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फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कतर से की बात: गैस प्लांट हमले पर जताई चिंता, अराघची बोले ये 'दुखद'

तेहरान, 19 मार्च (आईएएनएस)। ईरान में सैन्य संघर्ष को 20 दिन हो गए हैं। 19वें दिन इजरायल ने पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस प्लांट पर हमला किया। कई देशों ने इसकी निंदा की। फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी इस पर फिक्र जाहिर की और ऐसा न करने की अपील भी की। उनके इस आग्रह में कुछ ऐसा था जो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मैक्रों के रवैये को दुखद करार दिया।

अराघची ने लिखा, मैक्रों ने ईरान पर इजरायल-यूएस के हमले की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इजरायल की तब भी निंदा नहीं की थी, जब उसने तेहरान में ईंधन के गोदाम को उड़ा दिया था, जिससे लाखों लोग जहरीले पदार्थों के संपर्क में आ गए थे। अभी भी जो उन्होंने चिंता जाहिर की है उसमें गैस ठिकाने का जिक्र तक नहीं है, जिसके बाद हमने (ईरान) जवाबी कार्रवाई की। ये वाकई दुखद है!

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इमैनुएल मैक्रों की उस पोस्ट का जवाब दिया जिसमें उन्होंने बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने की अपील की थी।

मैक्रों ने अपने पोस्ट में कहा था, ईरान और कतर में गैस उत्पादन सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद, मैंने कतर के अमीर और राष्ट्रपति ट्रंप से बात की।

उन्होंने बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने को गलत ठहराते हुए आगे कहा, बुनियादी ढांचे—विशेष रूप से ऊर्जा और जल आपूर्ति सुविधाओं—को निशाना बनाने वाले हमलों पर बिना किसी देरी के रोक लगाना हमारे साझा हित में है। आम लोगों और उनकी बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को भी सैन्य तनाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

दरअसल, 18 मार्च को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लफान पर हमला किया था, जिसे दुनिया के कई देश गलत मान रहे हैं। वहीं, 12 मुस्लिम देशों ने खुलकर इसकी आलोचना की। सऊदी की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद बयान जारी किया गया, जिसमें सऊदी अरब, कतर और यूएई समेत कई देश शामिल हुए।

इन देशों ने कहा कि रियाहशी इलाकों पर ईरान का हमला बिल्कुल गलत है और इसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता।

वहीं, सऊदी ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने दावा किया कि उनका देश ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत रखता है। ईरान हमारे सब्र का इम्तिहान न लें।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Gautam Gambhir: गौतम गंभीर क्यों और किसके खिलाफ पहुंचे हाई कोर्ट? 2.5 करोड़ का हर्जाना भी मांगा

Gautam Gambhir Court case: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर अब मैदान के बाहर एक नई लड़ाई लड़ रहे हैं। डिजिटल दुनिया में उनके नाम, चेहरे और आवाज के गलत इस्तेमाल के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला एआई से बने फर्जी वीडियो, डीपफेक और बिना अनुमति कमाई से जुड़ा है।

गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल सूट दायर किया है, जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है। यह केस 2026 में दर्ज हुआ है और इसमें 16 पक्षों को शामिल किया गया है। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियां भी शामिल हैं।

गंभीर की लीगल टीम के मुताबिक, 2025 के आखिर से उनके नाम पर फर्जी कंटेंट तेजी से बढ़ा। इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें AI तकनीक से उनका चेहरा और आवाज बनाकर गलत बयान दिखाए गए। एक फर्जी रेजिग्नेशन वीडियो को 29 लाख से ज्यादा बार देखा गया, जबकि एक और वीडियो में उन्हें सीनियर खिलाड़ियों पर टिप्पणी करते दिखाया गया, जिसे 17 लाख व्यूज मिले।

मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर बिना अनुमति पोस्टर और मर्चेंडाइज बेचे जा रहे थे। गंभीर ने इसे सीधे तौर पर “अनऑथराइज्ड कमर्शियल एक्सप्लॉइटेशन” बताया है।

इस केस में Meta Platforms, X Corp और Google (यूट्यूब) जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी शामिल किया गया है, ताकि कोर्ट के आदेशों को लागू कराया जा सके।

कानूनी रूप से यह मामला कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क्स एक्ट 1999 और कमर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है। गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है, साथ ही सभी फर्जी कंटेंट हटाने और भविष्य में रोक लगाने की अपील की है।

गंभीर ने साफ कहा कि मेरी पहचान, मेरा नाम, चेहरा और आवाज, का गलत इस्तेमाल किया गया। यह सिर्फ निजी मामला नहीं है, बल्कि कानून और गरिमा का सवाल है, खासकर AI के इस दौर में। उन्होंने कोर्ट से यह भी मांग की है कि बिना लिखित अनुमति कोई भी उनके नाम, आवाज या छवि का इस्तेमाल न कर सके, चाहे वह AI, डीपफेक या फेस-स्वैप तकनीक से ही क्यों न हो। साथ ही, तुरंत सभी फर्जी कंटेंट हटाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग भी की गई है।

यह मामला साफ दिखाता है कि AI के दौर में सेलिब्रिटीज की पहचान कितनी असुरक्षित हो गई है और अब इस पर कानूनी लड़ाई तेज होने वाली है।

Thu, 19 Mar 2026 18:03:23 +0530

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