Eid 2026: इस ईद पैसे नहीं, दिखाएं इमोशन, ईदी की जगह अपनों को दें ये खास तोहफे
Eid 2026: आज देशभर में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है. यह त्योहार नहीं बल्कि अपनों के साथ खुशियां मनाने और अपनापन दिखाने का उत्सव होता है. ईद पर तोहफे या ईदी देने की परंपरा काफी पुरानी है. इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों और छोटों को ईदी देते हैं, मिठाई देकर अपने रिश्तों में मिठास बढ़ाने का प्रयास करते हैं. अगर आप भी इस साल अपनों को ईद पर क्या गिफ्ट दें, इस बात को सोचकर परेशान हैं तो यह खबर आपके काम की है. हम आपको इस रिपोर्ट में कुछ ऐसे गिफ्ट आइडियाज दे रहे हैं, जिनमें बजट फ्रेंडली तोहफे दे सकते हैं.
ईद पर क्या उपहार दें? (Eid 2026 Gift Ideas)
कपड़े
ईद का त्योहार हो और नए कपड़े न हों. ऐसा नामुमकिन है. आप इस बार अपने लोगों को ईद पर कपड़े भेंट कर सकते हैं. यह सबसे सेफ और पसंद किया जाने वाला तोहफा होता है. आप महिलाओं को कुर्ता, स्टॉल या फिर ट्रेंड में चल रहे आउटफिट गिफ्ट कर सकते हैं. वहीं, पुरुषों को भी कुर्ता-पायजामा, हल्के रंग के कुर्ते या शर्ट दे सकते हैं. इस ईद वे इन्हें पहन भी सकेंगे.
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नमाज की चटाई
ईद के त्योहार को और खास बनाने के लिए आप तोहफे में नमाज की चटाई भी दे सकते हैं. आजकल बाजार में नाम वाली चटाई का ट्रेंड चल रहा है. आप भी कस्टमाइज्ड नमाज की चटाई बनवाकर तोहफे में दे सकते हैं. यह गिफ्ट भले ही आध्यात्मिक हो मगर जब भी शख्स आपकी तोहफे में दी हुई चटाई पर नमाज अता करेगा तो उसे आपकी याद जरूर आएगी.
अत्तर
ईद और अत्तर का रिश्ता बहुत पुराना है. यह गिफ्ट आप परंपरा के साथ-साथ पर्सनल फील भी जाहिर करेगा. आप अपने खास लोगों को ईद के मौके पर अत्तर का तोहफा भेंट कर सकते हैं. उन्हें गुलाब, ऊद, मुश्क या चमेली का अत्तर दे सकते हैं. आजकल मार्केट में एस्थेटिक खूशबू वाले अत्तर जैसे गीली मिट्टी और चंदन की खूशबू वाले भी मिल रहे हैं. यह एक शानदार गिफ्ट का ऑप्शन हो सकता है.
किताबें
ईद पर आप किताबें भी दे सकते हैं. अगर किसी को किताब पढ़ने का शौक है तो उन्हें इस बार उनके टेस्ट के अनुसार, बुक गिफ्ट रकर सकते हैं. अगर वे इस्लामिक जानकारियों के बारे में जानना चाहते हैं तो उन्हें आध्यात्म से जुड़ी बुक दे सकते हैं. आप थॉटफुल बुक्स भी दे सकते हैं.
किड्स स्पेशल
अगर आप ईद पर बच्चों को क्या तोहफा दें, यह नहीं समझ पा रहे हैं तो उनके लिए कुछ स्पेशल बनाए. जैसे कि आप उन्हें किड्स स्पेशल ईजी बास्केट बनाकर दें. इस बास्केट में उन्हें चॉकलेट्स, टेडी बियर, छोटी-छोटी कारें-टॉयज और पढ़ने-लिखने का सामान जैसे कि जियोमेटरी बॉक्स, फैंसी पेंसिल, अलग-अलग प्रकार के रंग और कुछ कहानियों वाली किताबें भी बास्केट में सजाकर गिफ्ट कर सकते हैं. यह गिफ्ट उन्हें जरूर पसंद आएगा.
सेल्फ-केयर बास्केट
ईद पर आप लड़कियों को सेल्फ-केयर बास्केट गिफ्ट कर सकते हैं. इस बास्केट में आप उन्हें फेसवॉश, क्रीम, सनस्क्रीन और लिपबाम-लिप्स्टिक के साथ शैंपू, बॉडी वॉश और परफ्यूम के साथ-साथ उन्हें मेकअप से जुड़ी अन्य चीजें भी दे सकते हैं. यह बास्केट आपकी बहन, वाइफ, दोस्त या किसी भी परिजन को बहुत ज्यादा पसंद आने वाला है.
फ्रूट बास्केट
ईद पर फ्रेश फलों की एक प्यारी से और रंगों से भरी बास्केट बनाकर तोहफे में दे सकते हैं. यह काफी सिंपल गिफ्ट है लेकिन जो लोग हेल्थ कॉन्शियस होते हैं, उन्हें बेहद पसंद आएगा. ये हेल्दी गिफ्ट्स का बेस्ट ऑप्शन है. आप फ्रेश फलों के साथ ड्राई-फ्रूट्स भी दे सकते हैं.
माइक्रोग्रैविटी इम्यून सिस्टम को कैसे प्रभावित करती है, आईएसएस के 'इम्यून एसे' से समझें
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। स्पेस मिशन में माइक्रोग्रैविटी, रेडिएशन जैसी चुनौतियां इम्यून सिस्टम पर भारी पड़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर माइक्रोग्रैविटी का असर समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार जांच कर रहे हैं। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) की इम्यून एसे में क्रू मेंबर्स के ब्लड सैंपल्स से सेलुलर इम्यून फंक्शन की काफी लंबे समय से निगरानी की जा रही है।
2023 में किए ग्राउंड स्टडीज से पता चला है कि माइक्रोग्रैविटी या अलग-थलग रहने से इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में एक डिवाइस की मदद से यह टेस्टिंग अब अंतरिक्ष में भी संभव हो गई है, जो पहले सिर्फ धरती पर ही हो पाती थी। इसका नाम इम्यून एसे है, जिसका मुख्य उद्देश्य उड़ान के दौरान इम्यून सिस्टम में होने वाले बदलावों को सटीक तरीके से ट्रैक करना है। इस नए कलेक्शन डिवाइस से रिसर्चर्स को ज्यादा साफ डेटा मिल रहा है। नतीजे स्पेस और धरती दोनों जगह इम्यून मॉनिटरिंग के लिए एक उपयोगी टूल बन सकते हैं।
यह जांच लंबे स्पेस मिशन के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण है। अगर इम्यून सिस्टम में बदलाव जल्द पकड़ में आएं तो बीमारियों की शुरुआत को रोककर अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। माइक्रोग्रैविटी इम्यून सेल्स में ऐसे बदलाव लाती है, जो उम्र बढ़ने या इम्यूनोसेनेसेंस जैसे लगते हैं, लेकिन ये प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है। इससे उन सेल्स पर असर पड़ता है, जो ऊतकों की मरम्मत और रिजेनरेशन में मदद करते हैं। इम्यूनोसेनेसेंस जांच इसी पर फोकस कर रही है कि क्या उड़ान के बाद यह बदलाव ठीक हो जाते हैं।
माइक्रोग्रैविटी को इम्यून एजिंग तेज करने के टूल के रूप में इस्तेमाल करने से स्टेम सेल बायोलॉजी में नई जानकारियां मिल सकती हैं। इससे धरती पर बुजुर्गों के कमजोर इम्यून सिस्टम के लिए बेहतर इलाज विकसित हो सकते हैं। पिछली जांच टी-सेल एक्ट इन एजिंग में पहली बार वैज्ञानिकों ने दिखाया कि ग्रैविटी टी-सेल एक्टिवेशन को प्रभावित करती है। टी-सेल्स इम्यून सिस्टम को सही निर्देश देते हैं।
माइक्रोग्रैविटी में कुछ खास जीन डाउन रेगुलेट हो जाते हैं, जिससे सेल रिस्पॉन्स कमजोर पड़ता है। इससे प्रो-इंफ्लेमेटरी रिएक्शन घटता है, हीलिंग धीमी होती है, साइटोकिन्स या सेल कम्युनिकेशन प्रोटीन कम बनते हैं और सेल मल्टीप्लिकेशन की क्षमता घट जाती है। नतीजा इन्फेक्शन से सुरक्षा कमजोर हो जाती है।
एक और महत्वपूर्ण जांच इंटीग्रेटेड इम्यून में उड़ान से पहले, दौरान और बाद में ब्लड, यूरिन और लार के सैंपल्स का विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि लंबे मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को स्किन रैश, सांस की तकलीफ, बोन रिसॉर्प्शन, किडनी स्टोन और इम्यून डिसरेगुलेशन जैसी समस्याएं होती हैं। बिना बेहतर पोषण और दवाओं के ये जोखिम बढ़ सकते हैं।
ईएसए की इम्यूनो जांच से पता चला कि टोल-लाइक रिसेप्टर्स (टीएलआर) में उड़ान के बाद बदलाव आते हैं, जो हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग री-अडैप्टेशन दिखाते हैं। इससे स्ट्रेस रिस्पॉन्स और प्रो-इंफ्लेमेटरी स्थिति का संकेत मिलता है। इम्यूनो-2 जांच ने इसे आगे बढ़ाया। इसमें खून, लार, सांस, बाल के सैंपल्स के साथ ईसीजी, ब्लड ऑक्सीजन, एक्टिविटी और साइकोलॉजिकल टेस्टिंग शामिल है। ये सभी जांच स्पेस में इम्यून सिस्टम के अनुकूलन को समझने में मदद कर रही हैं। इससे लंबे मिशन के लिए दवाएं और नए टूल्स विकसित करने में वैज्ञानिकों को और भी मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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