Women Sleep Problems: पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को क्यों होती है नींद की समस्या? जानें कैसे हार्मोन और तनाव डालते हैं असर
Women Sleep Problems: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर महिलाओं में खराब नींद की समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखने को मिल रही है. डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण होते हैं. महिलाएं अक्सर घर और काम दोनों की जिम्मेदारियां संभालती हैं. ऐसे में तनाव, थकान और हार्मोनल बदलाव उनकी नींद पर सीधा असर डालते हैं. अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है.
हार्मोनल बदलाव का पड़ता है असर
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज के अनुसार महिलाओं के शरीर में जीवन के अलग-अलग चरणों में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं. मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज जैसे समय में हार्मोन का स्तर बदलता रहता है. इन बदलावों के कारण कई महिलाओं को रात में अच्छी नींद नहीं आती. कुछ को देर तक नींद नहीं आती, जबकि कुछ महिलाएं रात में बार-बार जाग जाती हैं. कई बार बेचैनी और थकान भी महसूस होती है.
मासिक धर्म से पहले भी हो सकती है समस्या
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज कहती है कि पीरियड्स से पहले होने वाले हार्मोनल बदलाव भी नींद को प्रभावित कर सकते हैं. इस समय कई महिलाओं को मूड स्विंग, थकान और शरीर में असहजता महसूस होती है. इन कारणों से रात में आरामदायक नींद लेना मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान नींद की समस्या ज्यादा महसूस होती है.
गर्भावस्था में बढ़ सकती है परेशानी
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. हार्मोन का स्तर बदलने के साथ-साथ शारीरिक असुविधा भी बढ़ सकती है. इसके कारण गर्भवती महिलाओं को अच्छी नींद लेने में परेशानी हो सकती है. वहीं मेनोपॉज के समय भी महिलाओं में नींद की समस्या आम हो जाती है. इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन कम होने लगते हैं. इससे रात में पसीना आना, बेचैनी या बार-बार नींद टूटने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
मानसिक तनाव भी है बड़ा कारण
हार्मोनल बदलाव के अलावा मानसिक तनाव भी महिलाओं की नींद पर असर डालता है. आज के समय में कई महिलाएं नौकरी और परिवार दोनों की जिम्मेदारी निभा रही हैं. काम का दबाव, घर की जिम्मेदारियां और भावनात्मक तनाव उनके दिमाग को लगातार व्यस्त रखते हैं. जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन यानी कोर्टिसोल बढ़ जाता है. यह हार्मोन नींद की प्रक्रिया पर असर डालता है और व्यक्ति को देर से नींद आने लगती है.
क्या कहते हैं डॉक्टर?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद के लिए महिलाओं को अपनी दिनचर्या संतुलित रखना जरूरी है. रोजाना एक समय पर सोना और जागना बेहतर माना जाता है. सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए. इसके अलावा कैफीन वाली चीजों का सेवन कम करना भी फायदेमंद हो सकता है. योग, ध्यान और हल्की एक्सरसाइज तनाव को कम करने में मदद करती हैं. इससे नींद की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है.
समस्या को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का मानना है कि अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है. अगर किसी महिला को लंबे समय तक नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूटती है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. सही समय पर इलाज कराने से समस्या के कारण को समझा जा सकता है और उसका सही समाधान भी मिल सकता है.
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