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MP हाईकोर्ट का सवाल- नवोदय स्कूलों में EWS क्यों नहीं?:2019 के प्रावधान के बावजूद छात्रों को क्यों नहीं मिला हक? केंद्र से मांगा जवाब

देशभर के 650 से ज्यादा नवोदय विद्यालयों में 2019 के संवैधानिक प्रावधान के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्रवेश में शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने एक सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है। जबलपुर निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन वर्तमान प्रवेश नीति में EWS वर्ग को शामिल नहीं किया गया है। EWS(कमजोर वर्ग) को लेकर मुख्य आपत्ति याचिका में बताया गया कि नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ग्रामीण छात्र, बालिकाएं और दिव्यांग छात्र के लिए आरक्षण और प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई आरक्षण या अलग व्यवस्था नहीं है, जिससे यह वर्ग पूरी तरह वंचित रह जाता है। संवैधानिक आधार का दिया हवाला याचिका में कहा गया है कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के तहत अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया, जिसमें EWS वर्ग के लिए शैक्षणिक संस्थानों में 10% तक आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में इसे लागू नहीं किया गया, जिसे संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है। एक ही मंत्रालय, अलग नियम क्यों? याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित केंद्रीय विद्यालय (KV) में EWS वर्ग को प्रवेश का लाभ मिलता है। वहीं उसी मंत्रालय के अधीन संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसे याचिका में भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला याचिका में Atharv Chaturvedi बनाम राज्य मध्यप्रदेश (10 फरवरी 2026) फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा माना गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, देशभर में नवोदय विद्यालयों में करीब 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। ऐसे में 2019 से अब तक बड़ी संख्या में EWS छात्र अवसर से वंचित रहे हैं। वकील बोले- जरूरत पड़ी तो SC जाएंगे अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कहा कि यह सिर्फ एक छात्रा का मामला नहीं, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों से जुड़ा मुद्दा है। जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश, विपक्ष का हंगामा, सदन की कार्यवाही का किया बहिष्कार

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