अमेरिका : डब्ल्यूटीओ बैठक से पहले डिजिटल उत्पादों पर स्थायी टैरिफ प्रतिबंध की मांग
वाशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले अमेरिकी लॉमेकर्स ने मांग की है कि डिजिटल सामान (जैसे ऐप्स, सॉफ्टवेयर और फिल्में) पर लगने वाले टैक्स को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए। लेकिन भारत इस फैसले का विरोध कर रहा है, जो अमेरिका के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन गया है।
कांग्रेस की एक मीटिंग में अधिकारियों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क पर टैक्स न लगाने की छूट को आगे बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यह नियम 1998 से लागू है। इसके तहत, दुनिया का कोई भी देश डिजिटल सामान (जैसे डेटा, सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन सेवाओं) पर टैक्स नहीं वसूल सकता।
हाउस वेज एंड मीन्स कमेटी के अध्यक्ष एड्रियन स्मिथ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसे परिणाम चाहता है जिनसे सभी तरह के अमेरिकी व्यवसायों को लाभ हो। इस नियम का इस्तेमाल बातचीत में दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार फाउंडेशन में वैश्विक नवाचार नीति के उपाध्यक्ष स्टीफन एजेल ने कहा, एमसी 14 में अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क पर डब्ल्यूटीओ की रोक को जारी रखना सुनिश्चित करना है, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिबंध हटने से वैश्विक डिजिटल व्यापार की लागत में काफी वृद्धि होगी और अमेरिकी डिजिटल निर्यातकों को नुकसान होगा। निर्यात में लगभग तुरंत ही 1 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
इस निर्णय प्रक्रिया में भारत को बार-बार एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में नामित किया गया।
अकिन्स की लॉबिंग और सार्वजनिक नीति शाखा की केली एन शॉ ने आरोप लगाया कि “भारत पिछले लगभग 30 सालों से ई-कॉमर्स (ऑनलाइन व्यापार) से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले को रोक कर बैठा है।”उन्होंने बताया कि विश्व व्यापार संगठन के नियम ऐसे हैं कि कोई भी एक देश किसी भी बड़े फैसले में अड़ंगा लगा सकता है या उसे रोक सकता है।
अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी भारत के लिए जोखिमों की चेतावनी दी। एजेल ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था “भारतीय जीडीपी का 11 प्रतिशत” है। अगर भारत को कभी अपनी बात मनवाने में सफलता मिल जाती है और हम डब्ल्यूटीओ के ई-कॉमर्स प्रतिबंध को हटा देते हैं, तो इससे उनकी डिजिटल अर्थव्यवस्था पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। डिजिटल प्रवाह पर टैरिफ से सेमीकंडक्टर और डेटा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
वहीं, मीटिंग में कृषि पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। पीटर बाचमैन ने कहा कि सब्सिडी के कारण वैश्विक बाजार विकृत हो गए हैं। अमेरिकी चावल किसान भारतीय चावल किसान से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहा है। वे भारतीय सरकार से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भारत ने पिछली बैठकों में सार्वजनिक शेयरधारिता पर स्थायी छूट के लिए जोर दिया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि “यह मानने का कोई कारण नहीं है कि एमसी 14 इससे अलग होगा।”
लॉमेकर्स ने एक साझेदार के रूप में भारत के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, एआई और स्वच्छ ऊर्जा में सहयोग की ओर इशारा किया।
एजेल ने कहा कि मजबूत संबंधों के लिए डिजिटल व्यापार पर सहमति आवश्यक होगी। यदि वे उन्नत प्रौद्योगिकी उद्योगों में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनना चाहते हैं, तो वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यापार नीति निर्माण के लिए अधिक परिपक्व दृष्टिकोण अपनाने का समय आ गया है।”
मीटिंग से वाशिंगटन में विश्व व्यापार संगठन को लेकर मतभेद उजागर हुए। कुछ लॉमेकर्स ने इसे नियम-आधारित प्रणाली बताकर इसका बचाव किया। अन्य ने कहा कि यह परिणाम देने में संघर्ष कर रही है।
शॉ ने कहा, “सर्वसम्मति से संचालित संगठन, उस समाधान का हिस्सा बनने की संभावना नहीं है।”
ब्रूस हिर्श ने कहा कि डब्लूटीओ अभी भी एक भूमिका निभाता है। इसके नियम और समितियां व्यापार संबंधी मुद्दों के प्रबंधन में मदद करती हैं।
--आईएएनएस
ओपी/एएस
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मनाया आयरलैंड के साथ संबंधों का जश्न
वाशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिका और आयरलैंड के गहरे संबंधों का जश्न मनाया। उन्होंने आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन की मेजबानी की, जिनके साथ उन्होंने सालाना शैमरॉक समिट में हिस्सा लिया। इस मौके पर दोनों नेताओं ने अमेरिका-आयरलैंड के साझा इतिहास, विरासत और साझेदारी को आगे बढ़ाया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आपके साथ होना सचमुच बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने इस समारोह को आयरलैंड और अमेरिका के बीच दोस्ती का एक बेमिसाल उदाहरण बताया।
सेंट पैट्रिक दिवस के इस कार्यक्रम में अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी, सांसद और आयरलैंड के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच मौजूद मजबूत सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
ट्रंप ने आयरिश-अमेरिकी समुदाय की जिक्र करते हुए कहा, अक्सर यह कहा जाता है कि हमारे इस खूबसूरत देश में आयरिश लोगों की संख्या आपके शानदार द्वीप पर मौजूद आयरिश लोगों की संख्या से 5 गुना अधिक है। उन्होंने आगे कहा, वे आपसे बहुत प्यार करते हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने आयरिश-अमेरिकियों को देश की सफलता की एक बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि एक समूह के तौर पर आयरलैंड से आए लोगों से ज्यादा कामयाबी किसी और को नहीं मिली है।
अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयरिश प्रवासियों के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने देश की पहचान और संस्थाओं को गढ़ने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा, शुरू से ही, अमेरिका ने इन बेमिसाल लोगों की मदद से ही तरक्की की है, खुशहाल बना है और कामयाबी हासिल की है।
ट्रंप ने कहा कि आयरिश-अमेरिकियों ने इनोवेशन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक, हर क्षेत्र में अपना योगदान दिया है। उन्होंने उन्हें लड़ाकू, विचारक, कर्मशील और विजेता बताया।
वहीं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने अपने भाषण में कहा कि दोनों देशों के बीच के रिश्ते बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह समारोह हमारे लोगों के बीच की उस दोस्ती का प्रतीक है, जो हमारे गणराज्यों के बनने से भी पुरानी है।
उन्होंने अमेरिका के शुरुआती सालों में आयरलैंड की भूमिका की ओर इशारा किया। मार्टिन ने कहा कि वाशिंगटन की कॉन्टिनेंटल सेना में एक-चौथाई से भी ज्यादा सैनिक आयरिश थे। उन्होंने आगे कहा कि आयरिश लोग उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने इस नए गणराज्य को गढ़ने में मदद की थी।
मार्टिन ने यह भी बताया कि आयरिश लोगों ने अमेरिका की अहम संस्थाओं में किस तरह योगदान दिया। उन्होंने बताया कि आयरलैंड में जन्मे लोगों ने देश के राष्ट्रीय प्रतीकों को डिजाइन करने और खुद अमेरिका की भाषा को गढ़ने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, यहां तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका शब्द का इस्तेमाल भी सबसे पहले एक आयरिश व्यक्ति ने ही लिखित रूप में किया था। उन्होंने अमेरिका में आयरिश प्रभाव के विस्तार का उल्लेख किया और बताया कि लाखों अमेरिकी अपनी जड़ों को आयरलैंड से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा, जब इन चीजों को रचा गया था, तब भी आयरिश लोग वहां मौजूद थे। आयरिश मूल के 3.5 करोड़ अमेरिकियों के लिए वे आज भी गर्व और प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बने हुए हैं।
मार्टिन ने दोनों देशों के बीच लगातार सहयोग बनाए रखने के महत्व की भी बात की। उन्होंने कहा, आयरलैंड और अमेरिका मिलकर काम करते रहें, ताकि एक बेहतर दुनिया का निर्माण किया जा सके। एक ऐसी दुनिया, जो स्वतंत्र, सुरक्षित और शांतिपूर्ण हो।
शेमरॉक समारोह एक पुरानी परंपरा है, जो अमेरिका और आयरलैंड के करीबी कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह हर साल सेंट पैट्रिक दिवस के आसपास आयोजित किया जाता है, जिसमें आयरिश नेता अमेरिकी राष्ट्रपति को शेमरॉक का कटोरा भेंट करते हैं।
अमेरिका और आयरलैंड के बीच मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जिन्हें वहां की बड़ी आयरिश-अमेरिकी आबादी के साथ-साथ व्यापार, निवेश और वैश्विक मामलों में दशकों से चले आ रहे आपसी सहयोग से और भी अधिक मजबूती मिली है।
--आईएएनएस
डीसीएच/
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