झारखंड के मजदूरों को तोहफा, सेफ्टी किट के लिए सरकार देगी ₹1000, जानें कैसे करें ऑनलाइन आवेदन
झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग द्वारा "निर्माण श्रमिक सेफ्टी किट योजना" का संचालन किया जा रहा है. यह पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसका लक्ष्य निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना है. इस योजना के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं से मजदूरों का बचाव हो सके. इसके लिए सरकार मजदूरों को बाजार से अच्छे ब्रांड का हेलमेट और सेफ्टी जूते खरीदने के लिए आर्थिक मदद दे रही है.
सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होंगे ₹1,000
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लाभार्थियों को किसी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे. पंजीकृत निर्माण श्रमिकों या 'झारखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड' (JBOCWW बोर्ड) के सदस्यों को उनके बैंक खाते में सीधे ₹1,000 की नकद राशि ट्रांसफर की जाएगी. इस राशि का उपयोग श्रमिक को एक ब्रांडेड हेलमेट और एक जोड़ी सेफ्टी जूते खरीदने के लिए करना होगा. ध्यान रहे कि यह लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है, जिन्होंने पहले इसका लाभ ले लिया है वे दोबारा पात्र नहीं होंगे.
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की गई हैं. आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. आवेदक की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदक एक पंजीकृत निर्माण श्रमिक होना चाहिए, जिसमें राजमिस्त्री, बढ़ई, बिजली मिस्त्री, कुली, पेंटर आदि शामिल हैं. इसके अलावा, मजदूर ने कम से कम 90 दिनों तक निर्माण कार्य किया हो. आवेदन के वक्त आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, श्रम कार्ड और बैंक खाते का विवरण होना आवश्यक है.
ऑनलाइन आवेदन करने का तरीका
योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है. सबसे पहले आवेदक को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (Comprehensive Labour Management System) पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा. रजिस्ट्रेशन के लिए अपना नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर देना होगा, जिसे ओटीपी के जरिए वेरिफाई किया जाएगा. रजिस्ट्रेशन सफल होने के बाद, यूजरनेम और पासवर्ड की मदद से लॉगिन करना होगा. इसके बाद 'Services' सेक्शन में जाकर 'BOC Scheme Benefit' पर क्लिक करना होगा और आवेदन फॉर्म भरना होगा. फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद 'Submit Request' पर क्लिक करना होगा.
तीन स्तरों पर होगी जांच और अप्रूवल
आवेदन जमा होने के बाद इसकी जांच तीन स्तरों पर की जाती है. सबसे पहले क्लर्क, फिर लेबर सुपरिटेंडेंट और अंत में डीएससी (DLC) स्तर पर आवेदन को परखा जाता है. आवेदक अपनी एप्लीकेशन आईडी की मदद से पोर्टल पर स्टेटस भी चेक कर सकते हैं. जब स्टेटस 'Approved' हो जाए, तो आवेदक उस पेज का प्रिंट लेकर लेबर ऑफिस में जमा कर सकते हैं ताकि योजना की राशि उनके खाते में भेजी जा सके. आवेदन के समय जूते और हेलमेट की खरीद की रसीद भी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी.
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चीन ने विकसित की 'दीर्घायु चावल' की नई किस्म
बीजिंग, 20 मार्च (आईएएनएस)। कई वर्षों के अध्ययन के बाद चीनी वैज्ञानिकों ने पहली बार जंगली चावल के दीर्घकालिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार मुख्य जीन की पहचान की है। इस अनुसंधान के आधार पर उन्होंने मौजूदा खेती वाले चावल से दीर्घायु चावल की एक नई किस्म विकसित की है, जिसे एक बार बोए जाने के बाद कई वर्षों तक लगातार काटा जा सकता है। यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिका साइंस के कवर पृष्ठ पर प्रकाशित की गई।
खेतों में उगाया जाने वाला साधारण चावल विश्व की सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक खाद्य फसलों में गिना जाता है। इसके विपरीत, इसका पूर्वज आम जंगली चावल एक बारहमासी और रेंगने वाला पौधा है, जो जंगली घासों की तरह पुनः विकसित होता रहता है। चीनी विज्ञान अकादमी के वैज्ञानिकों ने जंगली चावल के 446 प्रकारों का गहन विश्लेषण किया और अत्याधुनिक जैविक प्रजनन तकनीकों का उपयोग करते हुए उस मुख्य जीन की सफल पहचान और क्लोनिंग की, जो जंगली चावल के निरंतर वृद्धि और बारहमासी होने की क्षमता निर्धारित करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन में खेती योग्य भूमि का एक बड़ा भाग दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम के पहाड़ी क्षेत्रों में फैला हुआ है। बारहमासी फसलों का विकास विशेष रूप से उन इलाकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, जहां ढलान वाले खेतों और पर्वतीय स्थलों में पैदावार तुलनात्मक रूप से कम होती है। इस प्रकार दीर्घायु चावल की नई तकनीक खेती योग्य भूमि के प्रभावी उपयोग, कृषि लागत में कमी और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
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