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बीएसएनएल केवाईसी सस्पेंशन का दावा फर्जी, पीआईबी फैक्ट चेक ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के निर्देश पर ग्राहकों की केवाईसी (केवाईसी) प्रक्रिया को निलंबित कर दिया है और 24 घंटे के भीतर सिम कार्ड ब्लॉक कर दिया जाएगा। अब इस पूरे मामले पर प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने सच्चाई सामने रखी है और इस नोटिस को पूरी तरह फर्जी बताया है।

पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए स्पष्ट किया कि बीएसएनएल या टीआरएआई की ओर से ऐसा कोई भी नोटिस जारी नहीं किया गया है। पीआईबी ने लोगों को सावधान करते हुए कहा कि इस तरह के मैसेज पूरी तरह फर्जी हैं और इनका मकसद सिर्फ लोगों को गुमराह करना है।

पीआईबी के अनुसार, बीएसएनएल कभी भी ग्राहकों को इस तरह के केवाईसी सस्पेंशन नोटिस एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए नहीं भेजता है। इसके अलावा, केवाईसी के नाम पर किसी भी ग्राहक का मोबाइल कनेक्शन अचानक और मनमाने तरीके से ब्लॉक नहीं किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठग अक्सर टेलीकॉम कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर ऐसे फर्जी संदेश भेजते हैं। इन मैसेज में सिम बंद होने की धमकी देकर लोगों को डराया जाता है ताकि वे जल्दी में कोई गलती कर बैठें।

इनका असली उद्देश्य होता है कि यूजर किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करे, अपना ओटीपी शेयर करे या फिर आधार नंबर, बैंक डिटेल और लॉगिन जानकारी जैसी संवेदनशील जानकारी दे दे। एक बार यह जानकारी हाथ लगने पर ठग आसानी से बैंकिंग फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं।

ऐसे मामलों में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, चाहे वह एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए आया हो। कभी भी फोन कॉल या अनऑफिशियल लिंक के जरिए ओटीपी या केवाईसी डॉक्यूमेंट शेयर न करें।

अगर आपको इस तरह का कोई मैसेज मिलता है, तो उसकी पुष्टि बीएसएनएल की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा केंद्र से जरूर करें। इसके अलावा, ऐसे फर्जी मैसेज की शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या आधिकारिक पोर्टल साइबरक्राइम.गव.इन पर भी की जा सकती है।

सरकार और एजेंसियां लगातार ऐसे फर्जी मैसेज के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही हैं, लेकिन सबसे जरूरी है कि यूजर खुद सतर्क रहें। थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़े नुकसान में डाल सकती है, इसलिए किसी भी संदिग्ध मैसेज को नजरअंदाज करें और अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखें।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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टेक्सास का न्यू लंदन स्कूल विस्फोट: एक त्रासदी जिसने ली 300 लोगों की जान

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के टेक्सास स्थित न्यू लंदन स्कूल विस्फोट आधुनिक इतिहास की सबसे भयावह स्कूल दुर्घटनाओं में से एक के लिए जाना जाता है। 18 मार्च 1937 को न्यू लंदन स्कूल में अचानक हुए भीषण गैस विस्फोट ने पूरे भवन को कुछ ही सेकंड में मलबे में बदल दिया। इस हादसे में लगभग 300 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश मासूम बच्चे और शिक्षक थे।

यह दुर्घटना उस समय हुई जब स्कूल प्रशासन ने लागत बचाने के लिए प्राकृतिक गैस पाइपलाइन से “लीक हो रही” गैस को सीधे उपयोग में लेना शुरू कर दिया था। यह गैस बिना किसी गंध के थी, जिससे उसके रिसाव का पता नहीं चल पाया। जैसे ही एक क्लास में इलेक्ट्रिक स्विच ऑन किया गया, गैस ने विस्फोट का रूप ले लिया और पूरी इमारत धराशायी हो गई।

वहीं, एनएलएसडी (न्यू लंदन सकूल डिजास्टर) वेबसाइट के अनुसार, 18 मार्च को जिमनेजियम में पीटीए की बैठक हुई। दोपहर 3:17 बजे, मैनुअल ट्रेनिंग के इंस्ट्रक्टर लेमी आर. बटलर ने एक सैंडिंग मशीन चालू की; उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि रिएक्शन होगा और कहर बरप जाएगा। स्विच चालू होते ही आग लग गई, और लपटें इमारत के नीचे बनी एक लगभग बंद जगह में फैल गईं—यह जगह 253 फीट लंबी और 56 फीट चौड़ी थी। धमाका हुआ और चपेट में कई लोग आ गए। इस धमाके की आवाज चार मील दूर तक सुनाई दी।

इस घटना ने पूरे अमेरिका को झकझोर कर रख दिया। राहत और बचाव कार्य कई दिनों तक चलता रहा, और मलबे से लगातार शव निकाले जाते रहे। इस त्रासदी के बाद अमेरिका में गैस सुरक्षा को लेकर व्यापक बदलाव किए गए। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि प्राकृतिक गैस में गंध मिलाना अनिवार्य किया जाए, ताकि रिसाव होने पर उसे आसानी से पहचाना जा सके। यह नियम आज भी दुनिया के कई देशों में लागू है।

इस हादसे का उल्लेख कई ऐतिहासिक पुस्तकों में मिलता है। उदाहरण के तौर पर, लेखक जेनेट कीथ की पुस्तक “रिच मैन्स वॉर, पुअर मैन्स फाइट” में इस त्रासदी का संदर्भ देते हुए लिखा गया है कि यह घटना “एक ऐसा क्षण था जिसने समुदाय को हमेशा के लिए बदल दिया और सुरक्षा के प्रति लापरवाही की भारी कीमत को उजागर किया।” यह उद्धरण उस समय के सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण को भी सामने लाता है, जहां छोटी सी लापरवाही ने सैकड़ों जिंदगियां छीन लीं।

न्यू लंदन स्कूल विस्फोट केवल एक दुर्घटना नहीं था, बल्कि एक चेतावनी थी कि तकनीकी सुविधाओं के साथ सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी विनाशकारी साबित हो सकती है। आज भी यह घटना दुनिया भर में औद्योगिक और सार्वजनिक सुरक्षा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद की जाती है।

--आईएएनएस

केआर/

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