धुरंधर 2 की सक्सेस के बीच यामी गौतम का खुलासा:बोलीं- पर्सनल लाइफ लाइमलाइट से दूर रखी, जिसका करियर पर असर पड़ा
धुरंधर 2 की सक्सेस के बीच एक्ट्रेस यामी गौतम एक बार फिर अपने अलग फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने जानबूझकर अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखा, जिसका असर उनके करियर पर भी पड़ा। पिंकविला से बातचीत के दौरान यामी गौतम ने बताया कि इंडस्ट्री में ओवरएक्सपोजर के दौर में भी उन्होंने प्राइवेट रहने का रास्ता चुना। यामी ने कहा कि एक सीनियर एक्टर की बात से वह काफी प्रभावित हुई थीं- “जितना कम लोग आपको जानते हैं, उतना ही आसान होता है उन्हें अपने किरदार पर यकीन दिलाना।” उन्होंने माना कि यह फैसला आसान नहीं था। कई बार उन्हें लगा कि अगर वह अपनी निजी जिंदगी को ज्यादा सामने लातीं, तो फिल्ममेकर्स के लिए उन्हें रोल के लिए कन्विंस करना आसान होता। यानी इंडस्ट्री में विजिबिलिटी भी काम दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। एक्ट्रेस ने यह भी साफ किया कि वह कभी भी पर्सनल लाइफ को प्रमोशन का हिस्सा नहीं बनाना चाहती थीं। उनका फोकस हमेशा स्क्रिप्ट और किरदार पर रहा। यामी के मुताबिक, वह ऐसे रोल चुनती हैं जो उन्हें एक एक्टर के तौर पर चुनौती दें और दर्शकों को कुछ नया दें। यामी ने यह भी कहा कि समय के साथ इंडस्ट्री में बदलाव आ रहा है और अब कंटेंट व परफॉर्मेंस को ज्यादा अहमियत मिल रही है। यही वजह है कि बिना ज्यादा पब्लिसिटी के भी उन्हें मजबूत भूमिकाएं मिल रही हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो यामी गौतम इन दिनों अपने पति आदित्य धर के साथ चर्चा में हैं। आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ के बाद अब ‘धुरंधर 2’ की सिनेमा घरों में रिलीज हो चुकी है। जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने पेड प्रीव्यू और दूसरे दिन तक की कमाई मिलाकर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है।
Gangaur Vrat 2026: गणगौर पूजा आज, यहां जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत कथा-आरती
Gangaur Puja 2026: देशभर में आज 21 मार्च को गणगौर का त्योहार मनाया जा रहा है। यह पर्व महिलाओं के लिए काफी खास होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाती हैं और उन्हें सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाकर श्रृंगार करती हैं। फिर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करके भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही, भजन-कीर्तन और मंत्रों का जाप किया जाता है। यहां जानें गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त, और व्रत कथा।
गणगौर पर्व पर पूजा के लिए आज 4 शुभ मुहूर्त
गणगौर पर्व भी करवा चौथ, तीज आदि की तरह पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं और शिव-गौरी की पूजा अर्चना करती हैं। आज गणगौर पूजा के लिए चार शुभ मुहूर्त रहेंगे।
1. प्रारंभिक मुहूर्त – गणगौर पूजा की शुरुआत के लिए सबसे पहला समय ब्रह्म मुहूर्त है। यह सुबह 4:49 बजे से 5:36 बजे तक रहेगा।
2. सर्वाधिक शुभ मुहूर्त – पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 7:55 बजे से 9:26 बजे तक का रहेगा। इस समय पूजा करने से विशेष लाभ माना जाता है।
3. अभिजीत मुहूर्त – दोपहर में 12:04 बजे से 12:52 बजे तक का समय अभिजीत मुहूर्त है, जिसे भी पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
4. सायं काल का मुहूर्त – शाम 6:32 बजे से 7:43 बजे तक का समय भी गणगौर पूजा के लिए अनुकूल रहेगा।
गणगौर व्रत की कथा
एक समय की बात है, भगवान शिव और माता पार्वती देवर्षि नारद के साथ पृथ्वी भ्रमण पर आए। उसी समय चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। माता पार्वती ने भगवान शिव से अनुमति लेकर नदी में स्नान करने का निश्चय किया। स्नान के बाद उन्होंने नदी किनारे बालू से एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ उसका पूजन किया। पूजा में माता ने शिवलिंग को भोग अर्पित किया और कुछ प्रसाद ग्रहण किया।
पूजा पूरी होने के बाद माता पार्वती ने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की। उनकी भक्ति और समर्पण देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने माता पार्वती से कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा। इसके अलावा, वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी। वरदान देने के बाद भगवान शिव वहाँ से अंतर्ध्यान हो गए।
पूजा में समय लगने के कारण माता पार्वती थोड़ी देर बाद भगवान शिव के पास पहुँचीं। वहाँ देवर्षि नारद भी उपस्थित थे। भगवान शिव ने देरी का कारण पूछा, तो माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि रास्ते में उनके मायके के लोग मिल गए थे। उन्होंने माता को भोजन और थोड़ी देर विश्राम करने की अनुमति दी।
भगवान शिव ने उस भोजन का स्वाद लेने की इच्छा जताई और तुरंत माता पार्वती के साथ नदी की ओर चल पड़े। माता पार्वती चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि उनकी प्रतिष्ठा और व्रत सुरक्षित रहें।
नदी तट पर पहुँचने पर माता पार्वती ने एक भव्य महल देखा, जिसमें उनके भाई-भौजाई और परिवारजन उपस्थित थे। उन्होंने भगवान शिव का सत्कार किया। प्रसन्न होकर भगवान शिव दो दिन वहाँ रुके। तीसरे दिन माता पार्वती ने आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन भगवान शिव और समय बिताना चाहते थे। अंततः माता पार्वती अकेले प्रस्थान की और भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनका अनुसरण करने लगे।
रास्ते में भगवान शिव को याद आया कि उनकी माला वहीं छूट गई है। माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने नारद जी को भेजा। नारद जी जब वहाँ पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि महल और लोग गायब हो गए हैं और जगह पर घना जंगल और जंगली जानवर हैं।
तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी ने देखा कि भगवान शिव की माला एक वृक्ष पर लटकी हुई है। उन्होंने माला उठाई और घटना भगवान शिव को बताई। भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है, ताकि उनका पूजन और व्रत गुप्त रहे। माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ।
देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियों को अटल सौभाग्य और पति की दीर्घायु प्राप्त होती है। नारद जी ने यह भी कहा कि गुप्त रूप से की जाने वाली पूजा अधिक फलदायी होती है। जो स्त्रियाँ पति की भलाई और सुख के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा। इसी प्रकार जो कन्याएँ यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होगा।
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