माता यशोदा और बाल कृष्ण की माखन चोरी: जब यशोदा मैया को मुख में दिखा पूरा ब्रह्मांड
Bal Krishna and Yashoda story: पौराणिक मान्यताओं और श्रीमद्भागवत कथा के अनुसार, गोपरूप में जन्मे भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही अत्यंत नटखट थे। वे अपने सखाओं (ग्वाल-बालों) के साथ मिलकर गोकुल की गोपियों के घरों में जाकर माखन चोरी किया करते थे। कभी शिके पर रखा माखन चुराते तो कभी मटकी फोड़ देते। गोपियां अक्सर माता यशोदा के पास कान्हा की शिकायत लेकर पहुंचतीं, लेकिन मैया अपने लल्ला के निष्पाप और मोहक चेहरे को देखकर हर बार मुस्कुरा देतीं।
जब यशोदा मैया ने पकड़ा कान्हा का हाथ
एक दिन बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ आंगन में खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने मिट्टी उठाई और अपने मुंह में डाल ली। उनके सखाओं ने तुरंत जाकर माता यशोदा को खबर दी कि कान्हा ने मिट्टी खा ली है। माता यशोदा हाथ में छड़ी लेकर दौड़ती हुई आईं और कान्हा का हाथ पकड़कर डांटते हुए बोलीं, "रे नटखट! तूने मिट्टी क्यों खाई? क्या घर में माखन और मिश्री की कमी पड़ गई थी?"
बाल कृष्ण ने बड़ी मासूमियत से अपनी गोल-गोल आंखें नचाते हुए कहा, "नहीं मैया! मैंने मिट्टी नहीं खाई, ये सब झूठ बोल रहे हैं।"
मुख खुला तो दिखा संपूर्ण ब्रह्मांड
माता यशोदा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "अच्छा! अगर तूने मिट्टी नहीं खाई तो अपना मुंह खोलकर दिखा।"
अपने मैया की बात मानकर नन्हे बाल कृष्ण ने जैसे ही अपना छोटा सा मुख खोला, माता यशोदा स्तब्ध रह गईं। उन्होंने कान्हा के मुख के अंदर केवल मिट्टी नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन किया। उन्हें उस छोटे से मुख में अनगिनत तारे, सूर्य, चंद्रमा, दिशाएं, पर्वत, नदियां, समुद्र, सारे जीव-जंतु और स्वयं अपना गोकुल गांव तैरता हुआ दिखाई दिया।
यह देखकर माता यशोदा कांप गईं और सोचने लगीं कि क्या उनका लल्ला कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं साक्षात ईश्वर है?
लेकिन भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि यदि मैया को उनके ईश्वर रूप का ज्ञान हो गया, तो वात्सल्य और मां-बेटे के इस पावन प्रेम में दूरी आ जाएगी। इसलिए उन्होंने तुरंत अपनी योगमाया का प्रभाव फैलाया और माता यशोदा इस दिव्य दृश्य को भूल गईं। उन्हें फिर से यही याद रहा कि कान्हा उनका वही नटखट बालक है, और वे मुस्कुराकर कान्हा को सीने से लगा बैठीं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पौराणिक ग्रंथों और श्रीमद्भागवत पुराण की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक नैतिक और आध्यात्मिक संदेश पहुंचाना है।
राम भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी: 17 अगस्त को स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला, ऐसे होंगे दिव्य दर्शन
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में इस वर्ष सावन झूलनोत्सव को यादगार बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर योजना बना रहा है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, सावन शुक्ल पंचमी (17 अगस्त) को रामलला को गर्भगृह में विशेष रूप से तैयार किए गए स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु लगभग 20 फीट की दूरी से प्रभु के झूला दर्शन कर सकेंगे।
धर्म समिति तैयार कर रही है पूरी रूपरेखा
ट्रस्ट ने आयोजन की जिम्मेदारी धर्म समिति को सौंपी है। समिति झूला दर्शन, भजन, कजरी, सावन गीत, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर रही है। जल्द ही बैठक के बाद अंतिम कार्यक्रम को मंजूरी दी जाएगी।
ट्रस्ट पदाधिकारी लगातार कर रहे समीक्षा
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से ट्रस्टियों और संतों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने इस वर्ष के झूलनोत्सव को ऐतिहासिक बनाने का आह्वान किया। वहीं, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्णमोहन और ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास भी आयोजन से जुड़ी तैयारियों पर लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।
15 अगस्त से शुरू होगा सावन मेला
रामनगरी में पारंपरिक सावन मेला और झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त से मणि पर्वत पर होगी। इसके बाद पंचमी तिथि पर रामलला स्वर्ण झूले पर विराजेंगे। इस बार मुख्य मंदिर के साथ-साथ मंदिर परिसर के अन्य पूरक मंदिरों में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उत्सव विग्रह यात्रा पर भी विचार
ट्रस्ट इस बात पर भी विचार कर रहा है कि श्रीराम मंदिर के उत्सव विग्रह को मणि पर्वत की पारंपरिक यात्रा में शामिल किया जाए। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इस वर्ष का झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के लिए पहले से अधिक आकर्षक और ऐतिहासिक बन सकता है।
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