ईरान पर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का कहर, 21 दिनों तक और बरसता रहेगा आसमानी बारूद
ईरान के खिलाफ जारी युद्ध आज 18वें दिन में पहुंच गया है और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य शक्ति शिया देश के सैन्य ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बना रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि वे जंग जीत चुके हैं, लेकिन इजराइली रक्षा सूत्रों का कहना है कि अभी असली लड़ाई बाकी है. ईरान में मौजूद हजारों टारगेट अभी भी हिट किए जाने बाकी हैं. आईडीएफ के प्रवक्ता के मुताबिक, ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह खत्म करने के लिए कम से कम तीन हफ्ते यानी 21 दिनों तक ऑपरेशन जारी रखना बहुत जरूरी है.
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का कहर
अमेरिकी सेंट कॉम ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ अपने सबसे खतरनाक बॉम्बर एक्टिव कर चुका है. इसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है. पिछले 17 दिनों में ईरान के लगभग 6000 ठिकानों पर हमला किया गया है. तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले खाड़ी युद्ध के दौरान 43 दिनों में जितने टारगेट नष्ट किए गए थे, उससे कहीं ज्यादा तबाही इस बार शुरुआती दो हफ्तों में ही मचा दी गई है. तेहरान, मेहराबाद, करज और इसफहान जैसे बड़े शहर इस वक्त आग की लपटों और मलबे में तब्दील हो चुके हैं. अमेरिका के सभी 19 सैन्य बेस इस वक्त पूरी तरह एक्टिव हैं और वहां से फाइटर जेट लगातार उड़ान भर रहे हैं.
इजराइल की 42 दिनों वाली घातक योजना
इजराइल ने कसम खाई है कि वह ईरान के पूरे रक्षा तंत्र को पंगू बनाकर ही दम लेगा. इजराइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफिन ने दावा किया है कि ईरान के पास अभी भी हजारों मिलिट्री ठिकाने सुरक्षित हैं, जिन्हें नष्ट करना उनकी प्राथमिकता है. इजराइल ने इसके लिए अगले 42 दिनों तक की लंबी योजना तैयार की है. इजरायली कैबिनेट ने इस मिशन के लिए 827 मिलियन डॉलर का इमरजेंसी फंड भी जारी कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि अब तक ईरान के 70 पर्सेंट बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स और 100 से ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम को बर्बाद कर दिया गया है.
मैदान में उतरा 'फ्लाइंग टैंक'
इस युद्ध में अमेरिका अपने सबसे आधुनिक और अचूक हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. अमेरिकी वायुसेना का A-10 थंडरबोल्ट विमान, जिसे 'फ्लाइंग टैंक' के नाम से जाना जाता है, ईरान की आर्टिलरी और ड्रोन यूनिट्स पर कहर बरपा रहा है. यह विमान अपनी 30 मि.मी. की गेटलिंग तोप से एक मिनट में 4200 राउंड फायर कर सकता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बहुत नीची उड़ान भरकर रडार को चकमा दे सकता है. इसके साथ ही B-1B लांसर बॉम्बर्स रात के समय एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के जरिए लगातार बमबारी कर रहे हैं, जिससे ईरान को संभलने का मौका नहीं मिल रहा है.
ये भी पढ़ें- Nuclear Attack on Iran: Israel बरसाएगा ईरान पर एटम बम? नेतन्याहू का 'सीक्रेट प्लान' सामने आया
भविष्य की जंग और छठी पीढ़ी के जेट
अमेरिका इस युद्ध के जरिए दुनिया को अपनी 'नेक्स्ट जनरेशन एयर डोमिनेंस' भी दिखाना चाहता है. चर्चा है कि अमेरिका अपने छठी पीढ़ी के F-47 जेट को भी रणभूमि में उतार सकता है. यह विमान आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्टील्थ क्षमता से लैस है, जिसे रडार पर पकड़ पाना नामुमकिन है. 1500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाला यह लड़ाका ईरान के लिए काल साबित हो सकता है. दूसरी तरफ ईरान भी चुप नहीं है और उसने सेजिल और खुर्रम शहर जैसी मिसाइलों से पलटवार किया है, जिससे तेल अवीव समेत कई इजरायली शहरों में भारी नुकसान हुआ है. अगले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि इस महायुद्ध का अंजाम क्या होगा.
ये भी पढ़ें- दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह ठिकानों पर जमीनी अभियान शुरू : इजरायल
पलामू में 'आयुष्मान भारत' से लोगों को मिला मुफ्त इलाज, गरीबों के लिए फायदेमंद साबित हो रही योजना
रांची, 17 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड के पलामू में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सालाना 5 लाख रुपए तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इस योजना ने उनकी सबसे बड़ी चिंता, इलाज के खर्च को खत्म कर दिया है, जिससे कम समय में अच्छा इलाज मिल रहा है और पैसे की परेशानी भी खत्म हो रही है।
मरीज के परिजन शकीर आलम ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी के बाद नवजात की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद संक्रमण की समस्या बताई और तुरंत इलाज शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर आयुष्मान योजना नहीं होती, तो इतना महंगा इलाज कराना उनके लिए संभव नहीं था। इस योजना के कारण उन्हें 70 से 80 प्रतिशत तक आर्थिक राहत मिली है और अभी तक उन्हें कोई खर्च नहीं उठाना पड़ा है। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के व्यवहार की भी सराहना की और कहा कि गरीबों के लिए यह योजना बेहद उपयोगी है।
इसी तरह एक अन्य लाभार्थी के परिजन धनंजय विश्वकर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उनके बेटे का इलाज भी इसी योजना के तहत चल रहा है। पहले इलाज के लिए पैसे की चिंता सबसे बड़ी समस्या होती थी, लेकिन अब सरकार की इस पहल से गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
अस्पताल के कर्मचारी रवि कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गरीब मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। पहले जहां इलाज के अभाव में कई लोग परेशान रहते थे, वहीं अब उन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना वास्तव में समाज के कमजोर वर्ग के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।
अस्पताल संचालक और प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके अस्पताल में वर्तमान में करीब 10 मरीज आयुष्मान योजना के तहत भर्ती हैं। योजना की प्रक्रिया काफी सरल है। मरीज के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड या आयुष्मान कार्ड होना चाहिए। इसके बाद आयुष्मान पोर्टल पर नाम की पुष्टि होते ही मरीज को भर्ती कर लिया जाता है और इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत सामान्य सर्जरी, नवजात के लिए एनआईसीयू, बच्चों के लिए पीआईसीयू, इमरजेंसी सेवाएं और कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी शामिल है। पहले जहां गरीबों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी, वहीं अब उन्हें निजी अस्पतालों में भी सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है।
--आईएएनएस
एसएके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






















