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यूके में मेनिन्जाइटिस: दो छात्रों की मौत, मंत्री ने माना नाइटक्लब से फैला संक्रमण

लंदन, 17 मार्च (आईएएनएस)। ब्रिटेन में मेनिन्जाइटिस के कारण पिछले दिनों दो छात्रों की मौत हो गई। बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यह मुद्दा संसद में जोरों शोरों से उठाया गया। संसद में बयान देते हुए स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने इसे “अकल्पनीय करार दिया और दो छात्रों की मौत पर शोक व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि संवेदनशील स्थिति को देखते हुए तथ्यों पर आधारित जानकारी देना जरूरी है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी के अनुसार, सुबह 9:30 बजे तक ग्रुप बी मेनिंगोकोकल बीमारी (मेनबी) के चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 अन्य मामलों की जांच जारी है।

मंत्री ने बताया कि दोनों मौतें इसी संक्रमण क्लस्टर से जुड़ी हैं। अधिकांश मामले क्लब केमिस्ट्री नाइटक्लब से जुड़े पाए गए हैं, जहां 5, 6 और 7 मार्च को संक्रमित लोग मौजूद थे। एहतियात के तौर पर क्लब को फिलहाल स्वेच्छा से बंद कर दिया गया है। मंत्री ने बताया कि संक्रमण किसी को छूने, स्मोकिंग, बीमार शख्स के संपर्क में आने से बढ़ता है। एंटीबायटिक से इलाज किया जाता है।

सरकार ने स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी हर दिन सुबह 9:30 बजे नए आंकड़े जारी करेगा, ताकि संक्रमण की स्थिति को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जा सके।

स्ट्रीटिंग ने प्रकोप का कारण टीकाकरण की कमी को भी बताया। उन्होंने कहा कि मेनिनजाइटिस के प्रकोप के जवाब में केंट के छात्रों को मेनबी वैक्सीन दी जा रही है। उनके अनुसार एनएचएस (नेशनल हेल्थ सर्विस) पर 2015 से ही ये उपलब्ध है। जिसका मतलब है कि केंट के छात्रों को यह वैक्सीन नहीं मिली होगी।

उन्होंने आगे कहा: हालात की गंभीरता को देखते हुए, मैं सदन से ये स्पष्ट कह रहा हूं कि हम कैंटरबरी में केंट यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए एक खास वैक्सीनेशन प्रोग्राम जल्द ही शुरू करेंगे।

यह प्रकोप इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सीमित नेटवर्क के भीतर तेजी से फैलता दिख रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहचान, संपर्क ट्रेसिंग और समय पर इलाज ही इसके प्रसार को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से सतर्क रहने और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील कर रही हैं, ताकि इस “विषम” स्थिति को जल्द नियंत्रित किया जा सके।

ब्रिटेन के केंट क्षेत्र में इनवेसिव मेनिन्जाइटिस के एक गंभीर प्रकोप ने शैक्षणिक संस्थानों में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है, जहां एक यूनिवर्सिटी और तीन स्कूल इसके दायरे में आ चुके हैं। इस प्रकोप में अब तक दो युवाओं की मौत हो चुकी है और 11 अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण के फैलाव और उसके स्रोत की गहन जांच कर रहे हैं।

मेनिन्जाइटिस के मुख्य लक्षणों में गर्दन में अकड़न, सिरदर्द, उल्टी, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता (फोटोफोबिया) और भ्रम की स्थिति शामिल है।

मरने वालों में एक छात्र यूनिवर्सिटी ऑफ केंट का था, जबकि दूसरी पीड़िता फेवर्शम स्थित क्वीन एलिजाबेथ ग्रामर स्कूल की सिक्स्थ-फॉर्म (छठी में पढ़ने वाली) छात्रा थी, जिसकी पहचान जूलियट के रूप में की गई है।

इसी बीच, कैंटरबरी के साइमन लेंगटन ग्रामर स्कूल ऑफ बॉयज और ऐशफोर्ड के नॉर्टन नैचबुल स्कूल ने भी पुष्टि की है कि उनके यहां 13 साल का छात्र मेनिन्जाइटिस के चलते अस्पताल में भर्ती है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि संक्रमण एक ही क्षेत्र के कई संस्थानों में फैल चुका है।

यूकेएचएसए के अनुसार 13 मार्च से अब तक कुल 13 मामले सामने आए हैं, जिनमें दोनों मौतें शामिल हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये सभी मामले आपस में जुड़े हुए हैं और संक्रमण का पैटर्न किस तरह का है। अधिकारियों का मानना है कि यह इनवेसिव प्रकार का मेनिन्जाइटिस है, जिसमें बैक्टीरिया तेजी से शरीर में फैलकर स्थिति को गंभीर बना सकता है।

स्वास्थ्य एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर स्कूलों और यूनिवर्सिटी समुदाय को सतर्क रहने, लक्षणों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी है। साथ ही, संक्रमण के संभावित संपर्क में आए लोगों को एंटीबायोटिक के जरिए बचाव उपाय भी दिए जा सकते हैं ताकि बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सके।

यह प्रकोप इसलिए भी चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि यह मुख्य रूप से युवा छात्रों को प्रभावित कर रहा है और सीमित भौगोलिक क्षेत्र में तेजी से सामने आया है, जिससे सामुदायिक स्तर पर संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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पाकिस्तान : जनता पर महंगाई की मार, सीनेट चेयरमैन सरकारी कोष से खरीद रहे लग्‍जरी कार

इस्लामाबाद, 17 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की जनता एक ओर महंगाई से जूझ रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान के सीनेट चेयरमैन यूसुफ रजा गिलानी के लिए सीनेट के बजट से 90 मिलियन पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) की एक कार खरीदी गई है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की र‍िपोर्ट के अनुसार, यह गाड़ी सीनेट के बजट से खरीदी गई और पाकिस्तान के सीनेट सचिवालय में पहुंच चुकी है। जब इस खरीद के बारे में पूछा गया, तो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा कि कार पहले ही खरीदी जा चुकी है।

गिलानी के हवाले से कहा गया, “हां, हमने यह कार सीनेट के बजट से खरीदी है, लेकिन इसे पिछले साल मई में ऑर्डर किया गया था।”

उन्होंने यह भी बताया कि वाहन पिछले साल के बजट की बचत से खरीदा गया था। मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने कार लौटाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बताया गया कि गाड़ी पहले ही आ चुकी है।

जियो न्यूज के अनुसार, सत्ता पक्ष के एक सीनेटर ने अपना नाम न बताने की शर्त रखते हुए इस बात पर अफसोस जताया कि ऐसे राष्ट्रीय हालात में यह खरीद अनावश्यक थी, जहां बढ़ती महंगाई के बीच 70 मिलियन से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे जी रहे हैं।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, पिछले जून में पाकिस्तान के संघीय वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने संसद भवन में कहा था कि सीनेट चेयरमैन और नेशनल असेंबली के स्पीकर को हर महीने 2.15 मिलियन पीकेआर का वेतन मिल रहा है। उस समय, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि सीनेट चेयरमैन, नेशनल असेंबली स्पीकर और अन्य लोगों के बढ़े हुए वेतन आर्थिक अश्लीलता के बराबर हैं।

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने, यह रिपोर्ट आई थी कि पंजाब की प्रांतीय सरकार ने कैबिनेट समिति के फैसलों और परिवहन विभाग की सिफारिशों के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान कैबिनेट सदस्यों और नौकरशाहों के लिए 1.14 बिलियन पीकेआर की 108 नई लग्जरी गाड़ियां खरीदने की योजना बनाई है।

हालांकि, पंजाब सरकार ने अभी तक इन गाड़ियों की खरीद को अंतिम मंजूरी नहीं दी है।

ट्रांसपोर्ट विंग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि सरकार नई लग्जरी गाड़ियां खरीदने की योजना बना रही है, लेकिन कुछ सूत्रों ने बताया कि पिछले तीन महीनों में दी गई सिफारिशों पर केवल सरकारी मंजूरी का इंतजार है।

सूत्रों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट विंग ने पंजाब कैबिनेट के लिए 300 मिलियन (पीकेआर) की 28 नई गाड़ियां खरीदने की सिफारिश की थी। वहीं, पंजाब सरकार पहले ही दो प्रांतीय मंत्रियों के लिए 40 मिलियन (पीकेआर) की दो बुलेटप्रूफ 4x4 गाड़ियां खरीदने की मंजूरी दे चुकी है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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बिहार में सिविल जज के 173 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन की अंतिम तारीख 18 मार्च 2026, जानें आयु-सीमा और योग्यता

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