Indian Institute of Technology (IIT Delhi) Summer Research Fellowship 2026 Apply Online Form Post Update Date: 18-03-2026 Short Description : Indian Institute of Technology (IIT Delhi) Summer Research Fellowship 2026. Those candidates who are interested in this IIT Delhi Summer Research Fellowship 2026 can Apply Online from 16/03/2026 to 03/04/2026. Read the notification for admissions eligibility, ...
MPESB MP ITI Training Officer Answer Key 2026 Post Update Date:18-03-2026 Short Description: MP Employees Selection Board MP ESB ITI Training Officer Answer Key 2026: MP Employees Selection Board MPESB Department of Technical Education, Skill Development & Employment (ITI Training officer) Recruitment Test – 2026 Official Notification is released and Online Form Now Started on 17 January ...
Gautam Gambhir Court case: टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर अब मैदान के बाहर एक नई लड़ाई लड़ रहे हैं। डिजिटल दुनिया में उनके नाम, चेहरे और आवाज के गलत इस्तेमाल के खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला एआई से बने फर्जी वीडियो, डीपफेक और बिना अनुमति कमाई से जुड़ा है।
गौतम गंभीर ने दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल सूट दायर किया है, जिसमें उन्होंने अपनी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग की है। यह केस 2026 में दर्ज हुआ है और इसमें 16 पक्षों को शामिल किया गया है। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियां भी शामिल हैं।
गंभीर की लीगल टीम के मुताबिक, 2025 के आखिर से उनके नाम पर फर्जी कंटेंट तेजी से बढ़ा। इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें AI तकनीक से उनका चेहरा और आवाज बनाकर गलत बयान दिखाए गए। एक फर्जी रेजिग्नेशन वीडियो को 29 लाख से ज्यादा बार देखा गया, जबकि एक और वीडियो में उन्हें सीनियर खिलाड़ियों पर टिप्पणी करते दिखाया गया, जिसे 17 लाख व्यूज मिले।
मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर बिना अनुमति पोस्टर और मर्चेंडाइज बेचे जा रहे थे। गंभीर ने इसे सीधे तौर पर “अनऑथराइज्ड कमर्शियल एक्सप्लॉइटेशन” बताया है।
इस केस में Meta Platforms, X Corp और Google (यूट्यूब) जैसे प्लेटफॉर्म्स को भी पक्ष बनाया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी शामिल किया गया है, ताकि कोर्ट के आदेशों को लागू कराया जा सके।
कानूनी रूप से यह मामला कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क्स एक्ट 1999 और कमर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है। गंभीर ने 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग भी की है, साथ ही सभी फर्जी कंटेंट हटाने और भविष्य में रोक लगाने की अपील की है।
गंभीर ने साफ कहा कि मेरी पहचान, मेरा नाम, चेहरा और आवाज, का गलत इस्तेमाल किया गया। यह सिर्फ निजी मामला नहीं है, बल्कि कानून और गरिमा का सवाल है, खासकर AI के इस दौर में। उन्होंने कोर्ट से यह भी मांग की है कि बिना लिखित अनुमति कोई भी उनके नाम, आवाज या छवि का इस्तेमाल न कर सके, चाहे वह AI, डीपफेक या फेस-स्वैप तकनीक से ही क्यों न हो। साथ ही, तुरंत सभी फर्जी कंटेंट हटाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग भी की गई है।
यह मामला साफ दिखाता है कि AI के दौर में सेलिब्रिटीज की पहचान कितनी असुरक्षित हो गई है और अब इस पर कानूनी लड़ाई तेज होने वाली है।