Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में कौन सी सब्जियों को खा सकते हैं? किनसे करें परहेज, जानें यहां
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो चुकी है. आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है, जो माता चंद्रघंटा को समर्पित होता है. नवरात्रि पर लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और घर में प्याज-लहसुन का सेवन नहीं करते हैं. इस पर्व के अपने नियम है जिनका पालन करना जरूरी है. नवरात्रि में सात्विक खाना ही खाया जाता है. मगर क्या हर सब्जी इस समय खाई जा सकती है? चलिए जानते हैं.
आध्यात्मिक और स्वास्थ्य से जुड़ा उद्देश्य
मान्यता है कि ऐसा करने के पीछे का उद्देश्य आध्यात्मिक अभ्यासों पर ध्यान केंद्रित करते हुए हमारे शरीर को हल्का और शुद्ध रखने का होता है. हालांकि, कई लोगों में इस बात को लेकर भ्रांतियां बना रहती हैं कि, कौन-सी सब्जियां खाने की अनुमति है और किन्हें नहीं खाना चाहिए. बता दें कि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में नवरात्रि को लेकर नियम थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए एक सामान्य दिशा निर्देश का पालन करना जरूरी होता है.
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नवरात्रि व्रत के दौरान कौन-कौन सी सब्जियां खाएं?
नवरात्रि व्रत के दौरान व्रती लोग तथा सात्विकता पालन करने वाले लोग आलू, शकरकंदी, कच्चा केला, कद्दू, लौकी, खीरा, टमाटर और पालक खा सकते हैं. इन्हें सात्विक आहार में शुद्ध माना जाता है. साथ ही, ये ऐसी सब्जियां है जिन्हें व्रत के दौरान खाने से शरीर को ताकत मिलती है. इन सब्जियों का पाचन भी जल्दी हो जाता है.
क्यों खाएं ये सब्जियां?
माना जाता है कि आलू जल्दी पच जाता है तो वहीं, शकरकंदी फाइबर से भरपूर सब्जी है. कच्चा केला भी विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरा होता है. कद्दू को सात्विक सब्जी कहते हैं तथा लौकी और कद्दू हाइड्रेशन का भी काम करते हैं. खीरा भी नवरात्रि में खा सकते हैं. ये शरीर को ठंडा रखता है. व्रत के दौरान टमाटर का सब्जियों में प्रयोग करके पकाने से उसका स्वाद बढ़ जाता है. पालक आयरन का सोर्स है.
नवरात्रि व्रत में कौन सी सब्जियों के सेवन से बचें?
नवरात्र के दौरान हमें प्याज, लहसुन, बैंगन, मटर, मक्का, शिमला मिर्च, गाजर और बीन्स नहीं खानी चाहिए. इन सब्जियों को शुद्ध नहीं माना गया है.
नवरात्रि आहार के कुछ जरूरी नियम
- नवरात्रि में खाना बनाने के लिए कम मात्रा में केवल सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए.
- प्रोसेस्ड और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए.
- व्रत का खाना पकाने के लिए उबालने या भूनने जैसी कुकिंग टिप्स अपनाएं.
- पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के रस का सेवन करे. ये शुद्ध और शरीर में पानी की कमी दूर करने में मदद करते हैं.
- इस दौरान न्यूट्रिशन की कमी से बचने के लिए फलों और डेयरी पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए.
व्रत में ऊर्जा बनाए रखने के आसान उपाय
चैत्र नवरात्रि के दौरान लंबे समय तक व्रत रखने से शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है, इसलिए जरूरी है कि आप अपने खानपान का संतुलन बनाए रखें. दिन की शुरुआत हल्के और पौष्टिक आहार से करें, जैसे फल, दही या दूध. इससे शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और आप दिनभर एक्टिव महसूस करते हैं. व्रत में साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और कुट्टू का आटे का सेवन भी बेस्ट विकल्प है. इनस कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन भी पकाए जा सकते हैं.
इन बातों का रखें ध्यान?
व्रत के दौरान ज्यादा तला-भुना खाना खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन पर असर पड़ सकता है. कोशिश करें कि आप हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन ही लें. साथ ही, एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाएं, ताकि शरीर पर दबाव न पड़े.
व्रत में हेल्दी ड्रिंक्स भी पिएं
नवरात्रि के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है. आप नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और ताजे फलों के जूस का सेवन कर सकते हैं. ये न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि डिहाइड्रेशन से भी बचाते हैं. खासकर गर्मी के मौसम में यह और भी जरूरी हो जाता है.
किन गलतियों से बचें?
अक्सर लोग व्रत में सिर्फ आलू या तली हुई चीजों पर निर्भर हो जाते हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है. साथ ही, पर्याप्त नींद लेना और तनाव से दूर रहना भी जरूरी है, ताकि आप नवरात्रि के पूरे नौ दिन स्वस्थ और ऊर्जावान बने रहें.
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प्रकृति का अनमोल उपहार है शहतूत, स्वाद के साथ देता है सेहत का वरदान
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। गर्मियों की शुरुआत के साथ रसीले फल भी बाजार में आने लगते हैं। तरबूज और खरबूज के साथ शहतूत भी मार्च और अप्रैल के महीने में ही आता है, लेकिन खास बात यह है कि यह एक सीमित समय के लिए आता है।
शहतूत को अन्य भाषाओं में तूत या मलबेरी के नाम से भी जाना जाता है। शहतूत के स्वाद के बारे में सभी बात करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना है? यह पेड़ अपनी रसीली फलियों, पत्तियों और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।
आयुर्वेद में शहतूत की छाल, फल और जड़ को गुणों का खजाना माना गया है। सदियों में उनका इस्तेमाल कई रोगों में होता आया है, जैसे खांसी, बुखार और डायबिटीज। शहतूत के रसीले फल विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और पाचन में मदद करते हैं। इसे आयुर्वेद में पित्तवातशामक माना गया है, जो रक्त को शुद्ध करने में भी मददगार है। इसका स्वाद मीठा और खट्टा दोनों होता है,जो शरीर में बढ़ रहे वात को संतुलित करने में सहायक है।
इसकी छाल का काढ़ा और चूर्ण भी कई रोगों में लाभदायक होता है, हालांकि सेवन से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
शहतूत के फल में एंटी-एजिंग गुण मौजूद होते हैं, जो बढ़ती उम्र के असर को कम करता है और झुर्रियों को आने से रोकता है। अगर चेहरे पर दाग-धब्बे और रूखापन रहता है, तब भी फल का सेवन करना लाभकारी होगा। यह चेहरे को नई चमक देगा और आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। भरपूर विटामिन ए का सोर्स होने की वजह से यह आंखों की रोशनी को बढ़ाता है।
शहतूत में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं, जो त्वचा को बाहरी संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं। यह एक्जिमा-सोरायसिस जैसे रोगों में भी दवा की तरह काम करते हैं। इसके साथ ही शहतूत में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, तो इसका सेवन मधुमेह के रोगी भी कर सकते हैं। यह रक्त में शर्करा की मात्रा को संतुलित रखता है और इसमें आयरन की मात्रा भी अधिक होती है। शरीर में रक्त की पूर्ति और एनीमिया से बचने के लिए इसका सेवन रोजाना किया जा सकता है।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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