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जिन्हें पित्त की होती है शिकायत, उन्हें ये चीजें खानी चाहिए

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। पित्त प्रकृति वाले लोग अक्सर अपने शरीर में गर्मी ज्यादा महसूस करते हैं, जल्दी गुस्सा हो जाते हैं और पसीना भी जल्दी आ जाता है। इसलिए इनके लिए सही खानपान और लाइफस्टाइल को फॉलो करना बहुत जरूरी होता है।

सबसे पहले अनाज की बात करें तो जौ, चावल और गेहूं जैसे हल्के और पोषक अनाज उनके लिए अच्छे होते हैं। ये शरीर को ताकत भी देते हैं और गर्मी कम करने में मदद करते हैं। वहीं उड़द दाल, कुलथी जैसी भारी या गर्मी पैदा करने वाली दालों से दूर रहना चाहिए।

फल खाने में पित्त प्रकृति वाले लोगों को मीठे और हल्के फलों पर ध्यान देना चाहिए। सेब, नाशपाती, अंजीर, किशमिश और आंवला अच्छे विकल्प हैं। ये ठंडक देते हैं और शरीर को राहत पहुंचाते हैं। करौंदा और ज्यादा तीखे या खट्टे फलों से बचना चाहिए, लेकिन अनार और आंवला थोड़ी मात्रा में खा सकते हैं।

सब्जियों में मीठे और कड़वे स्वाद वाली सब्जियां पित्त को संतुलित करती हैं। खीरा, करेला, मटर, परवल और शतावरी जैसी सब्जियां खाने से शरीर ठंडा रहता है। दूसरी ओर बैंगन, प्याज, लहसुन, गाजर और पालक जैसी गर्मी पैदा करने वाली या तीखी सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए।

मसालों का भी असर पित्त पर पड़ता है। हल्दी, सौंफ, धनिया, केसर और इलायची जैसी हल्की और ठंडक देने वाली चीजें फायदेमंद हैं। वहीं हींग, काली मिर्च और ज्यादा तीखे मसाले पित्त को बढ़ा सकते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स पित्त प्रकृति वालों के लिए बहुत अच्छे हैं। दूध, घी और छाछ ठंडक देते हैं और शरीर को संतुलित रखते हैं। वहीं मांस, खासकर पानी में रहने वाले जीवों का खाना पित्त को बढ़ा सकता है, इसलिए उससे बचना चाहिए। प्राकृतिक मिठास वाली चीजें जैसे गन्ना और कुछ सूखी जड़ी-बूटियां शरीर को संतुलन में रखने में मदद करती हैं।

इसके अलावा जीवनशैली में भी बदलाव करना जरूरी है। पित्त प्रकृति वाले लोग ज्यादा धूप में नहीं रहना चाहिए। खुले पानी के पास समय बिताना, संगीत सुनना और घर में फाउंटेन या पानी की आवाज वाली चीजें रखना आरामदायक होता है। इससे मन शांत रहता है और शरीर की गर्मी भी कम होती है।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बढ़ती तेल की कीमतों का इंडिगो के मुनाफे पर होगा असर, छोटी बुकिंग साइकिल से लागत पास करने में मिलेगी मदद : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण बजट एयरलाइन इंडिगो के मुनाफे पर नजदीकी अवधि में दबाव देखने को मिल सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

मूडीज रेटिंग्स ने रिपोर्ट में कहा कि छोटी अवधि में ऊंची तेल की कीमतों से मार्जिन पर दबाव देखने को मिलेगा। हालांकि, टिकट बुकिंग साइकिल 30-45 दिन की होने के चलते समय के साथ बढ़ी हुई लागत पास करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट में कहा गया कि इंडिगो ईंधन की कीमतों को हेज नहीं करती है, जिससे वह अचानक से ईंधन की कीमत में आई तेजी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है।

हालिया तनाव 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद बढ़ा है, जिसने पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई यात्रा को बाधित कर दिया है, कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतों को बढ़ा दिया है, और हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण एयरलाइंस को लंबे मार्ग अपनाने के लिए मजबूर किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर एयरलाइनों के मुनाफे पर पड़ेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, लेबर के बाद ईंधन एयरलाइंस का दूसरा सबसे बड़ा खर्च है।

संघर्ष के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जो 2025 के औसत से लगभग 45 प्रतिशत अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी गल्फ कोस्ट रीजन में जेट ईंधन की कीमतें बढ़कर 3.50 डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गईं, जो पिछले वर्ष के औसत स्तर से लगभग 65 प्रतिशत अधिक है।

हालांकि एयरलाइन की पश्चिम एशियाई मार्गों पर उड़ानें हैं - जो इसके राजस्व का लगभग 18-20 प्रतिशत हिस्सा हैं - भारत के घरेलू बाजार में इसकी मजबूत स्थिति इसे कुछ हद तक राहत प्रदान करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन की घरेलू विमानन बाजार में लगभग 64 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका लगभग तीन-चौथाई राजस्व घरेलू परिचालन से प्राप्त होता है।

मूडीज ने बताया कि इंडिगो ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के बीच वैकल्पिक उड़ान मार्गों का उपयोग करके कुछ यूरोपीय मार्गों पर उड़ानें फिर से शुरू करने का प्रयास किया है, हालांकि अभी तक उसे सीमित सफलता ही मिली है।

मध्यम अवधि में, यदि व्यवधान जारी रहते हैं तो एयरलाइन के पास घरेलू मार्गों पर विमानों को फिर से तैनात करने या दक्षिण पूर्व एशिया में परिचालन का विस्तार करने की लचीलता बनी हुई है।

हालांकि, मूडीज ने चेतावनी दी है कि इंडिगो को ईंधन की बढ़ती लागत, मार्गों में बदलाव के कारण उड़ान की अवधि में वृद्धि और रुपए के कमजोर होने से उत्पन्न विदेशी मुद्रा अस्थिरता का सामना करना जारी रहेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जेट ईंधन की कीमतों में प्रत्येक 1 डॉलर की वृद्धि से इसके मासिक ईंधन खर्च में लगभग 20-25 करोड़ रुपए की वृद्धि होती है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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