हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी आती है। आज यानी के 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है और माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भी बनीं रहती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पाप मोचनी एकादशी के कहा जाता है और इसके नाम से ही पता चल रहा है कि यह सारे पापों को हरने वाली उनका नष्ट करने वाली एकादशी है। ब्रह्मांड पुराण में भी लिखा है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से इस व्रत को रखता है और श्री विष्णु जी का पूजन माता लक्ष्मी समेत करता है उस व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
पापमोचनी एकादशी का व्रत रखें और इस दिन खास तरह की कथा को जरुर पढ़ें, ताकि आपके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाएगी। आइए आपको पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा बताते हैं।
पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा
प्राचीन काल की कथा है कि च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी वन में कठिन तपस्या कर रहे थे। उनकी तपस्या की शक्ति से देवराज इंद्र भयभीत हो गए और उन्होंने तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नामक अप्सरा को भेजा। मंजुघोषा ने अपनी सुंदरता और नृत्य से मेधावी मुनि को मोहित कर लिया। काम के वशीभूत होकर मेधावी मुनि अपनी तपस्या की मर्यादा भूल गए और उस अप्सरा के साथ कई वर्षों तक भोग-विलास में मग्न रहे। जब वर्षों बाद उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्हें पता चला कि उनकी तपस्या नष्ट हो चुकी है, तो उन्हें स्वयं पर बहुत पश्चाताप हुआ। उन्होंने क्रोध में आकर मंजुघोषा को 'पिशाचनी' बनने का श्राप दे दिया।
मंजुघोषा भयभीत होकर मुनि के चरणों में गिर पड़ी और क्षमा याचना करने लगी। तब मुनि ने दया भाव दिखाते हुए उसे उद्धार का मार्ग बताया। मेधावी मुनि ने कहा हे अप्सरा, यदि तुम चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का विधि-विधान से व्रत करोगी, तो तुम्हारे समस्त पापों का नाश हो जाएगा और तुम पुनः अपने दिव्य रूप को प्राप्त करोगी। केवल मंजुघोषा ही नहीं, मेधावी मुनि स्वयं भी अपने पिता च्यवन ऋषि के पास गए और अपने पाप का प्रायश्चित पूछा। पिता ने उन्हें भी इसी 'पापमोचनी एकादशी' का व्रत रखने की सलाह दी। मुनि मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा, दोनों ने पूरी श्रद्धा से इस व्रत का पालन किया। परिणाम स्वरूप, अप्सरा पिशाच योनि से मुक्त होकर स्वर्ग चली गई और मेधावी मुनि का तेज वापस लौट आया और वे पापमुक्त हो गए।
कैसे पूजा करें और कथा का पाठ
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद व्रत कथा से इस कहानी को पढ़ें और मन में विश्वास रखें कि भगवान आपके ऊपर आशीर्वाद बनाए रखें।
- किसी जरुरतमंद व्यक्ति को अन्न और पीले वस्त्र का दान करें।
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एनिशपुरी गोस्वामी- मोहला। छत्तीसगढ़ के मोहला के ग्राम पंचायत में वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के लिए शासन स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मोहला जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव जीएसटी बिल का धंधा कर रहे बिचौलियों के साथ मिलकर गांव के विकास के लिए शासन स्तर पर विभिन्न मदों के भेजे गए रकम का बंटाधार कर रहे हैं। गांव के आम ग्रामीणों को पता ही नहीं कि उनके सरपंच और सचिव किराना दुकान, गल्ला व्यापारी, कृषि बीज भंडार, बुक डिपो तथा जिनका दुकान नहीं वहां से लाखों रुपए का रेत, सीमेंट और छड़ खरीदी का बिल लगाकर आवंटित शासकीय राशि हड़प लिए है।
उल्लेखनीय है कि, मोहला जनपद पंचायत के अधीन आने वाले ग्राम पंचायतो मे गांव के विकास के लिए आने वाले विभिन्न मदो की राशि हड़पने की लूट मची हुई है। यहां स्टेशनरी, मटेरियल, फोटो कॉपी, प्रिंट ऑउट के साथ ही गली लाइट, बोर रिपेयरिंग के नाम पर कीमत से ज्यादा के बिल बाउचर लगाकर शासकीय राशि का बंटाधार किया जा रहा है। ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच मिलकर जिनकी दुकान नहीं उनका जीएसटी बिल, किराना दुकान, गल्ला व्यापारी, कृषि बीज भंडार, बुक डिपो से लोहा, सीमेंट, छड़, गिट्टी, रेत आदि मटेरियल खरीदी के नाम पर कीमत से अधिक लेजर में भुगतान दिखा रहे हैं। मोहला जनपद क्षेत्र के बेहद संख्या में ग्राम पंचायतों का फर्जी बिल पे भुगतान होने का सनसनीखेज मामला हरिभूमि के पड़ताल में सामने आया है।
गल्ला दुकान से रेत, लोहा, गिट्टी के बिल मोहला जनपद के अधीन ग्राम पंचायत में सरकारी राशि का किस तरह बंदरबांट किया जा रहा है, इसका जीवंत उदाहरण ग्राम पंचायत कंदाडी है। यहां सरपंच पति के द्वारा रबिया बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर एंड हार्डवेयर मोहला से रेत, गिट्टी, सीमेंट के नाम पर जीएसटी बिल मे 20 जुलाई 2025 के डेट पर 49800 का एक बिल लगाया गया है। बिल क्रमांक 345 के एक बिल से सरपंच सचिव ने चार- चार बार कुल 199200 का राशि आहरण कर लिये गए हैं। जबकि, जीएसटी बिल धारक का उल्लेखित अटल व्यावसायिक परिसर मोहला में बिल्डिंग सप्लायर एंड हार्डवेयर का कोई भी दुकान नहीं है। वह गल्ला व्यापारी है जो ग्राम पंचायतों से कमीशन लेकर फर्जी जीएसटी बिल काट के देता है।
मोहला में चल रहा जीएसटी बिल का धंधा यहां कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, दंडाधिकारी, जनपद सीईओ से लेकर तमाम प्रशासनिक अधिकारियों का मुख्यालय में सीधा प्रभाव है। बावजूद इसके ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव सरकारी धनराशि को हड़पने लूट मचाए हुए हैं। ग्राम पंचायत में विकास कार्यो के भुगतान के लिए जीएसटी नंबर होना अनिवार्य है। इधर 15 वें वित्त आयोग तथा मूलभूत की राशि को हड़पने सरपच सचिव ने एक अलग ही रास्ता अख्तियार कर लिए हैं। रेत, गिट्टी, ईंट, सरिया, सीमेंट सहित फोटो काफी, प्रिंट आउट, गली लाइन, बोर रिपेयरिंग के नाम पर पंचायतो में गल्ला व्यापारी, किराना दुकान, कृषि बीज भंडार, बुक डिपो से रा मटेरियल का बिलो मे अहरण के साथ-साथ जिनका दुकान नहीं जीएसटी बिल का धंधा कर रहे हैं।
विकास के नाम पर नक्सली होते रहे बदनाम बीते 40 सालों से इस वाछिद आदिवासी अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में ग्राम पंचायतों के विकास के लिए बाधक के रूप में नक्सली संगठन को पूरा सिस्टम ठहराते रहा है। जिले में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है, इधर पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधि जनपद पंचायत मोहला के भ्रष्ट अधिकारियों से मिलकर अब खुलेआम सरकारी धनराशि का दुरुपयोग कर पंचायत से लाखों रुपए का हेरा फेरी करनें का काफी संख्या में पंचायतो का मामला सामने आया है।
मामले की जांच कर करेंगे कार्रवाई- सीईओ मोहला जनपद पंचायत की सीईओ प्रांजल प्रजापति ने कहा कि, इस पूरे मामले की जांच करते हुए फर्जी बिलों के पड़ताल के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।