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बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है... भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी नोबेल पुरस्कार 2 बार फील्ड्स मेडल 1 बार ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार स्पेलिंग बी विजेता 82% पेटेंट में हिस्सेदारी 10% कंप्यूटर पेटेंट 11% वैज्ञानिक शोध पत्र 13% फोर्ब्स 30 अंडर 30 11% (स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा - टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर - 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। - हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य। - अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। तकनीक - एआई की नींव रखने में भी अहम भूमिका जेनरेटिव एआई की नींव रखने वाला 2017 का शोध पत्र गूगल के आठ इंजीनियरों द्वारा लिखा गया था, जिनमें से दो भारतीय मूल के थे। इस शोध को लार्ज मॉडल्स की आधारशिला मानते हैं यानी आज जो चैटजीपीटी आदि चल रहे हैं, वे सब इसी पेपर की देन हैं यानी एआई की नींव रखने में भी बड़ा योगदान। सेहत - अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ - 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। - 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। - हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। - भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। - भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। - सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता।

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थोक महंगाई 12 महीने में सबसे ज्यादा:फरवरी में ये 2.13% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें और रोजाना जरूरत का सामान महंगा हुआ

फरवरी में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई है। ये महंगाई का 12 महीने का हाई लेवल है। फरवरी 2025 में ये 2.38% पर पहुंच गई थी। इससे पहले जनवरी 2026 में थोक महंगाई 1.81% पर थी। वहीं दिसंबर में थोक महंगाई 0.83% पर थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 16 मार्च को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी। रोजाना जरूरत के सामान, खाने-पीने की चीजें महंगी हुईं होलसेल महंगाई के 4 हिस्से प्राइमरी आर्टिकल, जिसका वेटेज 22.62% है। फ्यूल एंड पावर का वेटेज 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट का वेटेज सबसे ज्यादा 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल के भी चार हिस्से हैं। फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंची फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई है। इससे पहले जनवरी में यह 2.74% थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। महंगाई कैसे मापी जाती है? भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। महंगाई मापने के लिए अलग-अलग आइटम्स को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 22.62% और फ्यूल एंड पावर 13.15% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07% और फ्यूल सहित अन्य आइटम्स की भी भागीदारी होती है।

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  Sports

चेन्नई का सबसे बड़ा दांव! Ravindra Jadeja बाहर, Sanju Samson की एंट्री से नए युग की शुरुआत

चेन्नई में क्रिकेट का जुनून किसी उत्सव से कम नहीं माना जाता है। आईपीएल के आगामी सत्र से पहले चेन्नई की टीम में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे शहर और प्रशंसकों के बीच नई उम्मीद पैदा हो गई है।

गौरतलब है कि लंबे समय से टीम की पहचान रहे महेंद्र सिंह धोनी अब अपने करियर के अंतिम चरण में माने जा रहे हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई पीढ़ी को आगे लाने की तैयारी करता दिखाई दे रहा है।

इसी क्रम में संजू सैमसन के टीम से जुड़ने को काफी अहम माना जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार सैमसन को पिछले वर्ष हुए प्लेयर एक्सचेंज के दौरान टीम में शामिल किया गया था। इसके बदले टीम को अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से अलग होना पड़ा था।

गौरतलब है कि इस फैसले को उस समय बड़ा कदम माना गया था क्योंकि इसके साथ ही इंग्लैंड के खिलाड़ी सैम करन को भी टीम से बाहर करना पड़ा था। हालांकि टीम प्रबंधन का मानना था कि सैमसन जैसे खिलाड़ी भविष्य में टीम की नई पहचान बन सकते हैं।

संजू सैमसन हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार हाल ही में खेले गए बीस ओवर विश्व कप में उन्होंने लगातार तीन अहम मुकाबलों में मैच जिताने वाली पारियां खेलीं, जिससे उनकी क्षमता पर चल रही बहस काफी हद तक खत्म हो गई है।

चेन्नई टीम की नई बल्लेबाजी पंक्ति में ऋतुराज गायकवाड़ और संजू सैमसन की जोड़ी को काफी मजबूत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोड़ी टीम को आक्रामक शुरुआत देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

गौरतलब है कि पिछले सत्र में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था और शुरुआती रणनीति के कारण टीम अंक तालिका में पीछे रह गई थी। इसके बाद प्रबंधन ने बीच सत्र में ही कई बदलाव किए और नई प्रतिभाओं को मौका दिया था।

मौजूद जानकारी के अनुसार युवा खिलाड़ियों को शामिल करने की रणनीति इस बार भी जारी रखी गई है। गुजरात के आक्रामक बल्लेबाज उर्विल पटेल, भारत के उन्नीस वर्ष से कम आयु वर्ग के कप्तान आयुष म्हात्रे और दक्षिण अफ्रीका के युवा बल्लेबाज डेवाल्ड ब्रेविस को टीम में शामिल किया गया है।

नीलामी के दौरान भी टीम ने कई युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है। प्रबंधन ने प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा जैसे उभरते खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया है। बताया जा रहा है कि प्रशांत वीर ने घरेलू प्रतियोगिताओं में अपने आक्रामक बल्लेबाजी और उपयोगी बाएं हाथ की गेंदबाजी से काफी प्रभाव छोड़ा है।

गौरतलब है कि इन युवा खिलाड़ियों के आने से टीम की औसत आयु में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि टीम अब अधिक तेज और आक्रामक शैली अपनाने की तैयारी कर रही है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लेबाजी पर ज्यादा जोर देने के कारण टीम का स्पिन गेंदबाजी विभाग थोड़ा कमजोर दिखाई दे सकता है। इस स्थिति में तेज गेंदबाजों को अधिक जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है।
 
मौजूदा योजना के अनुसार टीम का पहला मुकाबला तीस मार्च को राजस्थान के खिलाफ खेला जाएगा। इसी मुकाबले के बाद यह साफ हो पाएगा कि नई रणनीति और नए खिलाड़ियों के साथ टीम किस दिशा में आगे बढ़ती है।
Mon, 16 Mar 2026 21:42:02 +0530

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