Vrat Falahar: सावन सोमवार व्रत के लिए बेस्ट हैं ये 5 फलाहार! बेहतरीन स्वाद के साथ मिलेगी भरपूर एनर्जी
Vrat Falahar Recipes: सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ संयम और सात्विक आहार का भी प्रतीक माना जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के दौरान शरीर को ऊर्जा, जरूरी पोषक तत्व और हाइड्रेशन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सही फलाहार का चुनाव न सिर्फ आपको कमजोरी और थकान से बचाता है, बल्कि पूरे दिन एक्टिव और तरोताजा बनाए रखने में भी मदद करता है।
अगर आप भी हर सावन सोमवार व्रत में एक ही तरह के फल और आलू खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार अपने व्रत की थाली में कुछ स्वादिष्ट और हेल्दी विकल्प शामिल करें। ये फलाहार स्वाद, सेहत और एनर्जी का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हैं, जिन्हें घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और पूरा परिवार भी पसंद करेगा।
सावन सोमवार व्रत के लिए 5 बेस्ट फलाहार
साबूदाना खिचड़ी
साबूदाना खिचड़ी व्रत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में गिनी जाती है। इसमें साबूदाना, मूंगफली, आलू, हरी मिर्च और सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है। वहीं मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट भी मिलता है। इसे दही के साथ खाने से स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।
मखाने की खीर
मखाने की खीर स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल है। दूध, मखाना, सूखे मेवे और थोड़े से गुड़ या शक्कर के साथ तैयार की गई यह डिश लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है। मखाना कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह व्रत के दौरान मीठा खाने की इच्छा भी पूरी करता है।
फल और दही की स्मूदी
अगर आप हल्का लेकिन पौष्टिक फलाहार चाहते हैं, तो मौसमी फलों और दही से बनी स्मूदी बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इसमें केला, सेब, अनार, पपीता या चीकू जैसे फल शामिल किए जा सकते हैं। यह शरीर को विटामिन, मिनरल्स और पर्याप्त हाइड्रेशन देने में मदद करती है तथा गर्मी और थकान से राहत दिला सकती है।
शकरकंद चाट
उबली हुई शकरकंद में सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस और थोड़ा सा भुना जीरा डालकर तैयार की गई चाट स्वादिष्ट होने के साथ काफी हेल्दी भी होती है। शकरकंद में फाइबर, विटामिन ए और जटिल कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं, जो धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते।
सिंघाड़े के आटे का चीला
व्रत में सिंघाड़े के आटे से बना चीला भी शानदार विकल्प है। इसमें उबला आलू, हरी मिर्च, धनिया और सेंधा नमक मिलाकर स्वाद बढ़ाया जा सकता है। इसे दही या व्रत वाली चटनी के साथ परोसें। यह पेट भरने वाला, स्वादिष्ट और ऊर्जा देने वाला फलाहार है, जिसे नाश्ते या शाम के समय खाया जा सकता है।
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी या नारियल पानी पीते रहें।
- अधिक तली-भुनी चीजों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
- मौसमी फल और दही को अपनी व्रत की थाली में जरूर शामिल करें।
- लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और जरूरत के अनुसार फलाहार लेते रहें।
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
Skin Care: बारिश में पसीना और ऑयली स्किन ने बढ़ा दी परेशानी? ये 5 फेस वॉश रखेंगे त्वचा को फ्रेश, ऑयल-फ्री और ग्लोइंग
Ghee Purity Test: दानेदार देखकर न करें भरोसा! इन आसान तरीकों से मिनटों में पहचानें देसी घी असली है या नकली
Multani Mitti Uses: सिर्फ फेस पैक नहीं, इन 6 तरीकों से करें मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल, चेहरे का ग्लो देख सब चौंक जाएंगे
भगवान कार्तिकेय को क्यों मिला छह सिर वाला रूप? जानिए षडानन बनने की पौराणिक कथा
Lord Kartikeya six heads story: शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, जब तारकासुर नामक असुर के अत्याचारों से तीनों लोक त्राहिमाम कर रहे थे, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ रहा था। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था कि तारकासुर का वध केवल भगवान शिव के तेज (पुत्र) द्वारा ही संभव है। इसके बाद देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव और माता पार्वती के तेज से छह दिव्य ऊर्जा पुंज प्रकट हुए, जिन्हें अग्निदेव ने गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया।
गंगा के तट पर सरकंडों के वन में छह अत्यंत सुंदर बालकों का जन्म हुआ। ये सभी बालक भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) के विभिन्न रूप थे। देवताओं के संकट को दूर करने के लिए भगवान शिव के इन अंशों ने देवताओं के सेनापति का पदभार संभाला और राक्षसों का संहार करने के लिए आगे आए।
जब छह माताओं ने एक साथ किया स्तनपान
जब वे छह बालक सरकंडों के वन में प्रकट हुए, तो उस समय वहां छह कृतिकाएं (नक्षत्रों की देवियां—अन्वा, अरुणभ्र, संभृति, कंजला, एकयष्टि और दिती) वहां पहुंचीं। उन सभी देवियों के मन में बालकों को देखते ही वात्सल्य उमड़ पड़ा। हर एक देवी चाहती थी कि वह उस बालक को अपना दूध पिलाए।
लेकिन बालक तो एक ही शक्ति के छह अलग-अलग रूप थे, और हर देवी उस सुंदर बालक को अपनी गोद में लेकर दुलारना चाहती थी। बालक कार्तिकेय समझ गए कि यदि उन्होंने किसी एक को चुना तो बाकी माताएं निराश हो जाएंगी।
षडानन बनने की पावन घटना
अपनी इसी दिव्य लीला के तहत, बाल रूप में ही भगवान कार्तिकेय ने अपने शरीर का विस्तार किया और उनके छह सिर (मुख) प्रकट हो गए। एक साथ छह मुख हो जाने के कारण वे सभी छह माताओं (कृतिकाओं) का स्तनपान एक ही समय पर करने लगे।
बालक के इस अद्भुत और चमत्कारी रूप को देखकर सभी देवियां अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने प्रेम से उन्हें अपने आंचल में समेट लिया। चूंकि उनके छह मुख थे, इसलिए उन्हें 'षडानन' (छह मुख वाले) कहा जाने लगा और कृतिकाओं द्वारा पाले जाने के कारण उनका एक नाम 'कार्तिकेय' भी प्रसिद्ध हुआ। आगे चलकर इन्हीं छह मुखों की मदद से उन्होंने अपनी सेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का वध कर देवताओं को उनका अधिकार दिलाया।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा स्कंद पुराण और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक सनातन धर्म की पावन कथाओं और उनके आध्यात्मिक अर्थों की जानकारी पहुंचाना है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi










