New Income Tax Regime: 1 अप्रैल से लागू होंगे नये इनकम टैक्स नियम, होंगे ये बड़े बदलाव
New Income Tax Regime: भारत सरकार मे आयकर अधिनिम 2026 को नोटिफाई कर दिया है. अब 1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स नियम लागू हो जाएंगे. बता दें कि यह नया नियम 64 साल बाद पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह ले रहा है. यह नियम HRA लेकर अलाउंस को भी टैक्सेशन के तहत डिस्क्राइब करेगा. चलिए जानते हैं इससे क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं.
नए इनकम टैक्स रिजाइम से होंगे ये बदलाव
1.मकान किराया भत्ता में बदलाव
पुरानी टैक्स व्यवस्था में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबादा, पुणे और बेंगलुरु समेत कई शहरों के हाई HRA छूट के दायरे में रखा जाएगा. इन शहरों में रहने वाले लोग अपनी सैलरी से 50% तक HRA क्लेम कर सकते हैं. वहीं, अन्य स्थानों पर रहने वाले 40% तक एचआरए क्लेम कर पाएंगे.
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2. कंपनी की कार और ड्राइवर से जुड़े नियम
आयकर नियम, 2026 के अपडेट के तहत अगर कर्मचारी कंपनी की कार का इस्तेमाल ऑफिस और निजी दोनों कामों के लिए करता है, तो 1.6 लीटर तक इंजन वाली कार 5,000 रुपए प्रति माह टैक्सेबल वैल्यू. 1.6 लीटर से बड़ी कार के लिए 7,000 रुपए प्रति माह क्लेम किया जा सकेगा. अगर कंपनी ड्राइवर भी देती है, तो हर महीने 3,000 रुपए अतिरिक्त टैक्सेबल वैल्यू में जोड़ दिए जाएंगे.
3. गिफ्ट और वाउचर पर छूट
कंपनी की ओर से दिए गए 15,000 रुपए तक के गिफ्ट या वाउचर टैक्स-फ्री रहेंगे. 15,000 रुपए से ज्यादा होने पर पूरी राशि टैक्सेबल हो जाएगी
4. फ्री फूड और बेवरेज पर बढ़ी छूट
वर्किंग आवर्स में दिए जाने वाले नि:शुल्क भोजन और पेय पदार्थों पर कैश वाउचर के जरिए दी जाने वाली छूट की लिमिट 200 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. पहले प्रति मील 50 रुपए तक टैक्स छूट मिलती थी अब इसे बढ़ाकर 200 रुपए प्रति मील कर दिया गया है. यानी नए नियम के तहत ऑफिस में मिलने वाले खाने-पीने पर अब ज्यादा राहत मिलेगी.
5. एजुकेशन और हॉस्टल अलाउंस
नए इनकम टैक्स नियमों के तहत अब बच्चों की पढ़ाई से जुड़े अलाउंस पर भी राहत दी गई है. एजुकेशन अलाउंस 3,000 रुपए प्रति माह (अधिकतम 2 बच्चों के लिए) हो गया है. हॉस्टल अलाउंस 9,000 रुपए प्रति माह. पहले ये लिमिट काफी कम थी 100 रुपए और 300 रुपए, जिसे अब काफी बढ़ा दिया गया है.
6. घरेलू सेवाओं और यूज पर टैक्स का अपडेट
सफाईकर्मी, माली और चौकीदारी की सेवाओं के लिए भुगतान किया जा रहा है तो सैलरी पर टैक्स लागू होगा, जिससे कर्मचारी से प्राप्त की गई राशि कम हो जाएगी. आउट सोर्स से मिले गैस, बिजली और पानी के भुगतान हुई राशि भी टैक्सेबल अमाउंट में काउंट किया जाएगा. अगर नियोक्ता के अपने संसाधनों से आपूर्ति होती हैं, टैक्स का कैल्कुलेश पर यूनिट उत्पादन लागत के आधार पर होगी.
7. फूड कूपन और अन्य सुविधाएं
कार्य समय के दौरान मिलने वाला फ्री खाना या कैश वाउचर रुपए 200 तक टैक्स-फ्री रहेगा. नए टैक्स सिस्टम में फूड कूपन का लाभ भी जारी रहेगा.
8. टैक्स कटौती के लिए जरूरी दस्तावेज
अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो कुछ जरूरी दस्तावेज देना अनिवार्य होगा. HRA के लिए मकान मालिक का नाम, पता और PAN नंबर. अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है तो यह जरूरी है. मकान मालिक से रिश्ते की जानकारी भी देनी होगी. LTA यानी यात्रा भत्ता के लिए यात्रा खर्च के प्रमाण. होम लोन ब्याज के लिए लोन देने वाले का नाम, पता और पैन नंबर.
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चैत्र नवरात्र में पूजा पाठ के साथ औषधीय गुणों से भरपूर है दूब घास; जानें उपयोग के लाभ
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्र में दूब घास की महत्ता बढ़ जाती है क्योंकि बिना दूब घास के मां जगदम्बा का पूजन भी अधूरा है।
मां को चैत्र नवरात्र में दूब घास अर्पित की जाती है। घर में कन्या पूजन के समय भी दूब घास का इस्तेमाल पैर छूने में किया जाता है। दूब के आध्यात्मिक महत्व के बारे में सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूब घास का इस्तेमाल शरीर को आंतरिक और बाहरी पोषण प्रदान करता है।
आयुर्वेद में दूब घास को अमृता की उपाधि दी गई है। इसके गुण न सिर्फ मनुष्यों के लिए, बल्कि बहुत पशुओं के लिए भी लाभकारी हैं। दूब घास को कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि माना गया है। अगर शरीर में वात और कफ असंतुलन हैं, तो इसका सेवन दोषों को संतुलित करता है, लेकिन इसके प्रयोग से पहले उसके आंतरिक और बाहरी उपयोग के गुणों को भी जानना जरूरी है।
पहले बात करते हैं बाहरी उपयोग की। दूब घास में रक्त को रोकने की क्षमता होता है। अगर चोट लग जाने पर रक्त नहीं रुक रहा है या पुराने घाव में रुक-रुककर खून आता है, तो दूब घास का लेप किया जा सकता है। यह रक्त को रोकने के साथ घाव को भरने में भी मदद करेगा और संक्रमण से भी बचाएगा। गर्मियों के शुरुआत के साथ ही लोगों के नाक से खून आने और सिरदर्द की समस्या भी आम है। ऐसे में दूब का रस नाक में डालने से आराम मिलता है। इसके साथ ही मुल्तानी मिट्टी को भिगोकर उसे सूंघ भी सकते हैं। इसके अलावा, अगर गर्मियों में त्वचा जलने लगती है, तब भी दूब का लेप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब बात करते हैं इसके आंतरिक उपयोग की। दूब घास का सेवन पेट संबंधी परेशानियों में और मासिक धर्म में होने वाले दर्द के लिए किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टरी सलाह के बाद ही दूब के रस का सेवन करें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
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