Video: किताबों में पढ़ा 'लिज्जत' का किस्सा, खड़ा कर दिया खुद का पापड़ साम्राज्य! बदला 12 महिलाओं का भाग्य
Success Story: सफलता अक्सर प्रेरणा की मोहताज होती है. बेगूसराय की 12 जीविका दीदियों ने इसे सच कर दिखाया है. मशहूर 'लिज्जत पापड़' की कहानी से प्रेरित होकर सदर प्रखंड की इन महिलाओं ने अपना खुद का पापड़ उद्योग शुरू किया. जो आज जिले की पहचान बन चुका है. महज एक संकल्प से शुरू हुआ यह सफर आज 40 किलो प्रतिदिन की बिक्री तक पहुंच गया है. ममता देवी और रोशन देवी के नेतृत्व में यह समूह मूंग और उड़द दाल की सफाई से लेकर प्रोसेसिंग तक का काम खुद संभालता है. खास बात यह है कि यूनिट को सोलर एनर्जी से जोड़कर दीदियों ने बिजली का खर्च घटाया और अपनी बचत बढ़ा ली है. आज इन दीदियों के पापड़ की मांग सरकारी दफ्तरों की कैंटीन से लेकर शादियों और स्थानीय बाजारों तक है. रोजाना 5 से 6 हजार रुपये की सेल के साथ, समूह की प्रत्येक महिला हर महीने 10 हजार रुपये से अधिक की शुद्ध कमाई कर रही है. यह कहानी साबित करती है कि अगर सामूहिक शक्ति और सही तकनीक (सोलर) का मेल हो, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिख सकती हैं.
दांत-मसूड़ों से लेकर जोड़ों के दर्द तक रामबाण 'बबूल', आदिवासियों का पसंदीदा व्यंजन भी
Sidhi News: डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 से कहा कि बबूल दांतों और मसूड़ों के लिए भी बहुत फायदेमंद है. अगर नियमित रूप से बबूल की दातुन या इसकी फली का उपयोग किया जाए, तो दांत मजबूत होते हैं और मसूड़ों की सूजन और खून आना जैसी दिक्कतें दूर हो सकती हैं.
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