धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि पूर्व वर्षों की भांति वर्ष 2026 में भी व्यापारियों को ट्रेड पास जारी किए जाएंगे। जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में व्यापार में प्रतिभाग करने वाले व्यापारियों की संख्या के संबंध में जानकारी लेने पर बताया गया कि पिछली बार कुल 265 ट्रेड पास जारी किए गए थे और इस बार मांग बढ़ने की संभावना है।
अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि व्यापार अवधि के दौरान धारचूला क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा द्वारा नकद एवं मुद्रा विनिमय सुविधा उपलब्ध कराई जाती रही है तथा इस वर्ष भी बैंक से समन्वय स्थापित कर यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि सीमा व्यापार को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सीमा शुल्क विभाग, बरेली से प्रत्येक वर्ष कस्टम स्टाफ की तैनाती की जाती रही है। इस पर जिलाधिकारी ने सीमा शुल्क विभाग से समय पर तैनाती सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए ताकि व्यापार प्रारम्भ होने से पूर्व निरीक्षण चौकियों पर कार्मिक उपलब्ध रहें।
अपर जिलाधिकारी द्वारा यह भी बताया गया कि भारत–चीन सीमा व्यापार समझौते के अनुसार आयात में ऊन, पश्मीना, नमक, बोरेक्स, रेशम, मक्खन, याक के बाल, खाल आदि तथा निर्यात में कपड़ा, कंबल, मसाले, आटा, सूखे मेवे, सब्जियां, तांबे के उत्पाद, कृषि उपकरण, स्टेशनरी, जूते, वनस्पति तेल आदि वस्तुएं शामिल हैं।
उपजिलाधिकारी धारचूला ने बताया कि पिछली व्यापार अवधि में इस क्षेत्र से लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात तथा लगभग 1.90 करोड़ रुपए का आयात किया गया था।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वर्ष 2026 में सीमा व्यापार को पूर्व की भांति संचालित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए तथा व्यापार प्रारम्भ होने से पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने विशेष रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर, मार्ग व्यवस्था, संचार सुविधा, बैंकिंग, सुरक्षा एवं ठहरने की व्यवस्था को समय से तैयार करने के निर्देश दिए।
संचार व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए जिलाधिकारी ने बीएसएनएल के अधिकारियों को सीमा क्षेत्र में नेटवर्क एवं संचार सुविधा सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। गुंजी क्षेत्र में शौचालय एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु जिला पंचायत एवं पर्यटन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए वर्ष 2026 का भारत–चीन सीमा व्यापार सुचारू, सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग सेसंपन्न कराया जाए, तथा सभी विभाग अपने स्तर से नियमित समीक्षा करते हुए व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दें।
--आईएएनएस
ओपी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि: भारत ने एक बार फिर हासिल किया 1 अरब टन कोयले का उत्पादन
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने लगातार दूसरे साल 1 अरब टन (बिलियन टन) कोयला उत्पादन का बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है। कोयला मंत्रालय ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च को हासिल की गई यह उपलब्धि देश के ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता और जरूरी उद्योगों को लगातार ईंधन सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कोयला क्षेत्र में सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों और लगातार मेहनत के कारण यह लक्ष्य संभव हो पाया है। इससे देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है और कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्तर का स्टॉक बनाए रखने में भी सहारा मिला है।
मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि बेहतर योजना, प्रभावी कार्यान्वयन और कोयला आपूर्ति शृंखला में मजबूत तालमेल को दर्शाती है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में भी अहम योगदान दे रही है।
इसी बीच, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का संयुक्त इंडेक्स 2.3 प्रतिशत बढ़ा है।
फरवरी में कोयला उत्पादन में भी 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बिजली उत्पादन 0.5 प्रतिशत बढ़ा।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह एक स्थिर, पारदर्शी और प्रदर्शन-आधारित व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए नीतिगत कदम, नियमित निगरानी और सभी संबंधित पक्षों के साथ तालमेल पर जोर दिया जा रहा है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच भी भारत के थर्मल पावर प्लांट्स के पास करीब 53.41 मिलियन टन कोयला स्टॉक मौजूद है, जो मौजूदा खपत के हिसाब से लगभग 23 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयला खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडारण किया जा रहा है।
साथ ही, कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे, मध्यम और अन्य सभी उपभोक्ताओं को पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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