बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच अमेरिकी सांसद ने धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा की मांग की
वॉशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। एक प्रभावशाली अमेरिकी सांसद ने धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए फंड बढ़ाने की मांग की है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हाल के हमलों ने पूरे देश में धार्मिक समुदायों के बीच डर बढ़ा दिया है।
डेमोक्रेटिक अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने मंगलवार को न्यू जर्सी में होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारियों और धार्मिक नेताओं की बैठक बुलाई। इस बैठक का मकसद उस बढ़ते खतरे के माहौल पर चर्चा करना था, जिसका सामना उनके अनुसार पूजा स्थलों को करना पड़ रहा है।
इस बैठक में न्यू जर्सी ऑफिस ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी एंड प्रिपेयर्डनेस (एनजेओएचएसपी) के अधिकारी शामिल हुए, जिनमें निदेशक थॉमस हॉक और तैयारी निदेशक चार्ल्स एम्बियो भी थे। साथ ही यहूदी, ईसाई, हिंदू और अन्य धार्मिक समुदायों के नेता भी मौजूद रहे।
प्रतिभागियों ने मौजूदा खतरे की स्थिति की समीक्षा की और कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा धार्मिक संस्थानों के बीच समन्वय पर चर्चा की। खास तौर पर तैयारी और प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया।
गॉटहाइमर ने कहा, “इस समय, जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है और ईरान से जुड़ा संघर्ष जारी है, तो यह पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम खतरों के प्रति सतर्क रहें, खासकर अपने धार्मिक समुदायों के लिए।”
चर्चा के दौरान इस बात पर भी गौर किया गया कि मध्य पूर्व का संघर्ष घरेलू सुरक्षा चिंताओं को कैसे प्रभावित कर रहा है और स्थानीय संस्थानों पर सुरक्षा उपाय मजबूत करने का दबाव कैसे बढ़ा रहा है।
गॉटहाइमर ने हालिया घटनाओं को चेतावनी के रूप में बताया।
उन्होंने कहा, “हाल के हफ्तों में मिशिगन में एक सिनेगॉग पर हमला हुआ और यहीं टीनेक में एक 19 वर्षीय युवक को सिनेगॉग के बाहर पेलेट गन से गोली मारी गई। यह एक बेहद चिंताजनक याद दिलाता है कि यहूदी-विरोध और नफरत अभी भी मौजूद हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि खतरा सभी धार्मिक समूहों तक फैला हुआ है।
गॉटहाइमर ने कहा, “न्यू जर्सी या अमेरिका में कहीं भी किसी को भी सिनेगॉग, चर्च, मस्जिद या मंदिर में प्रवेश करते समय असुरक्षित महसूस नहीं होना चाहिए।”
बैठक का एक मुख्य मुद्दा संघीय गैर-लाभकारी सुरक्षा अनुदान कार्यक्रम (एनएसजीपी) था, जो निगरानी प्रणाली, प्रवेश नियंत्रण और प्रशिक्षित कर्मियों जैसे सुरक्षा उन्नयन के लिए धन प्रदान करता है।
गॉटहाइमर ने इस कार्यक्रम के विस्तार के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की और कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 तक एनएसजीपीके फंड को एक अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केच और वाशुक में हुए हमले की बीएलएफ ने ली जिम्मेदारी, तीन पाकिस्तानी जवानों की मौत
क्वेटा, 18 मार्च (आईएएनएस)। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने केच जिले में किए गए हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिनमें तीन पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय मीडिया ने बताया कि इसके अलावा, इस हथियारबंद गुट ने वाशुक जिले में भी पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड को निशाना बनाया, जिसमें तीन ऑपरेटिव मारे गए।
एक बयान में बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने कहा कि पक्की खुफिया जानकारी के आधार पर उनके लड़ाकों ने मंगलवार को वाशुक के गरारी इलाके में राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड के सदस्यों पर हमला किया।
प्रवक्ता के अनुसार, ये डेथ स्क्वॉड चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) राजमार्ग पर अस्थायी चेकपोस्ट बनाकर ड्राइवरों को परेशान कर रहे थे और उनसे जबरन वसूली कर रहे थे। इसी दौरान बीएलएफ के लड़ाकों ने उन्हें घेरकर गोलीबारी शुरू कर दी।
ग्वाहरम ने कहा, “इस ऑपरेशन के परिणामस्वरूप तीन डेथ स्क्वॉड ऑपरेटिव मारे गए, जबकि एक को पकड़ लिया गया है और वह फिलहाल संगठन की हिरासत में है।”
उन्होंने दावा किया कि मारे गए लोगों में से एक की पहचान कहूर उर्फ मनन के रूप में हुई है, जो आवारान जिले के मशकाय का निवासी था, जबकि बाकी दो की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
उन्होंने बताया कि पकड़े गए व्यक्ति की पहचान चाकर, पुत्र शेर मोहम्मद, निवासी नाग (वाशुक) के रूप में हुई है और उससे पूछताछ की जा रही है।
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह समूह स्थानीय व्यक्ति अली हैदर मोहम्मद हसनी के संरक्षण में काम कर रहा था और राज्य के इशारे पर “एंटी-बलोच गतिविधियों” में शामिल था।
एक अलग ऑपरेशन में, ग्वाहरम ने कहा कि बीएलएफ के लड़ाकों ने 16 मार्च को केच के तुम्प इलाके के मलांत में पाकिस्तानी सेना के एक कैंप पर समन्वित हमला किया।
उन्होंने बताया कि लड़ाकों ने कैंप को कई दिशाओं से घेरकर “बी-10 रॉकेट, स्नाइपर, आरपीजी, और ग्रेनेड लॉन्चर” का इस्तेमाल करते हुए नजदीक से हमला किया, जिसमें तीन सैनिक मारे गए और चार गंभीर रूप से घायल हो गए।
बीएलएफ प्रवक्ता ने यह भी कहा कि लड़ाकों ने कैंप में लगे निगरानी कैमरों को नष्ट कर दिया और उन्हें नुकसान पहुंचाया, जबकि बाद में हेलीकॉप्टरों के जरिए घायलों को निकाला गया।
दोनों हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए बीएलएफ ने चेतावनी दी कि बलोच आंदोलन के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को “अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।”
ये ताज़ा घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं, जब हाल के दिनों में बलूच उग्रवादी समूहों की ओर से पूरे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और पुलिस बलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले बढ़ गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और बुनियादी ढांचे को भी क्षति पहुंची है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















