पनामा नहर और स्वेज नहर समेत इन समुद्री मार्गों से होता है दुनिया में व्यापार, ग्लोबल ट्रेड के लिए है जरूरी
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इन हमलों का विश्व बाजार पर भारी असर देखने को मिल रहा है। ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए उन जगहों को अपना निशाना बना रहा है, जो विश्व व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं। आइए जानते हैं कि किन-किन छोटे और बड़े रास्तों के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार होता है।
वैश्विक व्यापार के लिए भूमध्य सागर-लाल सागर में स्वेज नहर और अटलांटिक-प्रशांत में पनामा नहर मुख्य रास्ते माने जाते हैं। इसके अलावा, मलक्का स्ट्रेट (हिंद महासागर-प्रशांत), हॉर्मुज स्ट्रेट (फारस की खाड़ी-अरब सागर), बाब अल-मंडेब (लाल सागर-अदन की खाड़ी), सुएज-भूमध्यसागरीय (सुमेड) पाइपलाइन और केप ऑफ गुड होप वैश्विक व्यापार के लिए प्रमुख रणनीतिक मार्ग हैं। ये सभी रास्ते कई मायनों में अहम हैं, क्योंकि इन समुद्री रूटों से दुनिया का लगभग 80-90 फीसदी व्यापार होता है।
मिस्र में स्थित स्वेज नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग है, जो मध्य सागर और लाल सागर को जोड़ता है। इस रास्ते की वजह से केप ऑफ गुड होप के चारों ओर लगभग 6000 मील की दूरी से राहत मिलती है।
मध्य अमेरिका में स्थित पनामा नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है, जो अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच 8,000 मील से अधिक की दूरी की यात्रा से बचाता है।
इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित मलक्का स्ट्रेट हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ता है। इसे फारस की खाड़ी और एशिया के बाजार के बीच सबसे छोटा रास्ता माना जाता है।
हॉर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जुड़ा है। इसे तेल और गैस के परिवहन के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
बाब अल-मंडेब लाल सागर को अदन की खाड़ी के माध्यम से अरब सागर से जोड़ता है। यह यूरोप और एशिया के बीच अहम व्यापारिक मार्ग है, जिससे 12 फीसदी वैश्विक व्यापार हो रहा है।
केप ऑफ गुड होप अफ्रीका का सबसे दक्षिणी छोर है, जिसका उपयोग बड़े जहाजों द्वारा तब किया जाता है जब स्वेज नहर मार्ग बाधित होता है।
जिब्राल्टर स्ट्रेट अटलांटिक महासागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। यह यूरोप और अफ्रीका के बीच है, जो जहाजों को सीधे महासागर से समुद्र में प्रवेश दिलाता है।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान पर हमले का विरोध कर इस्तीफा देने वाले अमेरिकी अधिकारी केंट संदेह के घेरे में!
वाशिंगटन, 19 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की ईरान नीति को लेकर अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पूर्व खुफिया अधिकारी जो केंट ने सरकार की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि मौजूदा रास्ता काम नहीं करेगा। इसके बाद से ही केंट संदेह के घेरे में है। अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि एफबीआई उनसे जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर रही है।
मीडिया आउटलेट न्यूयॉर्क टाइम्स, सेमाफोर और सीबीएस ने इसे रिपोर्ट किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) गोपनीय सूचना के कथित लीक को लेकर जांच कर रही है।
सेमाफोर समाचार वेबसाइट ने सबसे पहले इस जांच की रिपोर्ट दी थी। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि क्या केंट ने कुछ अनाधिकृत लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील तथ्य साझा किए थे। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित लीक का दायरा क्या है और इसका क्या असर हो सकता है? आउटलेट ने जांच की सीधी जानकारी रखने वाले चार लोगों का जिक्र किया, जिनमें से एक ने कहा कि यह जांच महीनों से चल रही है।
एक इंटरव्यू में पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार टकर कार्लसन से बातचीत करते हुए केंट ने कहा था कि अमेरिका का लक्ष्य स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिका “रेजीम चेंज, यानी ईरान की सरकार को बदलने के मुद्दे से बच रहा है, जबकि इजरायल इस दिशा में खुलकर आगे बढ़ रहा है। केंट ने कहा कि इजरायल मौजूदा सरकार को पूरी तरह खत्म करना चाहता है, लेकिन उसके पास यह स्पष्ट योजना नहीं दिखती कि उसके बाद क्या होगा।
केंट ने यह भी कहा कि जब उन्हें यह महसूस हुआ कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, तब उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। उनके शब्दों में, “मैं इस रास्ते का हिस्सा अच्छे विवेक के साथ नहीं बन सकता।”
जो केंट का सैन्य और खुफिया करियर काफी लंबा रहा है। एक ग्रीन बेरेट के रूप में उन्होंने 11 बार युद्ध क्षेत्रों में तैनाती देखी और बाद में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) में भी काम किया। उनके निजी जीवन में भी बड़ी त्रासदी आई, जब उनकी पत्नी—जो अमेरिकी नौसेना में क्रिप्टोलॉजिस्ट थीं—2019 में सीरिया में एक आत्मघाती हमले में मारी गईं। उस समय उनके दो छोटे बेटे थे।
केंट नेशनल काउंटर टेररिज्म विभाग के डायरेक्टर थे, जहां उनका काम तुलसी गबार्ड की निगरानी में था। गबार्ड ने हाल ही में कहा कि यह निर्णय लेना कि ईरान अमेरिका के लिए खतरा है या नहीं, पूरी तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर करता है।
गबार्ड, जो पहले हवाई से कांग्रेस सदस्य रह चुकी हैं, पहले ईरान पर सैन्य कार्रवाई की चर्चाओं की आलोचना कर चुकी हैं। हालांकि, वर्तमान हमलों पर उनका रुख अभी स्पष्ट नहीं है।
वहीं, व्हाइट हाउस ने केंट के इस्तीफे पर कड़ा रुख अपनाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें “सुरक्षा के मामले में कमजोर” करार दिया और कहा कि ईरान “एक बड़ा खतरा” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जो लोग इस खतरे को नहीं मानते, उनकी निर्णय क्षमता पर सवाल उठता है।
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर ही रणनीतिक मतभेद गहरे होते जा रहे हैं—जहां एक ओर सख्त सैन्य रुख है, वहीं दूसरी ओर उसके परिणामों को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आ रही हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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