बीते वर्ष 7.9 प्रतिशत डॉक्टर्स से हुई हिंसा या दुर्व्यवहार, राज्यसभा में उठा सुरक्षा का विषय
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। डॉक्टरों व मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल में उनके बीच होने वाले हिंसक विवाद का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में उठाया गया। हाल के एक राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, लगभग 7.9 प्रतिशत डॉक्टरों ने पिछले एक वर्ष में किसी न किसी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का सामना किया है, जबकि लगभग 3.9 प्रतिशत मामलों में शारीरिक हमले भी हुए हैं।
इन हमलों में डॉक्टर्स को चोट पहुंचाने की कोशिश की गई। उनके अस्पताल या क्लिनिक में तोड़फोड़ और मेडिकल उपकरणों को भी क्षति पहुंचाई गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस प्रकार की लगभग 48 प्रतिशत घटनाओं की रिपोर्ट ही नहीं की जाती, क्योंकि डॉक्टरों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कम होता जा रहा है। यह जानकारी भाजपा के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मंगलवार को सदन में दी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में मरीजों के परिजनों द्वारा मारपीट, तोड़-फोड़ और चिकित्सकों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। यह समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मेरठ जैसे शहरों सहित छोटे कस्बों और नर्सिंग होम्स तक भी फैल चुकी है। कई बार मरीज के परिजनों के असंतोष के कारण चिकित्सकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है, जिससे इलाज की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि यदि हम दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2021 से 2025 के बीच ऐसी 149 घटनाएं सामने आई हैं। यह संख्या चिंताजनक रही है। 2024 में 49 और 2025 में 48 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं।हमारे देश में चिकित्सक को भगवान का रूप माना जाता है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी हमारे समाज के सच्चे योद्धा हैं, जो दिन-रात लोगों की जान बचाने में लगे रहते हैं। लेकिन, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले कुछ वर्षों में कटुता और अविश्वास के कारण डॉक्टरों और मरीजों के बीच तनाव बढ़ा है और अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
भाजपा के राज्यसभा सांसद ने इसे एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय बताते कहा कि वह सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं। ऐसी घटनाएं डॉक्टर और मरीज के बीच के विश्वास को कमजोर करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के पूरे वातावरण को असुरक्षित बना देती हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों यानी सभी के हितों की रक्षा की जाए।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्य स्तर पर सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अपील समिति गठित की जाए। जिला स्तर पर जिला जज की अध्यक्षता में ‘डॉक्टर-मरीज सुरक्षा समन्वय समिति’ का गठन किया जाए। यहां आने वाले सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है ताकि डॉक्टर निर्भय होकर अपने पवित्र कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और मरीजों एवं उनके परिवारों को भी समय पर न्याय मिल सके।
--आईएएनएस
जीसीबी/एसके
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'पाकिस्तान सैन्य ऑपरेशन की आड़ में कर रहा नरसंहार,' भारत ने काबुल में एयरस्ट्राइक की आलोचना की
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने मंगलवार को काबुल के एक हॉस्पिटल और रिहैब सेंटर पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान की तरफ से काबुल के इस हॉस्पिटल और रिहैब सेंटर पर किए गए एयर स्ट्राइक में 400 से ज्यादा आम लोग मारे गए और कम से कम 250 घायल हुए। भारत ने कहा कि इस्लामाबाद अब इस नरसंहार को सैन्य ऑपरेशन का रूप देने की कोशिश कर रहा है।
इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा, यह हिंसा का एक कायरतापूर्ण और अमानवीय काम है, जिसमें एक ऐसी जगह पर बड़ी संख्या में आम लोगों की जान चली गई, जिसे किसी भी तरह से सैन्य टारगेट के तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता। पाकिस्तान अब इस नरसंहार को सैन्य ऑपरेशन का रूप देने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान का आक्रमण का घिनौना काम अफगानिस्तान की आजादी पर भी एक खुला हमला है और यह इलाके की शांति और स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, यह पाकिस्तान के लगातार लापरवाह बर्ताव और अपनी सीमाओं के बाहर हिंसा की बढ़ती हताशाजनक हरकतों के जरिए अंदरूनी नाकामियों को बाहर दिखाने की उसकी बार-बार की कोशिशों को दिखाता है।
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि जो बात इस हमले को ज्यादा निंदनीय बनाती है, वह यह है कि इस्लामाबाद ने रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हमला किया, जो दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक पवित्र महीना है और शांति, सोच-विचार और रहम का समय है।
इसमें कहा गया, कोई भी धर्म, कोई भी कानून और कोई भी नैतिकता किसी अस्पताल और उसके मरीजों को जानबूझकर निशाना बनाने को सही नहीं ठहरा सकती।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वे इस आपराधिक काम के दोषियों को जिम्मेदार ठहराएं और यह सुनिश्चित करें कि पाकिस्तान द्वारा अफगान नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना बिना किसी देरी के बंद हो।
शोक जताते हुए भारत विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत दुखी परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना जताता है, घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना करता है और इस दुख की घड़ी में अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है। हम अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए अपना निश्चित समर्थन भी दोहराते हैं।
बता दें, तालिबान अधिकारियों ने कहा कि काबुल में ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में 400 से ज्यादा लोग मारे गए और कम से कम 250 दूसरे घायल हो गए। यह अफगान राजधानी में हुई सबसे भयावह घटनाओं में से एक हो सकती है।
तालिबान की सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात करीब 9 बजे काबुल में 2,000 बेड वाले उमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल को निशाना बनाकर किया गया।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के इस हमले को लेकर कहा, अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हालिया हमले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी बहुत दुख की बात है और यह अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी की अनदेखी दिखाती है। पाकिस्तान का सैन्य शासन आम लोगों पर बेरहमी से हमले करता है जबकि दुनिया बस इन दुखद घटनाओं को देखती रहती है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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