काबुल: अस्पताल पर बमबारी में 400 की मौत, मानवाधिकार संगठन आईएचआरएफ ने उठाई स्वतंत्र जांच की मांग
काबुल, 17 मार्च (आईएएनएस)। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तान की बमबारी की कड़ी निंदा की है। इस हमले में 400 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई, जो वहां इलाज और ठीक होने की उम्मीद में आए थे।
आईएचआरएफ ने इस घटना की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अफगान अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के हवाई हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी क्षेत्र में स्थित दो हजार बेड वाले उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को निशाना बनाया गया, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए और 250 अन्य घायल हुए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया, “इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन काबुल, अफगानिस्तान में नशा मुक्ति के इलाज के लिए बने पुनर्वास अस्पताल पर पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी की कड़ी निंदा करता है, जिसमें बड़ी संख्या में कमजोर मरीजों की मौत हुई है।”
बयान में आगे कहा गया, “इलाज, पुनर्वास और मानवीय देखभाल के लिए समर्पित संस्थानों को कभी किसी संघर्ष या सुरक्षा कार्रवाई में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे संस्थानों में मरीज समाज के सबसे कमजोर वर्गों में से आते हैं जो मदद, सम्मान और अपनी जिंदगी को फिर से बनाने के लिए आए थे। हमें यह जानकर गहरा दुख हुआ।”
आईएचआरएफ ने तुरंत कदम उठाने की मांग की, ताकि चिकित्सा और पुनर्वास केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और कहा कि चिकित्सा संस्थानों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार मानकों के सबसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन की मांग है कि इस घटना की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच हो। जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए। चिकित्सा और पुनर्वास संस्थानों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। चिकित्सा संस्थानों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार मानकों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हैं। दुनिया को तब चुप नहीं रहना चाहिए, जब इलाज की जगह त्रासदी का स्थल बन जाएं।”
अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन काने ने मंगलवार को चेतावनी दी कि काबुल में पाकिस्तान की ओर से किए गए घातक हवाई हमलों का करारा जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बचाव कार्य जारी है और आपातकालीन टीमें मलबे के नीचे शवों की तलाश कर रही हैं।
हाल के हफ्तों में हवाई हमलों, तोपखाने की गोलीबारी और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मध्य पूर्व तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी 3 लाख टन एलपीजी, सप्लाई पर पड़ सकता है असर: सरकारी अधिकारी
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण करीब 3 लाख मीट्रिक टन एलपीजी (एलपीजी) इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी हुई है। यह जानकारी पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मंगलवार को दी।
विशेष सचिव ने बताया कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में मौजूदा हालात के कारण एलपीजी लेकर जा रहे कई जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। उनके अनुसार, इस समय 6 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, और हर जहाज में करीब 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है।
इस तरह कुल मिलाकर करीब 3 लाख मीट्रिक टन ईंधन अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) को अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है।
इस बीच, भारत के लिए राहत की खबर भी आई है। भारतीय झंडे वाला दूसरा एलपीजी टैंकर नंदा देवी मंगलवार को गुजरात के वडीनार पोर्ट पहुंच गया।
एक दिन पहले सोमवार को पहला भारतीय टैंकर शिवालिक भी गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, शिवालिक करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया, जिसमें से 20,000 टन मुंद्रा में उतारा जाएगा और बाकी 26,000 टन मंगलुरु में उतारा जाएगा।
ये दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बेहद जोखिम भरे रास्ते को पार करके भारत पहुंचे हैं, जहां ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा है।
हालांकि, अभी भी एक और जहाज जग लाडकी, जो यूएई से करीब 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है, भारत की ओर रास्ते में है।
ऐसे में, होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा हालात के कारण वैश्विक और भारतीय ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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