सुरक्षा समीक्षा में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने की आईडीएफ की सराहना, देशवासियों पर जताया गर्व
तेल अवीव, 20 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के सेंट्रल कमांड में एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा आकलन किया। इस दौरान उन्होंने इजरायल डिफेंस फोर्स, इजरायल सुरक्षा एजेंसी के ऑपरेशन “रोअरिंग लायन” के तहत किए गए अभियानों की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि “वार ऑफ रिडेम्प्शन की शुरुआत के बाद से जमीनी स्तर पर सुरक्षा स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जो आतंकवादी घटनाओं में आई उल्लेखनीय गिरावट से स्पष्ट होता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, वार ऑफ रिडेम्प्शन की शुरुआत के बाद से जमीनी स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जो आतंकवादी हमलों में उल्लेखनीय गिरावट के रूप में दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने उन लोगों की कड़ी निंदा की जो आईडीएफ के कमांडरों की आलोचना करते हैं। नेतन्याहू ने कहा ये कमांडर इजरायल और उसके सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। उन्होंने उनके प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया।
इससे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने एक संबोधन में देशवासियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि इस मुश्किल समय में मुझे आप पर गर्व है। आपके अडिग रवैये, आपकी जिम्मेदारी और आपके धैर्य पर मुझे गर्व है।
नेतन्याहू ने कहा कि इन कठिन हालात से निपटने के आपके तरीके पर माता-पिता, बच्चों, टीचिंग स्टाफ और सभी परिवारों पर मुझे गर्व है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि हम जिम्मेदारी और सही समझ के साथ धीरे-धीरे स्कूल खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि हम अपने बच्चों को जितना हो सके स्थिरता, सुरक्षा और एक नियमित दिनचर्या वापस दे सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार में अपने साथियों के साथ मिलकर नागरिकों पर बोझ कम करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रिजर्व सैनिकों और उनके परिवारों की मदद करने और इस अभियान के सभी लक्ष्यों को हासिल करने तक अपने प्रयासों में डटे रहने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आप जिस तरह का लचीलापन दिखा रहे हैं और होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन कर रहे हैं, उससे हमें इजरायल की सुरक्षा और हमारे बच्चों के भविष्य के लिए पूरी दृढ़ता के साथ काम करते रहने की ताकत मिलती है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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Iran Vs Israel US War: पर्ल हार्बर का जिक्र कर डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को चौंकाया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से नाटो पर भड़के हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को कायर कहा है. ईरान के खिलाफ जंग में नाटो ने मदद नहीं की. अमेरिका के बिना नाटो एक कागजी शेर है. यह ट्रंप ने नाटो को फटकार लगाते हुए कहा है. तो ईरान की मिसाइल आग उगल रही हैं और इजराइल ईरानी रिजीम पर लगातार हमले कर रहा है. लेकिन अब इस जंग की दशा और दिशा बदल सकती है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पर्ल हार्बर की याद दिलाई है. यानी दूसरे वर्ल्ड वॉर का वो इतिहास जिसने हिरोशिमा और नागासाकी को दहला दिया था.
दुनिया ने विध्वंस की पहली तस्वीर देखी
उस इतिहास को दुनिया आज तक भूल नहीं पाई है. इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि पर्ल हारबर का नाम लेकर आखिर ट्रंप ने क्या इशारा किया है? मिडिल ईस्ट की जंग के बीच पर्ल हारबर का खौफ क्यों आया? ईरान पर हमला हिरशिमा नागासाकी की याद क्यों दिला रहा? इस वक्त ऐसा दिख रहा है मानो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध से चंद कदम की दूरी पर खड़ी है. 85 साल पहले अमेरिका के हवाई आइलैंड पर एक भयानक हमला हुआ था और 4 साल के अंदर दुनिया ने विध्वंस की पहली तस्वीर देखी थी.
जापान के पास बेइंतहा एरियल पावर थी
7 दिसंबर 1941 अमेरिका के हवाई द्वीप का परहार यूएस नेवल बेस का पैसिफिक फ्लट और जापान का टारगेट यह वो वक्त था जब दूसरा विश्व युद्ध अपने चरम पर था. जापान के पास बेइंतहा एरियल पावर थी. जापान जंग का रुख किसी तरह अपने पक्ष में मोड़ना चाहता था. लेकिन इसके लिए जरूरी था अमेरिका को घुटनों पर लाना. जापान ने बहुत बड़ी हिमाकत की. पर्ल हारबर पर मारुती बरसात कर दी. दिसंबर 1941 की सुबह जापान ने अमेरिकी नेवल बेस के ऊपर करीब 2 घंटे तक ताबड़तोड़ बमबारी की. इस हमले के लिए जापान ने छह एयरक्राफ्ट करियर से 353 फाइटर जेट को लांच किया.
2390 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे
अटैक दो लहरों में किया गया. पहली लहर में 183 जापानी फाइटर जेट ने हमला बोला. जबकि दूसरी लहर में 170 फाइटर जेट इस्तेमाल किए गए. जापान के पर्ल हार्बर अटैक में 2390 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. हमले के अगले ही दिन अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध में पूरी तरह से कूद पड़ा और जापान के तेल और दूसरे संसाधनों पर प्रतिबंध लगा दिया. जापानी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ.
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