खबर हटके-सिलेंडर की कमी से ससुराल छोड़ मायके गई महिला:राष्ट्रपति के चश्मे को बचाएगा लंगूर कटआउट; भालू बनकर खेती कर रहे किसान
उत्तर प्रदेश में एक महिला गैस सिलेंडर की कमी से ससुराल छोड़ मायके चली गई। वहीं UP के ही संभल में किसान भालू बनकर खेती कर रहे हैं। उधर मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के चश्मे को बचाने के लिए लंगूर के कटआउट लगाए जा रहे हैं। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
रिलेशनशिप एडवाइज- सास जासूस की तरह नजर रखती हैं:पति पीछे से कहेंगे, ‘तुम सही हो’ लेकिन मां के सामने चुप रहेंगे, क्या करूं
सवाल- मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं। मेरे हसबैंड के पेरेंट्स भी हमारे साथ रहते हैं। यहां बाकी सब तो ठीक है, लेकिन मेरी सास मुझे सख्त नापसंद हैं। वो हर चीज के लिए टोकती हैं। चाहती हैं कि मैं हर काम उनकी मर्जी से, उनसे पूछकर करूं। यहां तक कि उन्हें इस बात से भी समस्या है कि मैं कब-किससे बात करती हूं। ये बातें मेरे हसबैंड को भी पता हैं। अकेले में वो मुझे सपोर्ट करते हैं, लेकिन अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। कहते हैं, “मैं मां को नहीं समझा सकता, लेकिन तुम्हें समझा सकता हूं।” मैं समझते-समझते थक गई हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- अपनी समस्या को इतने साफ शब्दों में लिखने के लिए शुक्रिया। आपने जो समस्या बताई है, ये अक्सर जॉइंट फैमिली में देखने को मिलती है। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। बहुत ज्यादा रोक–टोक हो तो परेशानी जायज है। लेकिन पता है, जीवन की और इंसान की सबसे अच्छी बात क्या है। वो ये कि हममें खुद को बदलने की असीमित क्षमता है। आइए आपकी स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात करते हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं आप जो महसूस कर रही हैं, वो बिल्कुल सही है। अगर सास हर बात पर टोकती हैं तो इससे आपकी प्राइवेसी और आजादी का दायरा कम हो सकता है। हमारे समाज में सास-बहू के बीच ऐसे कॉन्फ्लिक्ट बहुत कॉमन हैं। सास कंट्रोल करने की कोशिश क्यों करती हैं? सास अकसर बहुओं को कंट्रोल करने की कोशिश इसलिए करती हैं क्योंकि वो सिर्फ बहुओं को ही कंट्रोल कर सकती हैं। अब तक उनकी जिंदगी में जितने भी और रिश्ते थे, उन सब में उनकी स्थिति मातहत की थी। वो अपनी सास को, पति को, बेटे को किसी को कंट्रोल नहीं कर सकती थीं। बहू के रूप में उन्हें जीवन में पहला ऐसा रिश्ता मिला है, जिसके ऊपर उनका पावर है। अपनी सत्ता छिनने का डर इस तरह की स्थितियां अक्सर इनसिक्योरिटी से पैदा होती हैं। अभी सास के हाथ में घर की पावर है। यह सत्ता एक लंबे संघर्ष के बाद उनके पास आई है। इससे पहले ये पावर उनकी सास के हाथ में रही होगी। अब आपके आने से उनके मन में एक अनजाना डर हो सकता है। शायद उन्हें महसूस हो रहा हो कि बहू के आने से घर में उनका हक या उनकी अहमियत कहीं कम न हो जाए। यह भी हो सकता है कि वह जताना चाहती हों कि "इस घर में आज भी मेरी चलती है।" इसलिए वह बार-बार टोककर अपनी जगह सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं। बार-बार टोकने से बढ़ता स्ट्रेस बार-बार टोका-टाकी से किसी भी व्यक्ति के मन पर गहरा असर पड़ता है। इससे तनाव बढ़ सकता है और भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। इसके कई साइकोलॉजिकल इफेक्ट हो सकते हैं, सभी ग्राफिक में देखिए- हसबैंड को कैसे समझाएं? आपके हसबैंड अकेले में ही सही, पर आपको सपोर्ट करते हैं। आपने बताया कि वह अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। उन्हें बताएं कि ये आपको हर्ट करता है। आप अपने हसबैंड से ये बातें कह सकती हैं- ऊपर मैंने जितने भी उदाहरण पेश किए हैं, उन सबका सार और उनका मकसद एक ही है। अगर प्यार से, संतुलन से और सम्मान से बात की जाए तो दुनिया की कोई ऐसी समस्या नहीं है, जो सुलझ न सके। बिना नाराज हुए, बिना दुखी हुए, बिना आवाज ऊंची किए सिर्फ एक बार अपनी भावनाओं को व्यक्त करके देखिए। अपना पक्ष एक बार तार्किक ढंग से उनके सामने रखकर देखिए। प्यार और कंपैशन से बदल सकते हैं रिश्ते हम ये नहीं कह रहे कि प्यार से पूरी दुनिया बदल जाएगी, लेकिन ये दवा की तरह काम करता है। सास को प्यार दिखाएं। उन्हें महसूस करवाएं कि आप उनकी टीम में ही हैं। इसके लिए छोटी-छोटी चीजें ट्राई करें। जैसे- साथ घूमने जाएं, शॉपिंग करें, टीवी देखें। ह्यूमर से डील करें सिचुएशन आपने सोशल मीडिया पर वो मीम जरूर देखा होगा। एक बहू काम कर रही होती है और सास आकर पूछती है- "तू काम क्यों कर रही है? क्या ये तेरे बाप का घर है?" बहू कहती है, "नहीं।” फिर सास पूछती है, “क्या ये मेरे बाप का घर है?” बहू कहती है, “नहीं।” फिर सास अपने बेटे की तरफ देखती है और कहती है, “ये इसके बाप का घर है। जिसका घर है, वही काम करेगा।" ये ह्यूमर है, लेकिन इसमें सीख ये है कि घर सबका है। सास को ये महसूस करवाएं कि बहू भी फैमिली का हिस्सा है। ह्यूमर से बात कहें, नाराजगी से नहीं। साइकोलॉजिकल हेल्प कब लें? अगर ये तरीके काम न करें तो प्रोफेशनल हेल्प लें। इसके लिए फैमिली थेरेपी ली जा सकती है। इससे आपको प्रोफेशनल टूल्स मिलेंगे, जिससे सिचुएशन को हैंडल करने में मदद मिलेगी। इस दौरान खुद का ख्याल रखें इस बीच खुद को न भूलें। सेल्फ-केयर जरूरी है। जर्नल लिखें, वॉक करें। अपनी हॉबी फॉलो करें। याद रखें, आप अकेली नहीं हैं। लाखों बहुएं ये फेस करती हैं, लेकिन आप मजबूत हैं। एक सच्ची गल्पकथा आखिरी बात से पहले मैं एक कहानी सुनाना चाहती हूं। एक बार की बात है। एक लड़की की शादी हुई और वो ससुराल गई। अगले दिन वो अपनी सास के साथ बैठी थी। सास ने बातों-बातों में बहू के मायके से आए सामान की कमियां निकालनी शुरू कर दीं। कहने लगीं, “ये साड़ी कितनी हल्की दी है? ये बेड कितनी कमजोर लकड़ी का है? ये फ्रिज कितनी खराब क्वालिटी का है? कोई भी सामान ठीक नहीं है..." लड़की कुछ देर चुपचाप सुनती रही। फिर मुस्कुराकर बोली, "मम्मी जी, क्या हमारे पास किसी चीज की कमी है, जो हमें किसी और से कुछ लेने की जरूरत पड़े?" इस एक छोटे से वाक्य ने पूरा इक्वेशन ही बदल दिया। लड़की ने बता दिया कि ये मेरा भी घर है। सास को महसूस करवा दिया कि वो उसकी भी मां हैं। अब आप सोच रही होंगी कि इस कहानी से तो पितृसत्ता (पैट्रीआर्की) का आभास हो रहा है। हां, बात बिल्कुल सही है। लेकिन यहां कहने का आशय ये है कि कई बार जिंदगी में जो लोग हमें दुश्मन लगते हैं, वो असल में होते नहीं हैं। वो भी हमारे जैसे ही होते हैं, इसी सिस्टम के विक्टिम। तो क्यों न उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाएं और उन्हें अपनी ही टीम में शामिल कर लें ताकि उनके हित भी हमारे साथ जुड़ जाएं। आपकी समस्या में भी ये तरीका काम आ सकता है। एक बार सास को भी अपनी टीम में शामिल करके देखिए। आखिरी बात जीवन में हर सिचुएशन एक सीख देती है। आप हसबैंड को समझाएं, सास को अपनी टीम में शामिल करने की कोशिश करें। लेकिन ये सारी चीजें भी काम नहीं आतीं, अगर इसके बाद भी कुछ नहीं बदलता तो ध्यान रखिए कि आपकी खुशी पहले है। किसी और को खुश रखने का बहुत बोझ अपने सिर पर मत रखिए। आप एक मजबूत, समझदार और कंपैशिनेट महिला हैं। ये समस्या आपकी जिंदगी का सिर्फ एक चैप्टर है, पूरी किताब नहीं। आगे बहुत सुकून आपका इंतजार कर रहा है। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- हसबैंड मेरे हर इमोशन को ‘ट्रॉमा’ कहते हैं: गले लगाने, प्यार जताने की बजाय लेक्चर देने लगते हैं, मैं क्या करूं? आपकी शादी को 3 साल हुए हैं। ये वो वक्त है, जब रिश्ता या तो मजबूती की ओर बढ़ रहा होता है या छोटी-छोटी दरारें दिखने लगती हैं। आपके सवाल से आपके हसबैंड समझदार लगते हैं, लेकिन हर इमोशन को ट्रॉमा कहने की उनकी आदत आपको फ्रस्ट्रेट कर रही है। चलिए, समझते हैं कि ये क्यों हो रहा है और आप क्या कर सकती हैं। आगे पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 













/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)







