कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक चुटीली टिप्पणी ने संसद में चल रही गंभीर बहस को हंसी के माहौल में बदल दिया। पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा पर उनके व्यंग्यात्मक कटाक्ष ने प्रधानमंत्री को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। संसद की कार्यवाही के दौरान, खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में दिए गए देवेगौड़ा के बयान पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसा। शब्दों का चतुराई से प्रयोग करते हुए खरगे ने कहा कि देवेगौड़ा विपक्ष के साथ साझेदारी तो चाहते हैं, लेकिन भाजपा के साथ विवाह करना चाहते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "प्रेम हमारे साथ, शादी मोदी जी के साथ," जिससे सदन में हंसी गूंज उठी।
खड़गे ने कहा कि मैं देवेगौड़ा जी को 54 वर्षों से अधिक समय से जानता हूँ और मैंने उनके साथ बहुत काम किया है। बाद में, मुझे नहीं पता क्या हुआ...' 'वो मोहब्बत हमारे साथ कीजिए, शादी मोदी साहब के साथ'। खरगे की यह उपमा विपक्ष द्वारा हाल के दिनों में देवेगौड़ा और उनकी पार्टी से मिल रहे मिले-जुले संकेतों की ओर इशारा करती है। विपक्षी दलों से संबंध बनाए रखते हुए, देवेगौड़ा ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की प्रशंसा में भी बयान दिए हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न हुई हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने उच्च सदन से सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों को विदाई देने में भाग लिया और इस बात पर जोर दिया कि लोक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता औपचारिक पदों से परे भी जारी रहती है। खुद जून में राज्यसभा से सेवानिवृत्त होने वाले खरगे ने विदाई समारोह में भाग लिया, जिसकी शुरुआत सांसदों द्वारा अप्रैल से जुलाई के बीच अपना कार्यकाल पूरा करने वाले सेवानिवृत्त सांसदों को शुभकामनाएं देने से हुई। चर्चा के दौरान बोलते हुए, खरगे ने संसदीय जिम्मेदारियों की चिरस्थायी प्रकृति और सदन की निरंतरता पर प्रकाश डाला।
खरगे ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की सदन में वापसी पर भी संतोष व्यक्त किया। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के बारे में बात करते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अपनी कविताओं के माध्यम से वे हमेशा प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हैं। हमेशा। मुझे नहीं लगता कि वे आपके (प्रधानमंत्री मोदी) अलावा कोई और कविता जानते हैं। जिससे एक बार फिर सदस्यों में हंसी गूंज उठी।
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मध्य पूर्व में युद्ध की आग अब केवल क्षेत्रीय नहीं रही, बल्कि यह पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ चेतावनी दे दी है कि इस संघर्ष के वैश्विक प्रभाव अब शुरू हो चुके हैं और यह किसी की दौलत, धर्म या नस्ल नहीं देखेगा। यह बयान आने वाले भयंकर संकट की खुली घोषणा है।
हम आपको बता दें कि ईरान ने बुधवार सुबह इजराइल पर क्लस्टर मिसाइलों से हमला कर इस संघर्ष को और भी खतरनाक बना दिया। खोर्रमशहर चार और कदर मिसाइलों से तेल अवीव को निशाना बनाया गया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इसे अपने शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की हत्या का बदला बताया है। इस हमले में न केवल व्यापक तबाही हुई बल्कि इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था भी चुनौती के घेरे में आ गई। बताया जा रहा है कि इजराइल में ईरान ने 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी सेना प्रमुख आमिर हातमी ने साफ कहा है कि यह तो केवल शुरुआत है और लारिजानी के खून का बदला ऐसा लिया जाएगा जिसे दुश्मन कभी नहीं भूल पाएगा। दूसरी ओर ईरान के शीर्ष कमांडर अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को खुली धमकी देते हुए कहा है कि उन्हें ऐसे सरप्राइज का इंतजार करना चाहिए जो उनकी कल्पना से भी ज्यादा विनाशकारी होगा।
इधर अमेरिका ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान के होरमुज जलडमरूमध्य के पास स्थित भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर पांच हजार पाउंड के भारी बम गिराए। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन ठिकानों से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को खतरा था। लेकिन इस हमले ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है।
हम आपको बता दें कि जमीन पर हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इजराइल के मध्य हिस्सों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। तेल अवीव के आसपास दहशत का माहौल है।
केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र इस युद्ध की चपेट में आ चुका है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास के आसपास रॉकेट और ड्रोन हमले फिर शुरू हो गए हैं। संयुक्त अरब अमीरात में ऑस्ट्रेलिया के सैन्य मुख्यालय के पास ईरानी मिसाइल गिरने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
लेबनान की राजधानी बेरूत भी अब सुरक्षित नहीं रही। इजराइली हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत और चौबीस लोग घायल हो चुके हैं। आवासीय इलाकों पर हो रहे हमले इस युद्ध को और अमानवीय बना रहे हैं।
सऊदी अरब ने भी एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने का दावा किया है जो प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बना रही थी। यह एयर बेस अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। उधर, इजराइल ने लेबनान में जबरन खाली कराने के आदेशों का दायरा और बढ़ा दिया है। अब लोगों को जाह्रानी नदी के उत्तर में जाने के लिए कहा गया है। नार्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के अनुसार यह आदेश अब लेबनान के लगभग चौदह प्रतिशत क्षेत्र को कवर कर चुका है। यह बड़े पैमाने पर विस्थापन का संकेत है।
अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। खुफिया अधिकारी कांग्रेस के सामने पेश होने वाले हैं जहां उनसे ईरान युद्ध और घरेलू सुरक्षा खतरों पर तीखे सवाल पूछे जाएंगे। एक अमेरिकी हमले में कथित रूप से एक प्राथमिक विद्यालय पर हमला हुआ जिसमें एक सौ पैंसठ से अधिक लोगों की मौत की खबर ने ट्रंप सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
दूसरी ओर, इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उर्वरक की कीमतों में भारी उछाल आया है जिससे अमेरिकी किसान परेशान हैं। होरमुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उल्लेखनीय है कि दुनिया के लगभग बीस प्रतिशत तेल का रास्ता यही है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब यह कहना गलत नहीं होगा कि यह संघर्ष केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक ऐसा तूफान बन चुका है जो पूरी दुनिया को हिला सकता है। आने वाले दिन और भी खतरनाक संकेत दे रहे हैं, और अगर हालात नहीं संभले तो यह युद्ध वैश्विक संकट में बदल सकता है।
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