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7.7 लाख टन बैरल, सबसे बड़ा खिलाड़ी तो भारत निकला, बीच युद्ध ये किस देश से तेल उठा लाया

महायुद्ध के बाद पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर भी है। आज एकवा टाइटन नाम का जहाज करीब 770 बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर मंगलौर पहुंचने वाला है। शिपिंग डाटा और सूत्रों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोई भी कच्चा तेल टैंकर इस जलमार्ग से बाहर नहीं निकल पाया है। लेकिन अब भारतीय ध्वज वाले दो गैस टैंकर आने वाले दिनों में होमूस से गुजरने की तैयारी में हैं। शिवालिक और नंदा देवी को भी आपने देखा था किस तरीके से वह पहुंचा था और जग लाडकी भी क्रूड ऑयल लेकर पहुंचा था। ऐसे में गैस की जो किल्लत यहां पर लगातार बात सामने आ रही थी सरकार उसको लेकर स्पष्टीकरण लगातार दे रही थी कि ऐसी कोई भी दिक्कत नहीं है और आप देखिए तस्वीरें भी जो सामने आ रही है लगातार भारतीय कई सारे जहाज तेल और एलपीजी लेकर गैस लेकर भारत आ रहे हैं। 

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पहले चीन जा रहा था

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी द्वारा यह खुलासा किए जाने के बाद कि रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन (पूर्व नाम लैंग या) को एमआरपीएल द्वारा किराए पर लिए जाने के बाद अब वह न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर जा रहा है, शेयरों में तेजी आई। जहाज के शनिवार, 21 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है। रूस के यूराल्स क्रूड से लदा यह टैंकर कथित तौर पर चीन जा रहा था, लेकिन बाद में दक्षिण-पूर्वी एशियाई जलक्षेत्र में अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर चल पड़ा। भारतीय सरकार के अधिकारियों ने पहले कहा था कि उन्हें जहाज के मार्ग परिवर्तन की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राकेश कुमार सिन्हा ने बाद में पुष्टि की कि टैंकर कच्चे तेल के साथ भारत की ओर जा रहा है। 

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प्रतिबंधित पोत

जून में, रूसी कच्चे तेल की ढुलाई के लिए ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रतिबंधित 60 जहाजों में एक्वा टाइटन भी शामिल था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि ये जहाज धोखाधड़ी वाली प्रथाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें ध्वज बदलना और ट्रैकिंग सिस्टम को निष्क्रिय करना शामिल है। एक्वा टाइटन पर ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ और यूक्रेन द्वारा भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। एक्वा टाइटन पर भी प्रतिबंध लगा है... मूलतः, डार्क फ्लीट के जहाजों पर अंततः रूसी सरकार का ही नियंत्रण है," नॉर्वे स्थित ऊर्जा खुफिया कंपनी रायस्टैड एनर्जी के वरिष्ठ विश्लेषक एरिक ग्रुंड्ट ने द हिंदू को बताया। अमेरिका ने पहले रूसी कच्चे तेल की खरीद पर भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। अमेरिका और भारत के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दंडात्मक टैरिफ रद्द कर दिए। ट्रम्प ने कहा भारत ने रूसी संघ के तेल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिका द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात करने की अनुमति दिए जाने के बाद एक्वा टाइटन ने अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर मोड़ दिया।

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Gangaur Ki Kahani: गणगौर का व्रत आज, पूजा करते समय जरूर पढ़ें शिव-पार्वती की यह व्रत कथा

Gangaur Ki Kahani: गणगौर, राजस्थान का पौराणिक पर्व है. आज 21 मार्च 2026, शनिवार को गणगौर का व्रत रखा जा रहा है. यह त्योहार माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है. गणगौर का त्योहार हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस त्योहार को भक्ति, वैवाहिक सुख और समृद्धि का प्रतीक कहा जाता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है. अविवाहित कन्याएं आज के दिन अच्छे जीवनसाथी की कामना का व्रत करती है.

गणगौर 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल गणगौर 21 मार्च को है. तृतीया तिथि सुबह जल्दी शुरू होकर रात्रि में समाप्त होती है. आज इन सभी मुहूर्तों में पूजा की जाती है.

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05:07 से 05:54 तक
  • प्रातः सन्ध्या - 05:31 से 06:42 
  • अभिजित मुहूर्त - 12:21 से 01:10 
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06:48 बजे से 07:12 तक
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:50 से 08:01
  • अमृत काल - 05:58 से 07:27

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गणगौर की व्रत कथा

एक समय की बात है जब भगवान शिव और देवी पार्वती नारद मुनि के साथ पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आए थे. संयोग से वह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी. माता पार्वती ने भगवान शिव से अनुमति लेकर नदी में स्नान करने का निश्चय किया. स्नान के पश्चात माता पार्वती ने नदी के किनारे बालू से एक पार्थिव शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ उसका पूजन किया. पूजन में माता ने बालू से बने पदार्थों का भोग अर्पित किया और उसी में से थोड़े कणों को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया.

पूजन के बाद उन्होंने विधिपूर्वक प्रदक्षिणा की और पूरे विधि विधान के साथ पूजा संपन्न की. माता पार्वती की भक्ति और समर्पण से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उसी पार्थिव शिवलिंग से प्रकट होकर उन्हें वरदान दिया. भगवान शिव ने कहा कि इस दिन जो स्त्री उनका पूजन और माता पार्वती का व्रत करेगी, उसके पति को लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन मिलेगा. साथ ही वह स्त्री अंततः मोक्ष को प्राप्त होगी. यह वरदान देकर भगवान शिव वहां से अंतर्ध्यान हो गए.

पूजा में समय लग जाने के कारण माता पार्वती लौटने में थोड़ी देर हो गईं. जब वे भगवान शिव के पास पहुंचीं, तो वहां देवर्षि नारद भी उपस्थित थे. भगवान शिव ने उनसे देरी का कारण पूछा. माता पार्वती ने विनम्रता से उत्तर दिया कि नदी किनारे उनके मायके के लोग मिल गए थे. उन्होंने आग्रह करके माता को दूध-भात ग्रहण करने और थोड़ी देर विश्राम करने को कहा.

भगवान शिव ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भी उस भोजन का स्वाद लेना चाहते हैं और तुरंत नदी की ओर चल पड़े. माता पार्वती मन ही मन चिंतित हो गईं और भगवान शिव से प्रार्थना करने लगीं कि वे उनकी प्रतिष्ठा और व्रत की रक्षा करें.

नदी तट पर पहुंचने पर माता पार्वती ने एक विशाल और भव्य महल देखा. महल में प्रवेश करने पर उनके भाई-भौजाई और कुटुम्ब जन वहां उपस्थित थे. उन्होंने भगवान शिव का भव्य सत्कार किया और उनकी स्तुति की. प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां दो दिन तक रुके. तीसरे दिन माता पार्वती ने शिव जी से आग्रह किया कि अब उन्हें लौटना है, लेकिन शिव जी और अधिक समय रुके रहना चाहते थे. माता पार्वती ने अकेले ही वहां से प्रस्थान किया, और अंततः भगवान शिव देवर्षि नारद के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़े.

चलते-चलते भगवान शिव को याद आया कि उन्होंने अपनी माला वहीं छोड़ दी है. माता पार्वती माला लेने जा रही थीं, लेकिन शिव जी ने उन्हें रोकते हुए देवर्षि नारद को भेजा. नारद जी जब नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां कोई महल नहीं है. जगह पर घना जंगल था, जिसमें कई हिंसक जानवर विचरण कर रहे थे. नारद जी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए.

तभी अचानक बिजली चमकी और नारद जी को एक वृक्ष पर भगवान शिव की माला लटकी दिखाई दी. उन्होंने माला उठाई और भगवान शिव को पूरी घटना सुनाई. नारद जी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसे संभव हुआ कि महल और लोग गायब होकर जंगल में बदल गए.

इस पर भगवान शिव मुस्कुराए और बोले कि यह उनकी नहीं, बल्कि माता पार्वती की लीला है. उन्होंने अपने पूजन और व्रत को गुप्त रखने के लिए यह मायावी दृश्य रचा. माता पार्वती ने विनम्रता से कहा कि यह सब उनकी नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा से संभव हुआ.

देवर्षि नारद ने माता पार्वती की भक्ति और पतिव्रत धर्म की सराहना करते हुए कहा कि वे पतिव्रताओं में सर्वोत्तम हैं. उनके स्मरण मात्र से स्त्रियों को अटल सौभाग्य प्राप्त होता है. नारद जी ने आगे कहा कि गुप्त पूजन सामान्य पूजा से अधिक फलदायी होता है. जो महिलाएं अपने पति की भलाई और मंगलकामना के लिए गुप्त रूप से पूजा और व्रत करेंगी, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलेगा. इसी प्रकार जो कन्याएं यह व्रत करेंगी, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा.

गणगौर का लोकगीत

गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती
पार्वती का आला-गीला, गौर का सोना का टीका
टीका दे, टमका दे, बाला रानी बरत करयो
करता करता आस आयो वास आयो
खेरे खांडे लाडू आयो, लाडू ले बीरा ने दियो
बीरो ले मने पाल दी, पाल को मै बरत करयो
सन मन सोला, सात कचौला , ईशर गौरा दोन्यू जोड़ा
जोड़ ज्वारा, गेंहू ग्यारा, राण्या पूजे राज ने, म्हे पूजा सुहाग ने
राण्या को राज बढ़तो जाये, म्हाको सुहाग बढ़तो जाये,
कीड़ी- कीड़ी, कीड़ी ले, कीड़ी थारी जात है, जात है गुजरात है,
गुजरात्यां को पाणी, दे दे थाम्बा ताणी
ताणी में सिंघोड़ा, बाड़ी में भिजोड़ा
म्हारो भाई एम्ल्यो खेमल्यो, सेमल्यो सिंघाड़ा ल्यो
लाडू ल्यो, पेड़ा ल्यो सेव ल्यो सिघाड़ा ल्यो
झर झरती जलेबी ल्यो, हर-हरी दूब ल्यो गणगौर पूज ल्यो
इस प्रकार सोलह बार बोल कर अन्त में बोलें- एक-लो , दो-लो सोलह-लो।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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  Sports

IPL 2026 से पहले केकेआर में इस गेंदबाज की एंट्री, आकाशदीप की जगह हुआ टीम में शामिल

आईपीएल 2026 से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स में तेज गेंदबाज आकाशदीप की जगह सौरव दुबे की एंट्री हुई है। तीन बार की चैंपियन टीम इस बार भी अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में चैंपियन बनने की कोशिश करेगी। हालांकि, टीम में खिलाड़ियों के चोटिल होने का क्रम जारी है जिससे टीम की चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में आकाशदीप भी चोटिल होने के कारण टीम से बाहर हो गए। 

आकाशदीप केकेआर के अहम गेंदबाज थे लेकिन उनका बाहर होना टीम के लिए बड़ा झटका रहा। हालांकि, अब उनकी जगह टीम में बाएं हाथ के तेज गेंदबाज विदर्भ के सौरव दुबे को जरूर टीम में शामिल किया गया है। लेकिन सौरव का कद आकाशदीप जितना तो नहीं है साथ ही उनका अनुभव भी टी20 क्रिकेट में काफी कम है जो केकेआर को परेशानी में डाल सकता है। 

केकेआर में शामिल किए गए सौरव दुबे के पास टी20 क्रिकेट खेलने का ज्यादा अनुभव तो नहीं है। 28 वर्षीय सौरव ने अब तक सिर्फ 3 टी20 मैच खेले हैं जिसमें उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला और इन मैचों में उन्होंने 60 गेंदे फेंकी और 121 रन लुटाए। इससे पहले सौरव को सनराइजर्स हैदराबाद ने साल 2022 में 20 लाख रुपये में खरीदा था, लेकिन उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं मिला था। 

फिलहाल, विदर्भ के लिए खेलने वाले सौरव ने अपने क्रिकेट करियर में अब तक 8 लिस्ट एक मैच खेले हैं। जिसमें उन्होंने 16 विकेट लिए हैं और उनका बेस्ट प्रदर्शन 26 रन देकर 4 विकेट रहा है। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने एक बार फोर विकेट हॉल लेने का कमाल भी किया है। 
Mon, 23 Mar 2026 13:56:57 +0530

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