रेहमान डकैत की पत्नी ने रणवीर सिंह को सरेआम मारा थप्पड़? फिर गले लगाकर की ऐसी हरकत
Rehman Dakait Wife Slapped Ranveer Singh: रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत करते हुए इतिहास रच दिया है. जी हां, फिल्म ने पहले ही दिन दुनियाभर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इस जबरदस्त ओपनिंग के साथ ही यह साफ हो गया है कि धुरंधर 2 की बॉक्स ऑफिस पर लंबी और मजबूत पकड़ रहने वाली है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें रेहमान डकैत की पत्नी सौम्या टंडन रणवीर सिंह को थप्पड़ मार रही हैं. चलिए आपको बताते हैं आखिर क्या पूरा मामला?
मुंबई में हुई ग्रैंड सक्सेस पार्टी
दरअसल, हाल ही में फिल्म की ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाने के लिए मुंबई में एक शानदार सक्सेस पार्टी आयोजित की गई, जिसमें फिल्म की पूरी स्टारकास्ट और कई चर्चित चेहरे शामिल हुए. इस पार्टी में फिल्म से जुड़े कलाकारों ने जमकर मस्ती की और फिल्म की कामयाबी को सेलिब्रेट किया.
सौम्या टंडन ने शेयर की अनदेखी झलकियां
वहीं फिल्म में रहमान डकैत की पत्नी उल्फत का किरदार निभाने वाली सौम्या टंडन भी इस पार्टी का हिस्सा बनीं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पार्टी की कई अनदेखी तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जो तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में वह कई सिंगर्स और एक्टर्स के साथ नजर आ रही हैं. खास बात यह रही कि उन्होंने फिल्म के चर्चित थप्पड़ सीन को एक बार फिर से मजाकिया अंदाज में रीक्रिएट किया.
थप्पड़ सीन बना चर्चा का विषय
फिल्म के एक अहम सीन में, जब रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) का जनाजा उठता है, तब उल्फत गुस्से में हमजा अली मजारी (रणवीर सिंह) को जोरदार थप्पड़ मारती है. यही सीन पार्टी में दोबारा मजेदार अंदाज में किया गया, जिसने सभी का ध्यान खींचा. इससे पहले धुरंधर के पहले भाग में भी सौम्या टंडन का एक थप्पड़ सीन काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने अपने ऑनस्क्रीन पति रहमान डकैत को बेटे की मौत के बाद थप्पड़ मारा था.
सौम्या का खास संदेश
सौम्या टंडन ने अपनी पोस्ट के साथ एक भावुक कैप्शन भी लिखा. उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और टीम का धन्यवाद किया और इस बड़ी सफलता पर सभी को बधाई दी. उन्होंने खास तौर पर फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की सराहना की और उन्हें इस सफलता का श्रेय दिया. साथ ही उन्होंने सह-कलाकारों जैसे यामी गौतम, सारा अर्जुन और कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का भी आभार जताया.
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“थप्पड़ क्वीन” बना मजेदार टैग
सौम्या ने बताया कि रणवीर सिंह ने मजाक में उन्हें “थप्पड़ क्वीन” का टैग दे दिया, क्योंकि फिल्म में उनके थप्पड़ वाले सीन काफी चर्चित हो गए हैं. यह बात फैंस को काफी पसंद आ रही है और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है.
बॉक्स ऑफिस पर जारी है धुरंधर 2 का जलवा
फिल्म की जबरदस्त ओपनिंग और दर्शकों से मिल रहे शानदार रिस्पॉन्स को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि धुरंधर 2 आने वाले दिनों में और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकती है. कुल मिलाकर, यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है, बल्कि इसके कलाकारों की केमिस्ट्री और पर्दे के पीछे की मस्ती भी फैंस को खूब पसंद आ रही है.
यूएनएचआरसी में बलोच नेताओं ने उठाई आवाज, पाकिस्तान पर दमन और जबरन गुमशुदगी के लगाए आरोप
जिनेवा, 20 मार्च (आईएएनएस)। बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान में हो रहे व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार और उसके सुरक्षा तंत्र कानून का इस्तेमाल असहमति दबाने, आम नागरिकों को निशाना बनाने और पूरे क्षेत्र की आवाज दबाने के लिए कर रहे हैं।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को संबोधित करते हुए बीएनएम के प्रतिनिधियों ने कहा कि बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने, फर्जी मुठभेड़ों या बिना न्यायिक प्रक्रिया के हत्याओं और अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
उनके मुताबिक यह सब बलोच लोगों की आवाज दबाने की सुनियोजित कोशिश का हिस्सा है। बीएनएम की सदस्य माहरा बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान में आम लोगों को सिर्फ इसलिए सामूहिक सजा दी जा रही है, क्योंकि वे वहां रहते हैं और अपनी पहचान के साथ मौजूद हैं। बलूचिस्तान में एक पूरी आबादी को सिर्फ अपने अस्तित्व के कारण सजा दी जा रही है। उनके खिलाफ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के नाम पर पाकिस्तान ने कानून को हथियार बना दिया है।
असहमति जताने वालों को अपराधी बनाया जा रहा है, लोगों की जिंदगी मिटाई जा रही है और पूरी कौम की आवाज दबाई जा रही है।
माहरा बलोच ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक कानून का दुरुपयोग कर बलोच छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों को प्रतिबंधित या संदिग्ध व्यक्तियों की तरह चिह्नित किया जा रहा है। उनके अनुसार इससे उनकी स्वतंत्रता छिन जाती है। यात्रा का अधिकार प्रभावित होता है और वे लगातार खतरे में जीने को मजबूर हो जाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में ही बीएनएम के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बलूचिस्तान में 1,355 जबरन गुमशुदगी और 225 गैर-न्यायिक हत्याओं के मामले दर्ज किए। माहरा ने कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे वे लोग हैं जिन्हें घरों से उठाया गया, छात्र जिन्हें कैंपस से अगवा किया गया और वे शव जिन्हें दूसरों को डराने के लिए लौटाया गया।
उन्होंने बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) के नेतृत्व पर हो रही कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। माहरा ने कहा कि “महरंग बलोच, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया, उन्हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया, इलाज से वंचित रखा गया और केवल शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट बंद करना, बड़े पैमाने पर निगरानी रखना और सामूहिक दंड देना वहां आम बात बन गई है, ताकि दुनिया को बलूचिस्तान की वास्तविक स्थिति का पता न चल सके।
माहरा बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जाए ताकि वह तुरंत इन मानवाधिकार उल्लंघनों को रोके, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए बलोच कार्यकर्ताओं को रिहा करे और जबरन गायब किए जाने व गैर-न्यायिक हत्याओं की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराए।
इससे पहले बुधवार को इसी सत्र में ‘पांक’ के मीडिया कोऑर्डिनेटर जमाल बलोच ने भी कहा था कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) से जुड़े प्रोजेक्ट्स के बीच अत्याचार और तेज हो गए हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस परिषद के सामने बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे सुनियोजित मानवाधिकार उल्लंघनों की बात रखने आया हूं, जिन्हें चीन की रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी से मजबूती मिल रही है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी एक राज्य नीति की तरह काम कर रही है। पाकिस्तान की सेना कानून से ऊपर की तरह व्यवहार करती है और छात्र, शिक्षक, पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उठा ले जाती है।
जमाल बलोच ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को आतंकवाद की तरह पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले नागरिक अधिकार आंदोलनों को कुचला जा रहा है और बलूचिस्तान के कई जिलों में इंटरनेट बंद रखा जाता है, ताकि सैन्य अभियानों और पीड़ितों की आवाज दुनिया तक न पहुंच सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीपीईसी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ दमन बढ़ा है, क्योंकि इन परियोजनाओं की सुरक्षा और संसाधनों पर नियंत्रण के लिए आम नागरिकों के जीवन का सैन्यीकरण किया जा रहा है।
--आईएएनएस
वीसी
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