NASA यात्रियों Anil Menon और Jessica Meir ने ISS में spacewalk पूरी कर पावर किट लगाई
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मेयर ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर अपनी चहलकदमी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के पावर चैनल में तकनीकी उन्नयन किट स्थापित करने का काम किया, जिससे भविष्य में अतिरिक्त सौर पैनल लगाए जा सकेंगे। अंतरिक्ष स्टेशन के उन्नयन की कड़ी में यह 281वीं चहलकदमी थी।
यह अंतरिक्ष में जेसिका मेयर की छठी और अनिल मेनन की पहली चहलकदमी थी। चहलकदमी बृहस्पतिवार को भारतीय समयानुसार शाम छह बजकर तीन मिनट पर शुरू हुई और बृहस्पतिवार रात साढ़े 12 बजे समाप्त हुई। मेनन और मेयर ‘क्वेस्ट एयरलॉक’ से बाहर निकले और उन्होंने लगभग छह घंटे 27 मिनट तक अंतरिक्ष स्टेशन की बाहरी संरचना में तकनीकी उन्नयन का कार्य किया।
‘क्वेस्ट एयरलॉक’ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का एक विशेष वायुरुद्ध प्रवेश-निकास कक्ष (एयरलॉक मॉड्यूल) है, जिसके माध्यम से अंतरिक्ष यात्री चहलकदमी के लिए स्टेशन से बाहर निकलते हैं और वापस अंदर आते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य स्टेशन के 3बी पावर चैनल पर ‘माउंटिंग हार्डवेयर’ स्थापित करना था। नासा ने एक बयान में कहा, ‘‘यह कार्य भविष्य में आईआरओएसए (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे) नामक नए ‘रोल-आउट’ सौर पैनलों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इससे अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो उसकी महत्वपूर्ण प्रणालियों के संचालन और स्टेशन को भविष्य में सुरक्षित एवं नियंत्रित तरीके से कक्षा से बाहर करने में सहायक होगी।’’ वर्ष 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह आईआरओएसए सौर पैनल इकाइयां स्थापित कर चुके हैं। अब केवल दो इकाइयां और लगाई जानी बाकी हैं, जिन्हें इस वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाया जाएगा। चहलकदमी के दौरान कुछ देर के विश्राम में जेसिका मेयर ने कहा, ‘‘अनिल, तुम चंद्रमा को देख सकते हो…, हालांकि मुझे नहीं पता कि तुम किस दिशा में हो।’’ इस पर मेनन ने जवाब दिया, ‘‘मेरी दाहिनी ओर है।
हां, मैं उसे देख सकता हूं। जानकारी देने के लिए धन्यवाद। वहां मुझे भविष्य में चंद्रमा का एक आधार (मून बेस) दिखाई दे रहा है।’’ यह इस महीने अंतरिक्ष स्टेशन के ‘एक्सपीडिशन-75’ दल के लिए निर्धारित तीन चहलकदमी में पहली चहलकदमी थी।
इसके बाद 13 अगस्त को होने वाली दूसरी चहलकदमी के दौरान दो अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के ‘स्पेस-टू-ग्राउंड’ एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना नासा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संचार प्रणाली है, जिसके माध्यम से ह्यूस्टन स्थित मिशन नियंत्रण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड संचार किया जाता है। फिर 25 अगस्त को होने वाली तीसरी चहलकदमी में दल के सदस्य पावर चैनल की केबलों और डेटा रिले प्रणालियों को जोड़ेंगे।
यह कार्य नियमित रखरखाव का हिस्सा है और अंतरिक्ष स्टेशन को भविष्य में कक्षा से सुरक्षित रूप से बाहर लाने की तैयारियों से भी जुड़ा है। नासा के अनुसार, इस अंतरिक्ष चहलकदमी के दौरान अंतरिक्ष यात्री ‘हार्मनी मॉड्यूल’ के अग्र पोर्ट पर स्थित अंतरिक्ष यानों की ‘डॉकिंग’ में उपयोग होने वाले एक ‘नेविगेशन’ सहायक उपकरण को भी बदलेंगे।
Donald Trump ने US में Birth Tourism रोकने के लिए दो नए आदेशों पर हस्ताक्षर किए
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) के मामलों पर सख्ती करने और जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र लोगों की संख्या सीमित करने के लिए दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ सप्ताह पहले उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में ट्रंप के पहले जारी आदेश को खारिज कर दिया था। बृहस्पतिवार को हस्ताक्षरित आदेशों में से एक उन लोगों को निशाना बनाता है जो व्यावसायिक रूप से ‘बर्थ टूरिज्म’ को चुनते हैं और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं।
इस आदेश का उद्देश्य ऐसे लोगों की अमेरिका में प्रवेश की सुविधा सीमित करना है। दूसरा आदेश उन लोगों की परिका विस्तार करता है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसमें विदेशी सरकारों की ओर से ‘लॉबिंग’ (पैरवी) करने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी शामिल किया गया है।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 30 जून को ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता समाप्त करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के ‘ओवल ऑफिस’ में इन आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उच्चतम न्यायालय के 30 जून के फैसले की आलोचना की और कहा कि नया कदम ‘‘कुछ आवश्यक बदलाव करने’’ के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।’’ इस दौरान ट्रंप के साथ ‘व्हाइट हाउस’ के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अधिकारी स्टीफन मिलर, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ मौजूद थे। नौ जुलाई 1868 को अनुमोदित अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन ने अमेरिका में जन्मे या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान की थी जिनमें पहले दास रह चुके लोग भी शामिल थे। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह प्रावधान गृहयुद्ध के तुरंत बाद बनाया गया था।
इसका उद्देश्य दासों के बच्चों को नागरिकता देना था लेकिन अब क्या हो रहा है? लोग इसके आधार पर पूरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं।’’ ट्रंप की आप्रवासन विरोधी नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले स्टीफन मिलर ने कहा कि लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करना होता है ताकि वह बच्चा स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाए। मिलर ने कहा, ‘‘इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण ऐसे लोगों को सरकारी कल्याण योजनाओं, भविष्य में मतदान के अधिकार और वे सभी अधिकार एवं विशेषाधिकार मिल जाते हैं जो केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए होने चाहिए।’’ इन आदेशों में कई ऐसी श्रेणियां सूचीबद्ध की गई हैं जिनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से संबंधित दस्तावेज जारी नहीं किए जाने चाहिए।
इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता-पिता ने ऐसा व्यावसायिक लेन-देन किया हो, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला को अमेरिका या उसके किसी क्षेत्र में प्रसव कराने के लिए लाना हो। इसके अलावा, आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे, विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चे और अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे जिन्हें संघीय कानून के तहत नागरिकता नहीं मिलती, उन्हें भी इस सूची में शामिल किया गया है। आप्रवासन विशेषज्ञों ने ट्रंप के इन नए कार्यकारी आदेशों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें असंवैधानिक बताया है।
न्यूयॉर्क स्थित आव्रजन मामलों के वकील साइरस मेहता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘ट्रंप का जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित नया कार्यकारी आदेश स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता ने अमेरिका में बच्चे के जन्म को सुनिश्चित करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन किया है, तो उसके आधार पर नागरिकता से इनकार करना 14वें संशोधन का उल्लंघन है।’’ ‘माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, सबसे व्यापक जनगणना आधारित अनुमान के मुताबिक हर वर्ष अमेरिका में 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म ‘बर्थ टूरिज्म’ के कारण होता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से केवल 9,600 बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ।
‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर पहले ही फैसला दे चुका है कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है। ऐसा कोई भी कार्यकारी आदेश, जो इस अधिकार पर हमला करने की कोशिश करेगा, उसका भी वही हश्र होगा जो राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले आदेश का हुआ था।
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