अमेरिकी काउंटर टेररिज्म चीफ जो केंट का इस्तीफा, बोले- 'इजराइल के दबाव में शुरू हुई जंग'
अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. ट्रंप प्रशासन में यह अब तक का सबसे बड़ा और वरिष्ठ स्तर का इस्तीफा माना जा रहा है. जो केंट ने यह कदम पिछले तीन हफ्तों से ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के विरोध में उठाया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह व्हाइट हाउस की मौजूदा नीतियों और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं कर सकते. केंट का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजराइल की सेनाएं लगातार ईरान पर हमले कर रही हैं.
युद्ध को बताया एक बड़ा झूठ
जो केंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने फैसले की जानकारी देते हुए लिखा कि वह अब अंतरात्मा की आवाज पर इस युद्ध का हिस्सा नहीं बने रह सकते. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेजे अपने पत्र में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. केंट ने दावा किया कि ईरान से अमेरिका को कोई भी तत्काल खतरा नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उच्च पदस्थ इजरायली अधिकारियों और अमेरिकी मीडिया के प्रभावशाली लोगों ने एक 'गलत सूचना अभियान' चलाया, जिसने राष्ट्रपति के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे को नुकसान पहुंचाया और युद्ध का माहौल तैयार किया.
इजराइली दबाव का लगाया आरोप
पूर्व ग्रीन बेरेट सदस्य रह चुके जो केंट ने अपने पत्र में लिखा कि इजराइली लॉबी ने अमेरिका को इस युद्ध में धकेला है. उन्होंने इसकी तुलना इराक युद्ध से करते हुए कहा कि वही पुरानी चालें दोबारा चली गई हैं. केंट के मुताबिक, राष्ट्रपति को यह विश्वास दिलाया गया कि ईरान पर हमला करने से जल्दी और आसान जीत मिल जाएगी, जो कि सरासर झूठ था. उन्होंने कहा कि वह अगली पीढ़ी के अमेरिकी सैनिकों को एक ऐसे युद्ध में मरने के लिए भेजने का समर्थन नहीं कर सकते, जिससे अमेरिकी जनता का कोई भला नहीं होने वाला है.
After much reflection, I have decided to resign from my position as Director of the National Counterterrorism Center, effective today.
— Joe Kent (@joekent16jan19) March 17, 2026
I cannot in good conscience support the ongoing war in Iran. Iran posed no imminent threat to our nation, and it is clear that we started this… pic.twitter.com/prtu86DpEr
युद्ध के विरोध में पहली बड़ी आवाज
ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों से हुई थी. जो केंट इस युद्ध के खिलाफ खुलकर बोलने वाले पहले शीर्ष अधिकारी बन गए हैं. उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इस युद्ध की भारी कीमत अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है, जिसका कोई ठोस आधार नहीं है. केंट के इस इस्तीफे ने अमेरिकी इंटेलिजेंस और सैन्य हलकों में खलबली मचा दी है. अब देखना यह होगा कि जो केंट के इन गंभीर आरोपों पर व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप की क्या प्रतिक्रिया आती है.
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मिडिल ईस्ट तनाव के असर से निपटने के लिए श्रीलंका ने बनाई चार विशेष समितियां
कोलंबो, 17 मार्च (आईएएनएस)। श्रीलंका सरकार ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए चार विशेष समितियों के गठन को मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की ओर से पेश किया गया था, जिसे मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी।
सरकार का कहना है कि इन समितियों का उद्देश्य जरूरी सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना, सप्लाई चेन को स्थिर करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले असर को कम करना है।
ऊर्जा क्षेत्र के लिए बनाई गई समिति को ईंधन, गैस और कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स की पहचान करने और आपात खरीद की प्रक्रिया को तेज करने पर काम करेगी।
सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी के लिए एक अलग समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज को सुचारु रखना, आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देना और आम जनता तक आवश्यक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
वहीं, परिवहन, राजमार्ग और शहरी विकास मंत्री की अगुवाई में बनी तीसरी समिति आवश्यक वस्तुओं के वितरण पर नजर रखेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पब्लिक और प्राइवेट सप्लाई चेन बिना बाधा के काम करें और बाजार में वस्तुओं की कमी न हो।
सामाजिक प्रभावों से निपटने के लिए चौथी समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक सशक्तिकरण मंत्री करेंगे। यह समिति कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले प्रभाव की पहचान कर संबंधित संस्थानों के साथ समन्वय करके समय पर सहायता उपलब्ध कराएगी।
उल्लेखनीय है कि मध्य पूर्व में तनाव ईरान पर इजरायली और अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका और इजरायल समेत क्षेत्रीय ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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