पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य सरकार ने पुजारियों (पुरोहितों) और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय (Honorarium) में 500 रुपये की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। यह फैसला राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ ही समय पहले आया है। यह घोषणा आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के लागू होने से पहले की गई, जो चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही प्रभावी हो जाती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाला चुनाव आयोग, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी भी शामिल हैं, आज शाम 4 बजे नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले बहुप्रतीक्षित विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करेगा।
X (पहले ट्विटर) पर ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार ने पुजारियों (पुरोहितों) और मुअज़्ज़िनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
तृणमूल सुप्रीमो ने अपनी पोस्ट में कहा, "मुझे अपने पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है।"
इस संशोधन के साथ, दोनों समूहों के लिए मासिक भुगतान बढ़कर 2,000 रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मानदेय के लिए पुजारियों और मुअज़्ज़िनों द्वारा जमा किए गए सभी नए आवेदनों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा, "साथ ही, पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों द्वारा विधिवत जमा किए गए सभी नए आवेदनों को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।"
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कदम समाज में धार्मिक पदाधिकारियों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका को मान्यता देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने लिखा, "हमें ऐसे माहौल को बढ़ावा देने पर गर्व है जहाँ हर समुदाय और हर परंपरा को महत्व दिया जाता है और उसे मजबूती प्रदान की जाती है," और साथ ही यह भी जोड़ा कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा करने वालों को उचित मान्यता और समर्थन मिले।
यह घोषणा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की उम्मीद से कुछ ही समय पहले की गई थी; इसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जो सरकारों को मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नई नीतिगत घोषणाएं या वित्तीय प्रतिबद्धताएं करने से प्रतिबंधित कर देगी।
इसलिए, मानदेय में बढ़ोतरी और नए आवेदनों की मंजूरी चुनाव आचार संहिता के लागू होने से ठीक पहले की गई है।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना यह पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने कांशीराम जी को सामाजिक न्याय का महान योद्धा और करोड़ों लोगों को हक और आत्मसम्मान की राह दिखाने वाला मार्गदर्शक बताया।
जयंती के अवसर पर रखा प्रस्ताव
राहुल गांधी ने यह पत्र कांशीराम जी की जयंती के मौके पर लिखा है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरा देश उनके योगदान और विरासत को याद कर रहा है, तो उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजना एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गांधी ने पत्र में उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस अनुरोध पर विचार करेंगे, क्योंकि यह मांग समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा सालों से की जा रही है।
दलित राजनीति को दी नई दिशा
अपने पत्र में राहुल गांधी ने कांशीराम जी के कार्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा कि कांशीराम जी ने हाशिए पर पड़े समुदायों को एकजुट कर भारतीय राजनीति का स्वरूप ही बदल दिया। उन्होंने गरीबों और पिछड़ों के मन में यह विश्वास जगाया कि उनका वोट और उनकी आवाज देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके प्रयासों की वजह से ही समाज के उन वर्गों के लोग राजनीति में आए, जिन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन में आने के बारे में सोचा भी नहीं था।
संवैधानिक आदर्शों का सम्मान
कांग्रेस नेता ने इस बात पर भी जोर दिया कि कांशीराम जी ने हमेशा संवैधानिक मूल्यों और समानता के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि उन्हें 'भारत रत्न' देना उस पूरे आंदोलन का सम्मान होगा, जिसने बहुजन समाज को अपनी ताकत और अधिकारों का अहसास कराया। राहुल गांधी के अनुसार, कांशीराम जी ने राजनीति को न्याय हासिल करने का एक सशक्त माध्यम बनाया।
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