Gujarat Govt: टूरिज्म को डेवलप करने के लिए लगातार काम कर रहे भूपेंद्र पटेल, सड़कों को चौड़ा और मजबूत करेगी सरकार
Gujarat Govt: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत इकोनॉमिक रीजन के तहत फेज-1 में 1,185 करोड़ की सड़क परियोजना को मंजूरी दी है. योजना के तहत सूरत, नवसारी, वलसाड, डांग और तापी जिले में सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जाएगा.
इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है. प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाली सड़कों को राज्य सरकार चौड़ा और मजबूत कर रही है. यात्रियों का सफर इससे आसान और तेज हो पाएगा.
इन सड़कों का किया जाएगा चौड़ीकरण
इस परियोजना के तहत कई सड़कों को चार और छह लेन में चेंज किया जाएगा. वहीं, ट्रैफिक जाम करने के लिए बायपास रोड भी बनाए जाएंगे. सूरत के सुवाली बीच तक जाने वाली सड़क को खास तौर पर फोर-लेन बनाया जाएगा, जिस वजह से वहां आने वाले पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, डांडी मार्च से जुड़े अहमदाबाद-डांडी हेरिटेज रूट को चौड़ा किया जाएगा. ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को इस वजह से नई स्पीड मिलेगी.
इसके अलावा, डांग जिले में वाघई से आहवा तक की सड़क को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा. इसकी मदद से शबरी धाम, सापुतारा हिल स्टेशन के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी. इसके अलावा, वलसाड और दमन को जोड़ने वाले तटीय रोड को बेहतर बनाया जाएगा.
रोजगार के नए अवसर इससे पैदा होंगे
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के लिए इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. दक्षिण गुजरात का इससे समग्र विकास होगा. ये पहल विकसित गुजरात 2047 के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
किफायती यात्रा पर जोर: भारतीय रेलवे में बढ़े नॉन-एसी कोच, सरकार दे रही 45 प्रतिशत तक सब्सिडी
नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम रखने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, कुल कोचों में करीब 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़े जाने की योजना है।
रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय इलाकों के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि माल ढुलाई (फ्रेट) में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है।
उन्होंने कहा कि रेलवे का विद्युतीकरण तेजी से बढ़ा है और अब लगभग 47,000 किलोमीटर ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है, यानी नेटवर्क का 99 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बिजली से चल रहा है।
ट्रैक निर्माण में भी तेजी आई है। पहले जहां करीब 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 35,000 किलोमीटर हो गया है।
सुरक्षा के लिहाज से भी रेलवे ने बड़ा काम किया है। रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या करीब 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है।
रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत ट्रैक और ट्रेन (रोलिंग स्टॉक) की मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि एलएचबी कोच (ज्यादा सुरक्षित कोच) की संख्या तेजी से बढ़ी है और हाल के वर्षों में करीब 48,000 कोच जोड़े गए हैं। इसके अलावा, लोकोमोटिव (इंजन) की संख्या करीब 12,000 तक पहुंच गई है और वैगन (माल ढुलाई डिब्बे) की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है।
सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम बनाया है।
रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में भी तेजी से काम हुआ है। अब तक करीब 2,800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है, जहां रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियां चल रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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