पीएम-किसान योजना के तहत किसानों को जारी राशि 4.27 लाख करोड़ रुपए के पार
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस महीने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 22वीं किस्त के रूप में 18,640 करोड़ रुपए से ज्यादा जारी किए जाने से 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता मिली है, जिनमें से करीब 2.15 करोड़ महिला किसान हैं।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना की शुरुआत से अब तक किसानों को दी गई कुल राशि 4.27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है। इसी के साथ पीएम-किसान दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजनाओं में से एक बन गई है।
यह योजना आधार-आधारित सत्यापन और डिजिटाइज्ड भूमि रिकॉर्ड के जरिए लागू की जाती है, जिससे सही लाभार्थियों तक सीधे और पारदर्शी तरीके से पैसा पहुंचाया जाता है।
सरकार इसे अन्नदाता सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) और नीति आयोग के आकलन के अनुसार, इस योजना से किसानों की कृषि आय बढ़ी है और उनकी अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता कम हुई है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में पीएम-किसान योजना ने किसानों को अपनी खेती में निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद की है।
केरल के एडक्कारा की किसान भामिनी इस योजना की लाभार्थी हैं। उन्होंने बताया कि समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद उन्हें खेती को बेहतर बनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली के जरिए पैसा सीधे खाते में पहुंचने से उन्हें बिना देरी के सहायता मिलती है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दुर्गापुर के किसान अनिल हलदार के लिए सालाना 6,000 रुपए की सहायता खेती के लिए काफी उपयोगी साबित हुई है। अगस्त 2025 में किस्त मिलने के बाद उन्होंने तरबूज की खेती शुरू की और जरूरी सामान खरीदने में इस पैसे का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें फसल में विविधता लाने में मदद मिली।
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के किसान दीपक सिंह नेगी भी इस योजना की मदद से बीज, खाद और कीटनाशक जैसे जरूरी कृषि इनपुट खरीदते हैं। इससे उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हुआ है।
पीएम-किसान एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश भर के जमीन वाले किसान परिवारों को आय सहायता देना है।
इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जो 2,000 रुपए की तीन बराबर किस्तों में सीधे उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ऑस्ट्रेलिया: ईंधन की बढ़ती कीमतों पर नजर, पीएम बोले- 'फ्यूल सप्लाई टास्कफोर्स का किया गठन'
कैनबरा, 19 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया ने संभावित ईंधन संकट को देखते हुए “ओवर-प्रिपेयर्ड” यानी अत्यधिक तैयार रहने की रणनीति अपनाई है, ताकि आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा से निपटा जा सके।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को राष्ट्रीय कैबिनेट की एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक बुलाई, जिसमें ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट पर चर्चा की गई। यह संकट मुख्य रूप से मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में आई अनिश्चितता से जुड़ा है। एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर अल्बनीज ने रणनीति बताई।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक विशेष “फ्यूल सप्लाई टास्कफोर्स” का गठन किया है। इसके समन्वय की जिम्मेदारी एंथिया हैरिस को दी गई है, जो पहले ऑस्ट्रेलियन एनर्जी रेगुलेटर की प्रमुख रह चुकी हैं। उन्हें देश में ईंधन सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बैठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऑस्ट्रेलिया के कई क्षेत्रीय इलाकों में ईंधन की भारी कमी देखी जा रही है, जिसे “अकल्पनीय” स्थिति बताया जा रहा है। ऐसे में राज्यों के नेताओं ने केंद्र सरकार से तेजी से कार्रवाई और दीर्घकालिक रणनीति की मांग की थी। टास्कफोर्स के गठन के बाद इस कदम का व्यापक स्वागत हुआ है।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने बैठक के बाद कहा कि देश में फिलहाल ईंधन आपूर्ति सुरक्षित है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित संकट से पहले पूरी तैयारी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों और हफ्तों में सरकार सप्लाई चेन को मजबूत करने और संकट से निपटने के लिए और कदमों की घोषणा करेगी।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया की प्रतिस्पर्धा निगरानी संस्था ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग (एसीसीसी) ने प्रमुख ईंधन कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में एम्पोल, बीपी, मोबिल और वीवा एनर्जी शामिल हैं।
इन कंपनियों पर आरोप है कि वे ईंधन की कमी के दौरान संभावित रूप से प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं, जिससे कीमतों में कृत्रिम वृद्धि हो सकती है। हालांकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सख्त रुख अपना रही है।
--आईएएनएस
केआर/
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