राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, जानिए इस दिन का महत्व और मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत
आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस है। यह दिन भारत के लाखों बुनकरों, कारीगरों और पारंपरिक हथकरघा उद्योग से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है। हथकरघा सिर्फ वस्त्र बनाने की कला नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत पहचान भी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की महेश्वरी, चंदेरी और अन्य पारंपरिक हथकरघा कलाओं ने देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ये प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट शिल्प कौशल और आत्मनिर्भर भारत की भावना का सशक्त प्रतीक हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का इतिहास
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में भारत सरकार ने की थी। इस तारीख का चयन 7 अगस्त 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में किया गया था। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों, विशेषकर भारतीय हथकरघा वस्त्रों को अपनाने का व्यापक अभियान चलाया गया था। यही आंदोलन आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण आधार बना।
इस दिन को मनाने का उद्देश्य
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्देश्य देश के बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मान देना, पारंपरिक बुनाई कला का संरक्षण करना, हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना और लोगों को हस्तनिर्मित एवं स्वदेशी वस्त्रों के उपयोग के प्रति जागरूक करना है। साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका को मजबूत करना और युवाओं को इस पारंपरिक कला से जोड़ना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
हथकरघा उद्योग का महत्व
भारत का हथकरघा उद्योग दुनिया के सबसे बड़े पारंपरिक वस्त्र उद्योगों में से एक है। कृषि के बाद यह ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है। यह उद्योग कम ऊर्जा की खपत के साथ पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन करता है और स्थानीय कारीगरों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। भारतीय हथकरघा वस्त्र अपनी गुणवत्ता, कलात्मक डिजाइन और पारंपरिक बुनाई के कारण वैश्विक बाजार में भी अलग पहचान रखते हैं।
मध्यप्रदेश की हथकरघा विरासत
मध्यप्रदेश हथकरघा परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। महेश्वरी साड़ियां जिनकी शुरुआत देवी अहिल्याबाई होल्कर के संरक्षण में हुई थी, अपनी हल्की बुनावट और आकर्षक बॉर्डर के लिए जानी जाती हैं। वहीं चंदेरी साड़ियां अपनी महीन बुनाई, रेशम-सूती मिश्रण और पारदर्शी बनावट के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों में हजारों बुनकर पारंपरिक हथकरघा उद्योग से जुड़े हुए हैं जो न सिर्फ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखे हुए हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
Gold Silver Rate: सोने-चांदी की कीमतों में फिर बदलाव, ये है 7 अगस्त का इंदौर-भोपाल समेत बड़े शहरों का ताजा भाव
आगामी त्योहारों से पहले अगस्त महीने में लगातार सोने चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार फिर सोने-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। 7 अगस्त 2026 को सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव 1,49,618 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,28,400 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1.48 लाख और 1 किलो चांदी की कीमत 2.26 लाख रुपए पर चल रहा है। गुडरिटर्न्स के अनुसार, आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,040 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,40,000 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया है।
आइए जानते हैं इंदौर-भोपाल का आज का सोने-चांदी का भाव
- इंदौर और भोपाल में 24 कैरेट का 10 ग्राम का भाव 1,49,940 रुपये बनी हुई है।
- आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट का भाव 1,37, 450 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा है। 18 कैरेट का दाम 1,12,470 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
- भोपाल व इंदौर में 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 2,40,000 प्रति किग्रा के आसपास बना हुआ है।
प्रमुख शहरों का ताजा भाव
- मेरठ, जयपुर, दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,50,040 , 22 कैरेट का भाव 1,37,550 और 18 कैरेट का भाव 1,12,570 प्रति 10 ग्राम है।
- मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, दिल्ली और लखनऊ चांदी का भाव 2,40,000 प्रति किग्रा के आसपास बना हुआ है।
- चेन्नई, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल में 1 किलो चांदी की कीमत भी 2,40,000 रुपये बनी हुए है।
वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिका-ईरान तनाव के साथ डॉलर और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच सोने और चांदी में भी हलचल तेज हो गई है। वहीं कच्चे तेल भी तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड $83 प्रति बैरल और WTI क्रूड $78 प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजर में स्पॉट गोल्ड $4,348.40 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा है। चांदी भी चढ़कर $62.470 प्रति औंस के पार पहुंच गई है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना और अंतरराष्ट्रीय बाजार (कॉमेक्स) में सर्राफा की मजबूत मांग से भी वैश्विक स्तर पर कीमतों को समर्थन मिल रहा है। भारतीय रुपया भी दबाव में है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती है तो ग्लोबल महंगाई का खतरा फिर बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर कमोडिटी और शेयर बाजार दोनों की चाल पर पड़ सकता है।
जरूरी बातें
- शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित अवकाश के दिनों में नए भाव जारी नहीं किए जाते हैं, इस दौरान बाजार बंद रहता है।
- सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क और HUID कोड जरूर जांचें। हॉलमार्क के निशान में BIS लोगो, कैरेट/शुद्धता, HUID नंबर और सेंटर मार्क होता है।
- 24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 22 कैरेट पर 916 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।
- 24 कैरेट गोल्ड 99.9% शुद्ध होता है और 22 कैरेट में 91.6% शुद्धता ( 8.4% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक) होती है।
नोट- ऊपर दी गई सोने-चांदी की कीमतों में जीएसटी, टीसीएस और मेकिंग चार्ज जैसे अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं, इसलिए शोरूम या स्थानीय बाजार से आभूषण खरीदते समय कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। सटीक दरों के लिए अपने स्थानीय जौहरी या ज्वैलर्स शॉप से संपर्क करें।
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