एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और संघर्ष बढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ भारत ने एक बार फिर दुनिया को इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश दिया। जी हां, भारत से भेजी गई मेडिकल सहायता की पहली खेप अब ईरान पहुंच चुकी है और ईरान ने खुले दिल से भारत को धन्यवाद कहा है। ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इस मदद को स्वीकार करते हुए भारत के लोगों के प्रति आभार जताया। दरअसल भारत में ईरान के दूतावास के आधिकारिक हैंडल ईरान एंबेसी इन इंडिया ने एक्स पर एक ट्वीट करके जानकारी दी कि भारत के लोगों की ओर से भेजी गई मेडिकल सहायता की पहली किम सफलतापूर्वक ईरान पहुंच चुकी है और इसे ईरानियन रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंप दिया गया है।
इस ट्वीट में खास बात यह थी कि इसमें भारत के लोगों का विशेष रूप से धन्यवाद किया गया। यानी यह सिर्फ सरकार की मदद नहीं बल्कि भारत की जनता की ओर से एक मानवीय सहयोग है। ईरान ने अपने इस संदेश में साफ कहा कि हम भारत के दयालु लोगों का धन्यवाद करते हैं और यह शब्द सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि एक गहरी कूटनीतिक भावना को दिखाता है। दरअसल जब कोई देश मुश्किल समय में होता है और उसे दूसरे मुल्क से मदद मिलती है तो वह संबंध सिर्फ राजनीतिक नहीं रहता बल्कि मानवीय रिश्तों में बदल जाता है। अब अगला सवाल ये है कि ईरान को भारत की मदद की जरूरत क्यों पड़ी? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव। किसी भी आपदा संकट या संघर्ष के दौरान मेडिकल संसाधनों की भारी कमी हो जाती है और इस वक्त ईरान अमेरिका और इजराइल के वॉर से जूझ रहा है।
जहां अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर टूट पड़े हैं। दूसरा है आर्थिक प्रतिबंधों का असर। ईरान पर लंबे समय से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है और तीसरा है आपातकालीन जरूरतें। अचानक बढ़ती बीमारियों या आपदाओं के कारण दवाइयों और उपकरणों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में जब ईरान जंग से जूझ रहा है तब भारत की यह मदद बेहद अहम बन जाती है। भारत लंबे समय से मानवीय कूटनीति को बढ़ावा देता है। भारत ने पहले भी कई देशों को वैक्सीनें भेजी हैं। प्रागतिक आपदाओं में राहत सामग्री पहुंचाई है और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सहायता दी है और अब ईरान जब जंग में उलझा है तब भारत ने सबसे बड़ी मदद भेज दी है और अब ईरान को मेडिकल सहायता भेजकर भारत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारत सिर्फ अपनों के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए सोचता है।
ऐसे में यह मदद इन रिश्तों को और गहरा कर सकती है और एक्सपर्टों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा। भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खुल जाएंगे। अब अगला सवाल यह उठता है क्या यह भारत की सबसे बड़ी मदद है?
हालांकि आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं। लेकिन जिस तरह से इसे पहली खेप कहा जा रहा है उससे साफ है कि आगे और भी सहायता भेजी जाएगी।
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ईरान की जंग में अब एक नई एंट्री हो चुकी है और यह एंट्री किसी छोटे देश की नहीं बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ताकत की है। चीन अब खुलकर मैदान में उतरता हुआ नजर आ रहा है और इसी के साथ ही बता दें कि अमेरिका और इजराइल की टेंशन इस वक्त कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन सवाल अब सिर्फ जंग का नहीं है बल्कि सुपर पावर टकराव का हो चुका है। ईरान की मदद के लिए चीन से दो बड़े जहाज ईरान की तरफ रवाना हो गए हैं। इस खबर से अमेरिका में इस वक्त बता दें कि खतरनाक हड़कंप भी मचा हुआ है। चीन ने इन जहाजों के अंदर ऐसा क्या भेजा कि अब सबकी नजरें इन जहाजों पर टिक गई है। इसको लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं काफी ज्यादा तेज है। दरअसल बता दें कि चीन और ईरान के बीच बेहद मजबूत आर्थिक रिश्ता है।
ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल चीन खरीदता है। यानी चीन की एनर्जी सिक्योरिटी काफी हद तक ईरान पर टिकी हुई है। अगर ईरान कमजोर होता है तो इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अब सबसे बड़ी खबर यह कि चीन से दो बड़े मालवाहक जहाज ईरान की तरफ रवाना हुए हैं। इन जहाजों के नाम बताए जा रहे हैं शाब्डीस और बर्जी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जहाज चीन के जुहाई के पास एक केमिकल पोर्ट से निकले हैं और दावा यह सामने आया है कि इनमें मिलिट्री ग्रेड केमिकल लदा हो सकता है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा सामने आया है और यह बताया गया है कि इन जहाजों में ऐसे केमिकल हो सकते हैं जो बैलस्टिक मिसाइल और रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी दावा किया है यह बताया है कि इनमें हथियारों की खेप भी हो सकती है। दावा यह भी सामने आया है कि इसमें चीन ने ईरान को बड़ी मानवीय सहायता के रूप में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भेजे हैं। यह सहायता नागरिक आबादी को राहत पहुंचाने के लिए है। इसके साथ ही चीन ईरान में बता दें कि रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करते हुए यहां पर कई हजार गुना डॉलर की सहायता भी प्रदान कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ है कि यह सहायता का उद्देश्य जो है वो यह है कि 13 टन से अधिक दवाइयां के पैकेट्स और मेडिकल सामग्री जो है वो चीन ने ईरान में संघर्ष के दौरान मानवीय संकट को कम करने के प्रयास के तौर पर की है और इन्हीं सभी वजहों के कारण यह अटकलें तेज है कि इन दवाओं के नाम पर चीन ने कुछ और ही ईरान को भेजा है जो इस युद्ध में ईरान की बड़ी मदद कर सकता है। हालांकि इसकी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब इन जहाजों पर नजर रखे हुए हैं अमेरिका और यूरोपियन यूनियन। क्योंकि अगर यह जहाज ईरान पहुंचते हैं तो ईरान को बड़ी सैन्य ताकत मिल सकती है और अगर अमेरिका इन्हें रोकने की कोशिश करता है तो सीधा टकराव चीन से हो सकता है। इस बीच ईरान लगातार इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमले भी कर रहा है। बता दें कि रोशोन लीजियन पर तेल लवीब जैसे शहरों को निशाना बनाया गया है। दावा यह है कि क्लस्टर बम तक इस्तेमाल किए गए हैं। हालांकि इन दावों की अभी कोई भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अगर चीन खुलकर ईरान के साथ आ गया और अमेरिका इजराइल के साथ पहले ही खड़ा है तो यह जंग मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगी।
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