Electric SUV: होंडा ने पहली इलेक्ट्रिक कार के टेस्ट शुरू किए, जानें फीचर्स और लॉन्चिंग डेट
Electric SUV: इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में होंडा कार्स (Honda Cars) ने भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार (SUV) का पैन-इंडिया टेस्ट रन शुरू कर दिया है। यह टेस्टिंग “पब्लिक रोड वेरिफिकेशन प्रोग्राम” के तहत की जा रही है, जिसे होंडा की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्ट्रैटजी में मील का पत्थर माना जा रहा है। कंपनी का उद्देश्य इस मॉडल को खास तौर पर भारतीय ग्राहकों की जरूरतों और यहां की परिस्थितियों के अनुसार तैयार करना है।
Japan Mobility Show में दिखा था कॉन्सेप्ट
इस नई इलेक्ट्रिक SUV का कॉन्सेप्ट मॉडल Japan Mobility Show 2025 में पेश किया गया था। उस समय इसे “Honda 0 α” नाम से प्रदर्शित किया गया था। यह मॉडल होंडा की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल सीरीज का हिस्सा है। अब कंपनी इस कॉन्सेप्ट को प्रोडक्शन मॉडल में बदलने के लिए भारत में व्यापक स्तर पर टेस्टिंग कर रही है।
हर तरह की सड़कों पर हो रही टेस्टिंग
कंपनी के अनुसार, इस टेस्टिंग प्रोग्राम के तहत SUV को भारत की विभिन्न ड्राइविंग कंडीशन्स में परखा जा रहा है। इसमें हाईवे, शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कें, खराब और चुनौतीपूर्ण रास्ते, अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्र और मॉनसून के दौरान गीली व फिसलन भरी सड़कें शामिल हैं। इसका मकसद हर परिस्थिति में बेहतर परफॉर्मेंस सुनिश्चित करना है।
इन तकनीकी पहलुओं पर रहेगा फोकस
पब्लिक रोड टेस्टिंग के दौरान वाहन की ड्यूरेबिलिटी, हैंडलिंग, ड्राइविंग कंट्रोल, राइड कम्फर्ट, ऊर्जा दक्षता और ओवरऑल रिलायबिलिटी का मूल्यांकन किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि SUV भारतीय परिस्थितियों में पूरी तरह सक्षम हो।
शहर और एडवेंचर—दोनों के लिए तैयार
होंडा की पहली इलेक्ट्रिक SUV रोजमर्रा के शहरी इस्तेमाल के साथ-साथ लंबी दूरी की यात्राओं और एडवेंचर के लिए भी डिजाइन की जा रही है। इसे एक मल्टी-परपज फैमिली SUV के रूप में पेश किया जाएगा।
भारत बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब
होंडा इस SUV को FY2026–27 के आसपास लॉन्च कर सकती है। खास बात यह है कि इसका निर्माण भारत में ही किया जाएगा और यहां से इसे वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट किया जाएगा, जिससे भारत कंपनी के लिए एक प्रमुख EV हब बन सकता है।
(मंजू कुमारी)
SIAM Sales Report: फरवरी में ऑटो इंडस्ट्री का नया रिकॉर्ड, टू-व्हीलर बिक्री में सबसे ज्यादा उछाल
SIAM Sales Report: भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए फरवरी 2026 का महीना काफी शानदार रहा। पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में बिक्री ने मजबूत प्रदर्शन किया और सालाना आधार पर डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई। इंडस्ट्री बॉडी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफ्रैक्चरर्स (SIAM) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में ऑटो सेक्टर का कुल उत्पादन 28,64,612 यूनिट रहा। हालांकि इंडस्ट्री के सामने एक संभावित चुनौती भी है। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन और एक्सपोर्ट पर असर डाल सकता है, जिस पर ऑटो कंपनियां नजर बनाए हुए हैं।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ
फरवरी 2026 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने अच्छा प्रदर्शन किया। इस दौरान 4,17,705 यूनिट पैसेंजर व्हीकल की बिक्री हुई, जो फरवरी 2025 के मुकाबले करीब 10.6% ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस ग्रोथ के पीछे SUV और प्रीमियम कारों की बढ़ती मांग, बेहतर फाइनेंसिंग विकल्प और नए मॉडलों की लॉन्चिंग जैसे कारक जिम्मेदार हैं।
थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी तेजी
थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी जबरदस्त बढ़त देखने को मिली। फरवरी 2026 में 74,573 यूनिट थ्री-व्हीलर की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 29% अधिक है।
कैटेगरी के अनुसार बिक्री
पैसेंजर कैरियर: 60,013 यूनिट
गुड्स कैरियर: 13,271 यूनिट
ई-रिक्शा: 890 यूनिट ई-कार्ट: 399 यूनिट
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की बढ़ती जरूरत इस सेगमेंट की मांग को बढ़ा रही है।
टू-व्हीलर सेगमेंट में सबसे ज्यादा उछाल
फरवरी 2026 में सबसे ज्यादा ग्रोथ टू-व्हीलर सेगमेंट में दर्ज की गई। इस दौरान 18,71,406 यूनिट टू-व्हीलर की बिक्री हुई, जो पिछले साल की तुलना में करीब 35.2% ज्यादा है।
कैटेगरी के हिसाब से सेल्स ग्रोथ
स्कूटर: 7,29,774 यूनिट(42.3% ग्रोथ)
मोटरसाइकिल: 10,96,537 यूनिट (30.8% ग्रोथ)
मोपेड: 45,095 यूनिट (34.3% ग्रोथ)
SIAM ने क्या कहा है?
सियाम के डायरेक्टर जनरल राजेश मेनन के मुताबिक, फरवरी 2026 में पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में फरवरी महीने की अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की गई है। भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में मांग मजबूत बनी हुई है और आने वाले महीनों में भी ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है।
आगे क्या रहेगा रुझान?
ऑटो इंडस्ट्री को उम्मीद है कि मार्च में त्योहारों के कारण मांग और बढ़ सकती है। हालांकि इंडस्ट्री मिडिल ईस्ट संकट और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों पर भी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इससे लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की लागत प्रभावित हो सकती है।
(मंजू कुमारी)
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