लीकी गट सिंड्रोम के क्या लक्षण हैं? जानिए कैसे पता चलेगा आंतों में हो गया है छेद
Leaky Gut Ke Lakshan: लीकी गट सिंड्रोम होने पर आंतों की दीवारों की कोशिकाएं ढीली पड़ने लगती हैं जिससे उनमें दरारें हो जाती हैं और टॉक्सिंस शरीर में फैलने लगते हैं. ऐसे में लीकी गट होने पर कैसे पता चलता है, जानिए यहां.
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कैसे पाकिस्तान भेजी जा रही थी जानकारी? गिरफ्तार 15 जासूसों ने किया खुलासा
Ghaziabad Pakistani Spy Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इन दिनों एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं. जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम कर रहा था. अब तक इस मामले में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि हाल ही में 9 और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है.
इससे पहले पकड़े गए 6 आरोपियों को पुलिस ने 24 मार्च तक रिमांड पर लिया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों को शक है कि यह एक “पैन इंडिया मॉड्यूल” था, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था.
क्या था पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को लगभग 50 संवेदनशील जगहों पर सोलर CCTV कैमरे लगाने का काम दिया गया था. इन कैमरों के जरिए वे महत्वपूर्ण लोकेशनों की जानकारी और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे. यह डेटा बाद में पाकिस्तान भेजा जा रहा था. गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कौशांबी इलाके में एक इनपुट मिलने के बाद यह पूरा नेटवर्क पकड़ा गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने दिल्ली और सोनीपत में भी कैमरे लगाए थे.
कैसे काम करता था नेटवर्क?
जांच में पता चला कि आरोपियों को पाकिस्तान से ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाती थी. उन्हें पैसे, निर्देश और तकनीकी जानकारी भी वहीं से मिलती थी.
कुछ मुख्य बातें जो सामने आईं, जैसे कि CCTV कैमरे लगाने और डेटा भेजने की ट्रेनिंग. इसके साथ ही वीडियो और फोटो को विदेश भेजने के तरीके भी सिखाए गए. इतना ही नहीं ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस नेटवर्क में जोड़ने का भी टारगेट दिया गया. प्रवीण और ऋतिक नाम के दो आरोपियों को इस काम में खास ट्रेनिंग दी गई थी.
धार्मिक स्थलों पर खास फोकस
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों के मोबाइल फोन से कई मंदिरों के फोटो और वीडियो मिले हैं. इनमें खाटू श्याम मंदिर की लोकेशन भी शामिल है, जिसे पाकिस्तान भेजा गया था. जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का मुख्य मकसद सैन्य ठिकानों की जानकारी जुटाना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना. इसके अलावा धार्मिक स्थलों की डिटेल इकट्ठा करना था.
परिवार का क्या कहना है?
गिरफ्तार आरोपियों के परिवार वालों ने उन्हें बेगुनाह बताया है. एक आरोपी के पिता का कहना है कि उनके बेटे पर जबरदस्ती सिम कार्ड लेने का दबाव बनाया गया था. उसने अपनी आईडी पर सिम लेकर किसी ऋतिक नाम के युवक को दे दी थी.
अन्य जगहों से भी कनेक्शन
इस मामले से जुड़ा एक और पहलू हापुड़ से सामने आया है, जहां दो संदिग्ध जासूस पकड़े गए थे. उनके मोबाइल से भी मंदिरों की तस्वीरें मिली थीं, जो पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर तक भेजी जा रही थीं. हालांकि पुलिस का कहना है कि गाजियाबाद और हापुड़ के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है.
कौन-कौन कर रहा जांच?
इस पूरे मामले की जांच कई बड़ी एजेंसियां मिलकर कर रही हैं, जैसे: NIA, IB, यूपी ATS और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कितने लोग शामिल हैं और इसका असली मकसद क्या था.
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