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पाकिस्तान पर भारी पड़ा अपना ही दांव, 36 साल पहले जिसे दिया जन्म, आज कट्टर दुश्मन...

Pakistan Afghanistan War 2026: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग छीड़ी हुई है. हाल ही में पाकिस्तान के काबुल पर हमले में करीब 400 से ज्यादा लोग मारे गए और तकरीबन 265 लोग जख्मी हुए हैं. दोनों देशों के रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं. 1990 के दशक में पाकिस्तान ने तालिबान को न सिर्फ समर्थन दिया बल्कि उन्हें सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई थी. 

उस समय पाक का मकसद था अफगानिस्तान में स्थिरता और भारत-विरोधी रणनीति तैयार करना. उस समय पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ही तालिबान को हथियार, ट्रेनिंग और पनाह देती थीं. लेकिन 2021 में तालिबान की वापसी के बाद सब बदल गया.

अफगानिस्तान की जमीन पर आतंकी संगठन को शेल्टर दिया जा रहा है

आज 2026 में वही तालिबान पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. क्योंकि पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन पर Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) जैसे आतंकी संगठन को शेल्टर दिया जा रहा है. TTP पाकिस्तान में हमले कर रहा है और अफगान तालिबान उसे रोक नहीं रहा है.

TTP का उदय और पाकिस्तान का आरोप

TTP पाकिस्तानी तालिबान है, जो अफगान तालिबान से अलग लेकिन विचारधारा में करीब है. 2021 के बाद TTP ने पाकिस्तान में हमले तेज कर दिए और संगठन ने स्कूल, मस्जिद, सैन्य अड्डे को टारगेट किया. पाकिस्तानी सरकार कहा कहना है कि TTP के ठिकाने अफगानिस्तान में हैं और खासकर Durand Line के पास इन्होंने अपना बेस तैयार किया है. 

पाकिस्तान खुद अपनी सीमा सुरक्षा मजबूत नहीं कर पाया

वहीं, अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करते हुए तालिबान का कहना है कि वे पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देते और पाकिस्तान खुद अपनी सीमा सुरक्षा मजबूत नहीं कर पाया. लेकिन पाकिस्तान ने अपने पास कॉनक्लूसिव एविडेंस होने का दावा करता है. बीती फरवरी से दोनों देशों के बीच जंग बढ़ गई है और एयरस्ट्राइक्स हो रही हैं.

Durand Line पर क्या विवाद है?

Durand Line 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच खींची गई 2640 किलोमीटर लंबी सीमा है. पाकिस्तान इसे आधिकारिक बॉर्डर मानता है, लेकिन अफगानिस्तान और खासकर पश्तून राष्ट्रवादी इसे कभी स्वीकार नहीं करते हैं.

फरवरी 2026 से कैसे शुरू हुई ‘ओपन वॉर’?

जानकारी के अनुसार 21 फरवरी 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और खोस्त में TTP ठिकानों पर एयरस्ट्राइक्स किए थे. तालिबान ने जवाब में बॉर्डर पर फायरिंग शुरू कर दी. 27 फरवरी को पाकिस्तानी डिफेंस मिनिस्टर ने खुलकर कहा कि अब दोनों देशों के बीच ओपन वॉर है. इसके बाद पाकिस्तानी जेट्स और ड्रोन्स ने काबुल, कंधार, पक्तिया पर भी हमले किए. तालिबान का दावा है कि काबुल के एक ड्रग रिहैब सेंटर पर बम गिराया है, जिसमें 400 से ज्यादा मौतें हुईं हैं. अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर जवाबी हमले किए। जिसमें अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।

FAQ 

Q1. पाकिस्तान और तालिबान में जंग क्यों शुरू हुई?  
A: मुख्य वजह TTP आतंकियों को अफगानिस्तान में शेल्टर मिलना है. पाकिस्तान को लगता है कि तालिबान TTP को रोक नहीं रहा, जबकि तालिबान इनकार करता है.

Q2. Durand Line का क्या रोल है? 
A: यह 1893 की पुरानी सीमा है जिसे अफगानिस्तान मानता नहीं. TTP हमले इसी बॉर्डर के पास से होते हैं, इसलिए विवाद और बढ़ गया है.

Q3. काबुल पर पाकिस्तानी हमले में कितने लोग मारे गए? 
A: तालिबान का दावा 400 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, पाकिस्तान कहता है कि सिर्फ आतंकी ठिकाने टारगेट किए गए है.

Q4. क्या यह फुल-स्केल वॉर है?  
A: अभी एयरस्ट्राइक्स, शेलिंग और बॉर्डर क्लैश तक सीमित है, लेकिन दोनों तरफ “ओपन वॉर” शब्द इस्तेमाल हो रहा है.

Q5. दोनों देशों की वॉर में चीन की भूमिका क्या है?  
A: चीन शटल डिप्लोमेसी चला रहा है, लेकिन हाल के हमलों ने उसके प्रयासों को नुकसान पहुंचाया है.

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बीते वर्ष 7.9 प्रतिशत डॉक्टर्स से हुई हिंसा या दुर्व्यवहार, राज्यसभा में उठा सुरक्षा का विषय

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। डॉक्टरों व मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल में उनके बीच होने वाले हिंसक विवाद का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में उठाया गया। हाल के एक राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, लगभग 7.9 प्रतिशत डॉक्टरों ने पिछले एक वर्ष में किसी न किसी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार का सामना किया है, जबकि लगभग 3.9 प्रतिशत मामलों में शारीरिक हमले भी हुए हैं।

इन हमलों में डॉक्टर्स को चोट पहुंचाने की कोशिश की गई। उनके अस्पताल या क्लिनिक में तोड़फोड़ और मेडिकल उपकरणों को भी क्षति पहुंचाई गई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस प्रकार की लगभग 48 प्रतिशत घटनाओं की रिपोर्ट ही नहीं की जाती, क्योंकि डॉक्टरों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास कम होता जा रहा है। यह जानकारी भाजपा के राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मंगलवार को सदन में दी।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में मरीजों के परिजनों द्वारा मारपीट, तोड़-फोड़ और चिकित्सकों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। यह समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मेरठ जैसे शहरों सहित छोटे कस्बों और नर्सिंग होम्स तक भी फैल चुकी है। कई बार मरीज के परिजनों के असंतोष के कारण चिकित्सकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है, जिससे इलाज की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि यदि हम दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2021 से 2025 के बीच ऐसी 149 घटनाएं सामने आई हैं। यह संख्या चिंताजनक रही है। 2024 में 49 और 2025 में 48 ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं।हमारे देश में चिकित्सक को भगवान का रूप माना जाता है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी हमारे समाज के सच्चे योद्धा हैं, जो दिन-रात लोगों की जान बचाने में लगे रहते हैं। लेकिन, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले कुछ वर्षों में कटुता और अविश्वास के कारण डॉक्टरों और मरीजों के बीच तनाव बढ़ा है और अस्पतालों में हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

भाजपा के राज्यसभा सांसद ने इसे एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय बताते कहा कि वह सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं। ऐसी घटनाएं डॉक्टर और मरीज के बीच के विश्वास को कमजोर करती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के पूरे वातावरण को असुरक्षित बना देती हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों यानी सभी के हितों की रक्षा की जाए।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्य स्तर पर सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अपील समिति गठित की जाए। जिला स्तर पर जिला जज की अध्यक्षता में ‘डॉक्टर-मरीज सुरक्षा समन्वय समिति’ का गठन किया जाए। यहां आने वाले सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है ताकि डॉक्टर निर्भय होकर अपने पवित्र कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और मरीजों एवं उनके परिवारों को भी समय पर न्याय मिल सके।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसके

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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