देश के 204 पूर्व सैन्य अधिकारी, रिटायर्ड जज और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर एक बड़ा पत्र लिखा है। नागरिकों के नाम लिखे पत्र में राहुल गांधी और उनके सहयोगियों के हालिया संसद आचरण की कड़ी निंदा की है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि 84 पूर्व नौकरशाहों, 116 पूर्व सैनिकों और पूर्व वकीलों ने जनता को लिखे इस पत्र में कहा है कि संसद में राहुल गांधी का व्यवहार विपक्ष के नेता के पद के लिए उचित नहीं है, जो कि एक अत्यंत जिम्मेदार पद है। उनका व्यवहार अहंकार और विशेषाधिकार की भावना को दर्शाता है।
वैद ने आगे कहा वे नाटकबाजी करते हैं; वे संसद की सीढ़ियों पर बैठकर नारेबाज़ी के बीच चाय पीते हैं। मुझे लगता है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता के पद के महत्व को नहीं समझते। हम चाहते हैं कि वे इसे समझें और अब तक जो कुछ भी हुआ है उसके लिए राष्ट्र से माफी मांगें। स्पीकर ओम बिरला द्वारा सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील के बावजूद, राहुल गांधी नहीं समझते। उन्होंने खुद को हंसी का पात्र बना लिया है। हम चाहते हैं कि वे एक जिम्मेदार विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएं। विनम्रता होनी चाहिए, अहंकार और विशेषाधिकार की भावना नहीं। 14 मार्च को जो हुआ वह निंदनीय था।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, क्योंकि लोग उनकी बात सुनते हैं। राष्ट्र की आकांक्षाएं संसद में होने वाली चर्चा और उससे बनने वाले कानूनों पर टिकी हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नक्सल विरोधी अभियान में घायल हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा बटालियन के जवान अजय मलिक से सोमवार को मुलाकात की और कहा कि उन्हें मलिक से बात करके उनके मनोबल और जज्बे को महसूस किया।
राहुल गांधी ने आरके पुरम इलाके में मलिक के आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने फेसबुक पोस्ट किया, ‘ आज, आर.के. पुरम, नई दिल्ली में कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट श्री अजय मलिक जी से मुलाकात की। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल होकर उन्होंने अपना एक पैर खो दिया। उनसे बातें कर उनका अदम्य साहस, अटूट मनोबल और अद्भुत जज़्बा महसूस किया।’’ राहुल गांधी ने कहा, ‘‘देश के प्रति उनकी सेवा और समर्पण को मेरा सलाम है। आशा करता हूं वो शीघ्र स्वस्थ हो जाएं।
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ओडिशा में कांग्रेस ने मंगलवार को अपने तीन विधायकों को भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान करने और उन्हें राज्यसभा चुनाव जीतने में मदद करने के आरोप में निलंबित कर दिया। इन विधायकों में सनखेमुंडी से रमेश चंद्र जेना, मोहना से दशरथी गोमांगो और बाराबती-कटक से सोफिया फिरदौस शामिल हैं। पार्टी के अनुसार, इन विधायकों ने सोमवार को राज्यसभा चुनाव के दौरान राय के पक्ष में मतदान किया था।
राज्य कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में विधायकों के निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ विश्वासघात करने वाले राष्ट्र के साथ विश्वासघात करते हैं। इस मामले में कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदमा ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महत्वपूर्ण पत्र लिखकर आगे की कार्रवाई की मांग की है। पहले पत्र में अध्यक्ष से दलबदल विरोधी कानून के तहत इन तीन विधायकों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप जारी होने के बावजूद इन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की - जिसे संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लिखित प्रावधानों का उल्लंघन माना जा सकता है। पत्र में आगे कहा गया है कि ऐसा आचरण न केवल पार्टी अनुशासन को कमजोर करता है, बल्कि मतदाताओं द्वारा दिए गए जनादेश का उल्लंघन भी माना जाता है। इसलिए, अध्यक्ष से इस मामले का संज्ञान लेने और तत्काल आवश्यक जांच एवं अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया है।
क्रॉस-वोटिंग की घटना ने पार्टी के भीतर पनप रहे आंतरिक मतभेद को उजागर कर दिया है। इस कृत्य को संगठन की सामूहिक रणनीति के विरुद्ध कदम बताते हुए, पार्टी नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि अनुशासन बनाए रखना सर्वोपरि है - विशेष रूप से ऐसे समय में जब पार्टी आगामी राजनीतिक चुनावों की तैयारी कर रही है।
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