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शांगहाई में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 42वें बैच को प्रमाणपत्र, विदेशी निवेश में निरंतर वृद्धि

बीजिंग, 18 मार्च (आईएएनएस)। चीन के शांगहाई शहर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों और अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के 42वें बैच को प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए एक औपचारिक समारोह आयोजित किया गया।

इस अवसर पर शांगहाई में 30 नए बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों तथा 15 नए अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को प्रमाणित किया गया, जो शहर की वैश्विक व्यावसायिक आकर्षण क्षमता को दर्शाता है।

इस बार प्रमाणित किए गए क्षेत्रीय मुख्यालयों और अनुसंधान एवं विकास केंद्रों का अधिकांश हिस्सा शांगहाई के प्रमुख उद्योग क्षेत्रों से संबंधित है, जिनमें बायोमेडिसिन, एकीकृत परिपथ, उच्च-स्तरीय उपकरण निर्माण, ऑटोमोबाइल तथा फैशन उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हैं। इनमें कई अग्रणी उद्यम भी शामिल हैं, जिनमें आठ फॉर्च्यून वैश्विक 500 कंपनियों द्वारा स्थापित क्षेत्रीय मुख्यालय या अनुसंधान एवं विकास केंद्र प्रमुख हैं। इन संस्थानों का स्तर भी काफी उच्च है, जिनमें चार एशिया-प्रशांत मुख्यालय, चार ग्रेटर चीन मुख्यालय, तीन व्यावसायिक इकाई मुख्यालय तथा एक वैश्विक अनुसंधान एवं विकास केंद्र शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में शांगहाई में 6,300 से अधिक नए विदेशी निवेश वाले उद्यम स्थापित किए गए, जो वर्ष 2024 की तुलना में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। इसी अवधि में शांगहाई में विदेशी पूंजी का वास्तविक उपयोग 16 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा।

इसके अतिरिक्त, शांगहाई में 60 बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों और 45 विदेशी निवेशित अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को भी प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। फरवरी 2026 तक, चीन में प्रमाणित बहुराष्ट्रीय कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों और विदेशी निवेशित अनुसंधान एवं विकास केंद्रों की कुल संख्या क्रमशः 1084 और 647 तक पहुंच चुकी है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'ईरान का बचा हुआ हिस्सा भी कर दूं खत्म', युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी कही ये बात

मिडिजल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार बयानबाजियां कर रहे हैं. कभी वह युद्ध खत्म करने की बात करते हैं तो कभी वो यह कहते हैं कि अब ईरान में खत्म करने के लिए कुछ नहीं बचा है. इसी कड़ी में अब उनका एक और बड़ा बयान सामने आया है. उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा रहा है. उन्होंने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो कठोर सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं.

ट्रंप का सख्त बयान और उसके संकेत

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को 'दुनिया का नंबर-1 राज्य प्रायोजित आतंकी' बताया और कहा कि अमेरिका उसे 'कारोबार से बाहर' कर रहा है. उन्होंने यह भी इशारा किया कि ईरान के बचे हुए ढांचे को समाप्त करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.

यह बयान सिर्फ राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संभावित रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो अमेरिका की भविष्य की नीति को दर्शा सकता है.

ईरान की नेतृत्व संरचना पर बड़ा झटका

हाल ही में इजरायली हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं. इनमें अली लारीजानी और इस्माइल खातिब जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं.

इन घटनाओं ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है और नेतृत्व स्तर पर एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है. इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है.

क्या बड़े सैन्य अभियान की तैयारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान किसी बड़े सैन्य अभियान की ओर इशारा हो सकता है. इसमें ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करने या उसके नेतृत्व ढांचे को निशाना बनाने जैसी रणनीतियां शामिल हो सकती हैं. हालांकि, इस तरह के कदम से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है, क्योंकि ईरान के सहयोगी देश और संगठन भी सक्रिय हो सकते हैं.

वैश्विक राजनीति पर संभावित असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है. तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है.

खासकर 'स्ट्रेट' ( स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ) जैसे रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण को लेकर टकराव दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्थिति किस दिशा में जाएगी. लेकिन इतना तय है कि हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी बड़े कदम से व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है. दुनिया की नजरें अब अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदम पर टिकी हैं. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर एक बड़े युद्ध का रूप ले लेगा.

यह भी पढ़ें - अली लारीजानी की मौत के बाद भी कम नहीं हुआ ईरान का हौसला, विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका को दी ये चेतावनी

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