Madhya Pradesh Digital Village | डिजिटल क्रांति का नया अध्याय! गुना के उमरी में खुला देश का पहला 'फिजिटल' सेवा केंद्र, Jyotiraditya Scindia ने किया शुभारंभ
मध्य प्रदेश का गुना जिला अब केवल अपनी राजनीतिक पहचान के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार के लिए भी जाना जाएगा। रविवार को केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिले के उमरी गांव में देश के पहले एकीकृत 'फिजिटल' (फिजिकल + डिजिटल) सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र 'समृद्ध ग्राम फिजिकल सर्विसेज पायलट पहल' के तहत शुरू किया गया है।
एक आधिकारिक बयान में रविवार को कहा गया कि केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दूरसंचार विभाग की ‘समृद्ध ग्राम फिजिकल सर्विसेज पायलट पहल’ के तहत इस केंद्र का शुभारंभ किया। उद्घाटन के अवसर पर सिंधिया ने कहा, ‘‘समृद्ध ग्राम पहल की शुरुआत के साथ हम दुनिया को अपने उमरी में ला रहे हैं। शिक्षा और कृषि से लेकर स्वास्थ्य देखभाल और सरकारी सेवाओं तक, तकनीक हमारे लोगों के हाथों में सीधे नए अवसर दे रही है।’’
यह पहल भारतनेट परियोजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में उपलब्ध संपर्क का लाभ उठाती है। ‘समृद्धि केंद्र’ की परिकल्पना एक एकल-खिड़की वाली ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में की गई है, जो एक ही स्थान पर स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, वित्तीय सेवाएं, ई-गवेंस सहायता और डिजिटल संपर्क सेवाएं देती है। सिंधिया ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से किसान डिजिटल उपकरणों के जरिये मिट्टी की नमी, पोषक तत्वों और फसल के स्वास्थ्य के बारे में वास्तविक समय में जानकारी पा सकेंगे, जिससे कृषि स्मार्ट और अधिक उत्पादक बनेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में मंत्री ने कहा, ‘‘उमरी के प्रत्येक नागरिक को दिल्ली और अन्य राज्यों के चिकित्सकों के साथ टेली-परामर्श और डायग्नोस्टिक्स सेवाएं मिलेंगी। रक्त परीक्षण की रिपोर्ट 30 मिनट से भी कम समय में तैयार हो जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र से लेकर ई-बैंकिंग तक की जरूरी सरकारी सेवाएं अब समृद्ध ग्राम के भीतर ही उपलब्ध होंगी।
Delhi HC on Frozen Embryo: दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा 'फ्रोजन एम्ब्रियो' का मामला, पति-पत्नी के बीच 16 भ्रूणों के लिए कानूनी जंग
Delhi High Court On Frozen Embryo: मुंबई की एक 46 वर्षीय महिला का संवेदनशील मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि अपने पति से अलग रह रही महिला ने जमे हुए 16 संरक्षित भ्रूणों (फ्रोजन एम्ब्रियो) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
महिला भ्रूण का इस्तेमाल करके मां बनना चाहती है, लेकिन महिला के पति ने इन भ्रूणों के इस्तेमाल करने से मना कर दिया है, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इससे पहले राष्ट्रीय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) और सरोगेसी बोर्ड ने महिला की अपील को खारिज कर दिया था।
जानकारी के मुताबिक, महिला पहले इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट भी गई थी, लेकिन सितंबर 2025 में उसने अपनी याचिका वापस ले ली थी। ताकि वह दिल्ली में संबंधित बोर्ड से अपील कर सके। महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी अपील को सही तरह से सुने बिना ही खारिज कर दिया गया। जिसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
शादी के 1 साल बाद भ्रूणों को करवाया था फ्रीज
पूरा मामला साल 2022 का बताया जा रहा है। मुंबई के रहने वाले इस कपल ने शादी के 1 साल बाद एक फर्टिलिटी क्लिनिक में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु से बने भ्रूणों को फ्रीज करवा दिया था। लेकिन शादी के 1 साल बाद दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए। जिसके बाद से वे अलग रहने लगे थे, लेकिन दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है।
महिला ने अदालत से क्या कहा है ?
महिला ने डिमांड की है कि इन भ्रूणों को किसी दूसरे फर्टिलिटी क्लिनिक में ट्रांसफर किया जाए, ताकि वे बाद में वह मां बन सके। लेकिन ART कानून के तहत महिला के पति ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी, क्योंकि इस तरह के ट्रांसफर के लिए दोनों पति-पत्नी की सहमति होना जरूरी है।
महिला ने याचिका के माध्यम से कहा है कि उसने ART एक्ट की धारा 29 के तहत भ्रूणों को ट्रांसफर करने की परमिशन मांगी है, और अदालत से अनुरोध किया है कि पति की सहमति के बिना ही इसकी परमिशन दे दी जाए। महिला का कहना है कि उसका अपने पति से संबंध टूट चुका है, जिसकी वजह से उसका पति हामी नहीं भर रहा है।
मां बनने का अधिकार छीना जा रहा- पीड़िता
महिला ने याचिका में यह भी कहा है कि उसके पति के व्यवहार के कारण उससे मां बनने का अधिकार छिना जा रहा है। महिला का आरोप है कि उसका पति उसे प्रताड़ित करता था, बाद में उसे छोड़ दिया। महिला ने यह भी कहा है कि एक तरफ वो एक ऐसी शादीशुदा महिला ने, जिसके पति ने उसे छोड़ दिया है।
वहीं दूसरी तरफ उसके अपने संरक्षित भ्रूणों का इस्तेमाल करने नहीं दिया जा रहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सहायक प्रजनन तकनीक (IVF) का इस्तेमाल केवल वैवाहिक संबंध के रहते हुए ही संभव माना जाता है. ऐसे में तलाक होने के यह प्रक्रिया संभव नहीं है।
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