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'ईरान का बचा हुआ हिस्सा भी कर दूं खत्म', युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी कही ये बात

मिडिजल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार बयानबाजियां कर रहे हैं. कभी वह युद्ध खत्म करने की बात करते हैं तो कभी वो यह कहते हैं कि अब ईरान में खत्म करने के लिए कुछ नहीं बचा है. इसी कड़ी में अब उनका एक और बड़ा बयान सामने आया है. उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा रहा है. उन्होंने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो कठोर सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं.

ट्रंप का सख्त बयान और उसके संकेत

ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को 'दुनिया का नंबर-1 राज्य प्रायोजित आतंकी' बताया और कहा कि अमेरिका उसे 'कारोबार से बाहर' कर रहा है. उन्होंने यह भी इशारा किया कि ईरान के बचे हुए ढांचे को समाप्त करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.

यह बयान सिर्फ राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संभावित रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो अमेरिका की भविष्य की नीति को दर्शा सकता है.

ईरान की नेतृत्व संरचना पर बड़ा झटका

हाल ही में इजरायली हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं. इनमें अली लारीजानी और इस्माइल खातिब जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं.

इन घटनाओं ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है और नेतृत्व स्तर पर एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है. इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है.

क्या बड़े सैन्य अभियान की तैयारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान किसी बड़े सैन्य अभियान की ओर इशारा हो सकता है. इसमें ईरान की सैन्य क्षमता को खत्म करने या उसके नेतृत्व ढांचे को निशाना बनाने जैसी रणनीतियां शामिल हो सकती हैं. हालांकि, इस तरह के कदम से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है, क्योंकि ईरान के सहयोगी देश और संगठन भी सक्रिय हो सकते हैं.

वैश्विक राजनीति पर संभावित असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है. तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है.

खासकर 'स्ट्रेट' ( स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ) जैसे रणनीतिक मार्गों पर नियंत्रण को लेकर टकराव दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्थिति किस दिशा में जाएगी. लेकिन इतना तय है कि हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी बड़े कदम से व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है. दुनिया की नजरें अब अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदम पर टिकी हैं. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह तनाव कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ेगा या फिर एक बड़े युद्ध का रूप ले लेगा.

यह भी पढ़ें - अली लारीजानी की मौत के बाद भी कम नहीं हुआ ईरान का हौसला, विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिका को दी ये चेतावनी

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कर्नाटक में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ी मांग, मंत्री ने होटल-रेस्तरां से मांगा सहयोग

बेंगलुरु, 18 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने बुधवार को विधान परिषद में जानकारी दी कि राज्य में कमर्शियल एलपीसी सिलेंडरों की कमी हो गई है। उन्होंने होटल मालिकों, रेस्टोरेंट संचालकों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपील की कि नई आपूर्ति आने तक एक सप्ताह सहयोग करें।

मंत्री ने बताया कि फिलहाल सप्लाई में बाधाओं के कारण होटल, ढाबों, उद्योगों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सीमित संख्या में ही गैस सिलेंडर दिए जा पा रहे हैं। राज्य में रोजाना करीब 40,000 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में केवल लगभग 1,000 सिलेंडर ही होटलों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्थिति जल्द सुधर सकती है क्योंकि एलपीजी लेकर आने वाले जहाज रास्ते में हैं। मुनियप्पा ने कहा, “करीब 16 जहाज ईरान में कतार में हैं। उनके पहुंचते ही समस्या का समाधान हो जाएगा। केंद्र सरकार इस मुद्दे पर ईरान से बातचीत कर रही है।”

मंत्री ने इस स्थिति को “युद्ध जैसी” बताते हुए होटल मालिकों से अपील की कि वे अस्थायी तौर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प अपनाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार 10,000 से 15,000 सिलेंडरों की व्यवस्था करने का प्रयास कर रही है और वितरण को लेकर एसोसिएशनों से चर्चा जारी है।

मुनियप्पा ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। राज्य में रोजाना 3.5 लाख से अधिक घरेलू सिलेंडरों की खपत हो रही है और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन समेत अन्य तेल कंपनियां उनकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य को रोजाना लगभग 44,000 कमर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार अभी केवल 20 प्रतिशत यानी करीब 8,500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके बावजूद राज्य ने करीब 9,000 सिलेंडरों की व्यवस्था की है।

सरकार ने आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए करीब 4,200 सिलेंडर शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और अस्पतालों को दिए हैं। वहीं करीब 1,200 सिलेंडर सरकारी उपक्रमों, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, नंदिनी आउटलेट और इंदिरा कैंटीन जैसे स्थानों को आवंटित किए गए हैं।

इसके अलावा, लगभग 500 सिलेंडर बीज प्रसंस्करण, फूड प्रोसेसिंग, कृषि एवं संबंधित उद्योगों, जियोलॉजिकल पार्क और स्पोर्ट्स हॉस्टलों को दिए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और केंद्र व तेल कंपनियों के साथ मिलकर जल्द ही कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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