यूएन रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि: बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट, पीएम नरेंद्र मोदी ने जताई खुशी
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें भारत में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना की। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत में तेज गिरावट के लिए भारत की तारीफ की गई।
संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की हालिया रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, बच्चों की मौत की दर को कम करने में दुनियाभर में हुई तरक्की में भारत एक अहम योगदान देने वाला देश बनकर उभरा है।
रिपोर्ट में बच्चों के बचने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए, खासकर नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में देश की लगातार और बड़े पैमाने पर की गई कोशिशों पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नतीजों ने एक मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित तथा मानकों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को उजागर किया है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।
पिछले दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है। 1990 से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है और 2000 से 68 फीसदी की कमी आई। यह बड़ी कमी मुख्य रूप से भारत जैसे देशों के कारण आई है, जहां लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप, बेहतर संस्थागत डिलीवरी व्यवस्था और टीकाकरण कवरेज में वृद्धि देखने को मिली है।
इस क्षेत्र में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। 2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों से घटकर 2024 में लगभग 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के नतीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है।
भारत के खास दखल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी दिक्कतों जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी या उनका इलाज किया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, संस्थान-आधारित नवजात देखभाल और नवजात व बचपन की बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन जैसे हस्तक्षेपों के विस्तार से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में भारत के सुधार का खास असर हुआ है। पूरे दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों की मौत के मामले में लगभग 60 फीसदी की कमी आई है और 1-59 महीने के बच्चों की मौत की दर में 75 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है।
हालांकि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस इलाके ने दुनिया भर में सबसे तेजी से कमी की है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पीएम-किसान योजना के तहत किसानों को जारी राशि 4.27 लाख करोड़ रुपए के पार
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस महीने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 22वीं किस्त के रूप में 18,640 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए जाने से 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता मिली है, जिनमें से करीब 2.15 करोड़ महिला किसान हैं।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना की शुरुआत से अब तक किसानों को दी गई कुल राशि 4.27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है। इसी के साथ पीएम-किसान दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजनाओं में से एक बन गई है।
यह योजना आधार-आधारित सत्यापन और डिजिटाइज्ड भूमि रिकॉर्ड के जरिए लागू की जाती है, जिससे सही लाभार्थियों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से पैसा पहुंचाया जाता है।
सरकार इसे अन्नदाता सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) और नीति आयोग के आकलन के अनुसार, इस योजना से किसानों की कृषि आय बढ़ी है और उनकी अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता कम हुई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में पीएम-किसान योजना ने किसानों को अपनी खेती में निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद की है।
केरल के एडक्कारा की किसान भामिनी इस योजना की लाभार्थी हैं। उन्होंने बताया कि समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद उन्हें खेती को बेहतर बनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली के जरिए पैसा सीधे खाते में पहुंचने से उन्हें बिना देरी के सहायता मिलती है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दुर्गापुर के किसान अनिल हलदार के लिए सालाना 6,000 रुपए की सहायता खेती के लिए काफी उपयोगी साबित हुई है। अगस्त 2025 में किस्त मिलने के बाद उन्होंने तरबूज की खेती शुरू की और जरूरी सामान खरीदने में इस पैसे का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें फसल में विविधता लाने में मदद मिली।
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के किसान दीपक सिंह नेगी भी इस योजना की मदद से बीज, खाद और कीटनाशक जैसे जरूरी कृषि इनपुट खरीदते हैं। इससे उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है।
पीएम-किसान एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश भर के जमीन वाले किसान परिवारों को आय सहायता देना है।
इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जो 2,000 रुपए की तीन बराबर किस्तों में सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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