ईरान की जंग में अब एक नई एंट्री हो चुकी है और यह एंट्री किसी छोटे देश की नहीं बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ताकत की है। चीन अब खुलकर मैदान में उतरता हुआ नजर आ रहा है और इसी के साथ ही बता दें कि अमेरिका और इजराइल की टेंशन इस वक्त कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन सवाल अब सिर्फ जंग का नहीं है बल्कि सुपर पावर टकराव का हो चुका है। ईरान की मदद के लिए चीन से दो बड़े जहाज ईरान की तरफ रवाना हो गए हैं। इस खबर से अमेरिका में इस वक्त बता दें कि खतरनाक हड़कंप भी मचा हुआ है। चीन ने इन जहाजों के अंदर ऐसा क्या भेजा कि अब सबकी नजरें इन जहाजों पर टिक गई है। इसको लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं काफी ज्यादा तेज है। दरअसल बता दें कि चीन और ईरान के बीच बेहद मजबूत आर्थिक रिश्ता है।
ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल चीन खरीदता है। यानी चीन की एनर्जी सिक्योरिटी काफी हद तक ईरान पर टिकी हुई है। अगर ईरान कमजोर होता है तो इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अब सबसे बड़ी खबर यह कि चीन से दो बड़े मालवाहक जहाज ईरान की तरफ रवाना हुए हैं। इन जहाजों के नाम बताए जा रहे हैं शाब्डीस और बर्जी। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जहाज चीन के जुहाई के पास एक केमिकल पोर्ट से निकले हैं और दावा यह सामने आया है कि इनमें मिलिट्री ग्रेड केमिकल लदा हो सकता है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा सामने आया है और यह बताया गया है कि इन जहाजों में ऐसे केमिकल हो सकते हैं जो बैलस्टिक मिसाइल और रॉकेट बनाने में इस्तेमाल होते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी दावा किया है यह बताया है कि इनमें हथियारों की खेप भी हो सकती है। दावा यह भी सामने आया है कि इसमें चीन ने ईरान को बड़ी मानवीय सहायता के रूप में दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भेजे हैं। यह सहायता नागरिक आबादी को राहत पहुंचाने के लिए है। इसके साथ ही चीन ईरान में बता दें कि रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करते हुए यहां पर कई हजार गुना डॉलर की सहायता भी प्रदान कर रहा है। रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ है कि यह सहायता का उद्देश्य जो है वो यह है कि 13 टन से अधिक दवाइयां के पैकेट्स और मेडिकल सामग्री जो है वो चीन ने ईरान में संघर्ष के दौरान मानवीय संकट को कम करने के प्रयास के तौर पर की है और इन्हीं सभी वजहों के कारण यह अटकलें तेज है कि इन दवाओं के नाम पर चीन ने कुछ और ही ईरान को भेजा है जो इस युद्ध में ईरान की बड़ी मदद कर सकता है। हालांकि इसकी कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब इन जहाजों पर नजर रखे हुए हैं अमेरिका और यूरोपियन यूनियन। क्योंकि अगर यह जहाज ईरान पहुंचते हैं तो ईरान को बड़ी सैन्य ताकत मिल सकती है और अगर अमेरिका इन्हें रोकने की कोशिश करता है तो सीधा टकराव चीन से हो सकता है। इस बीच ईरान लगातार इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन से हमले भी कर रहा है। बता दें कि रोशोन लीजियन पर तेल लवीब जैसे शहरों को निशाना बनाया गया है। दावा यह है कि क्लस्टर बम तक इस्तेमाल किए गए हैं। हालांकि इन दावों की अभी कोई भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अगर चीन खुलकर ईरान के साथ आ गया और अमेरिका इजराइल के साथ पहले ही खड़ा है तो यह जंग मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगी।
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2024 में छात्रों के हिंसक विद्रोह के बीच सत्ता से बेदखल होने से कुछ महीने पहले, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक कथित साजिश की चेतावनी दी थी, जिसमें एक श्वेत व्यक्ति बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों से एक ईसाई राज्य बनाने की योजना बना रहा था। उस समय इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। दो साल बाद, पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के आरोप में एनआईए द्वारा एक अमेरिकी भाड़े के सैनिक और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने विशेषज्ञों को यह सुझाव देने के लिए प्रेरित किया है कि ये घटनाएं आपस में जुड़ी हो सकती हैं। पिछले सप्ताह एक गुप्त अभियान में, एनआईए ने तीन हवाई अड्डों से विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया, जिनमें अमेरिकी भाड़े का सैनिक मैथ्यू वैनडाइक भी शामिल था, जो दुनिया भर के संघर्ष क्षेत्रों में एक जाना-माना नाम है। एनआईए ने बताया कि पर्यटक वीजा पर भारत आए इन विदेशी नागरिकों ने अशांत म्यांमार में प्रवेश करने से पहले मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश किया था। विदेशियों को मिजोरम में प्रवेश करने के लिए संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) की आवश्यकता होती है।
अमेरिकी भाड़े के सैनिक की गिरफ्तारी पर एनआईए ने क्या कहा?
एनआईए ने बताया कि म्यांमार में इन भाड़े के सैनिकों ने जातीय सशस्त्र समूहों (ईएजी) को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया था। ये ईएजी भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही संगठनों का समर्थन करते हैं। इसके अलावा, एनआईए को पता चला है कि आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप मंगवाई और उन्हें मिजोरम के ईएजी और अन्य समूहों को सौंप दिया। आरोपियों को 11 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम ने म्यांमार में सैन्य शासन विरोधी ताकतों को अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों द्वारा समर्थन दिए जाने की अफवाहों को फिर से हवा दे दी है। 2021 में सैन्य शासन द्वारा तख्तापलट के बाद म्यांमार गृहयुद्ध में डूब गया। भू-राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी परोक्ष युद्ध भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से तक पहुंच गया है।
मैथ्यू वैनडाइक कौन है?
एनआईए के जाल में फंसा बड़ा नाम अमेरिकी नागरिक वैनडाइक है, जो पहले लीबिया और सीरिया में सशस्त्र संघर्षों का हिस्सा रह चुका है - ये दोनों ऐसे देश हैं जहां के नेताओं को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। 2011 में लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी शासन द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद वह युद्धबंदी भी रह चुका है। अमेरिका के गुप्तचर तंत्र का हिस्सा माने जाने वाले वैनडाइक की भारत में गिरफ्तारी ने हलचल मचा दी है। गौरतलब है कि वैनडाइक संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) के संस्थापक हैं, जो एक गैर-लाभकारी सुरक्षा संगठन है और सत्तावादी शासनों से लड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। 2019 में वैनडाइक के SOLI ने भारत में "ईसाई उत्पीड़न" का मुद्दा उठाया था। इसकी रिपोर्ट फॉक्स न्यूज ने प्रकाशित की थी। इन घटनाओं ने विशेषज्ञों को यह अनुमान लगाने के लिए प्रेरित किया है कि वैनडाइक उस समूह का हिस्सा हो सकते हैं जिसके बारे में हसीना ने 2024 में चेतावनी दी थी।
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