ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि: भारत ने एक बार फिर हासिल किया 1 अरब टन कोयले का उत्पादन
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने लगातार दूसरे साल 1 अरब टन (बिलियन टन) कोयला उत्पादन का बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है। कोयला मंत्रालय ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च को हासिल की गई यह उपलब्धि देश के ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता और जरूरी उद्योगों को लगातार ईंधन सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कोयला क्षेत्र में सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों और लगातार मेहनत के कारण यह लक्ष्य संभव हो पाया है। इससे देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है और कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्तर का स्टॉक बनाए रखने में भी सहारा मिला है।
मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि बेहतर योजना, प्रभावी कार्यान्वयन और कोयला आपूर्ति शृंखला में मजबूत तालमेल को दर्शाती है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में भी अहम योगदान दे रही है।
इसी बीच, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का संयुक्त इंडेक्स 2.3 प्रतिशत बढ़ा है।
फरवरी में कोयला उत्पादन में भी 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बिजली उत्पादन 0.5 प्रतिशत बढ़ा।
कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह एक स्थिर, पारदर्शी और प्रदर्शन-आधारित व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए नीतिगत कदम, नियमित निगरानी और सभी संबंधित पक्षों के साथ तालमेल पर जोर दिया जा रहा है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच भी भारत के थर्मल पावर प्लांट्स के पास करीब 53.41 मिलियन टन कोयला स्टॉक मौजूद है, जो मौजूदा खपत के हिसाब से लगभग 23 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयला खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडारण किया जा रहा है।
साथ ही, कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे, मध्यम और अन्य सभी उपभोक्ताओं को पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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Cuba US Diesel Crisis: Cuba और United States के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. क्यूबा सरकार ने हवाना स्थित अमेरिकी दूतावास को जनरेटर चलाने के लिए डीजल आयात करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. बताया जा रहा है कि दूतावास ने ऊर्जा संकट के कारण डीजल मंगाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया.
ऊर्जा संकट के बीच लिया गया फैसला
क्यूबा इस समय गंभीर ईंधन संकट से गुजर रहा है. तेल की कमी के कारण देश में बार-बार बिजली कटौती और ऊर्जा संकट की स्थिति बनी हुई है. इसी बीच अमेरिकी दूतावास को डीजल लाने की अनुमति न देने का फैसला कूटनीतिक रिश्तों में नई तनातनी का संकेत माना जा रहा है.
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दूतावास में स्टाफ कम करने पर विचार
रिपोर्टों के अनुसार डीजल की कमी के चलते अमेरिका अपने दूतावास के कर्मचारियों की संख्या कम करने पर विचार कर रहा है. यदि ऐसा होता है तो जवाबी कार्रवाई के रूप में क्यूबा भी वॉशिंगटन स्थित अपने दूतावास में कर्मचारियों की संख्या घटा सकता है.
ट्रंप प्रशासन की नीति से बढ़ा संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति उस समय पैदा हुई है जब अमेरिकी प्रशासन ने क्यूबा पर ईंधन आपूर्ति को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं. इन प्रतिबंधों के कारण क्यूबा के लिए विदेशी तेल हासिल करना मुश्किल हो गया है, जिससे देश में ऊर्जा संकट और गहरा गया है.
आम लोगों पर भी असर
ईंधन की कमी का असर सिर्फ सरकारी व्यवस्था ही नहीं बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. कई जगहों पर बिजली कटौती, पानी की आपूर्ति में बाधा और परिवहन सेवाओं पर असर की खबरें सामने आई हैं.
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FAQ
Q1. क्यूबा ने अमेरिकी दूतावास को डीजल देने से इनकार क्यों किया?
उत्तर क्यूबा सरकार ने दूतावास की डीजल आयात करने की अनुमति को खारिज कर दिया. यह फैसला उस समय लिया गया जब देश खुद गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहा है.
Q2. डीजल की जरूरत अमेरिकी दूतावास को क्यों थी?
उत्तर हवाना में बिजली संकट के कारण दूतावास अपने जनरेटर चलाने के लिए डीजल मंगाना चाहता था.
Q3. क्या इस फैसले से अमेरिका-क्यूबा संबंध प्रभावित होंगे?
उत्तर विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है.
Q4. क्यूबा में ऊर्जा संकट क्यों है?
उत्तर क्यूबा को तेल की सीमित आपूर्ति और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
Q5. इस संकट का असर आम लोगों पर कैसे पड़ रहा है?
उत्तर देश में बिजली कटौती, पानी की आपूर्ति में दिक्कत और परिवहन सेवाओं में बाधा जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं.
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