Sawan 2026: सावन में घूमने का है प्लान? मध्य प्रदेश के इन 7 प्रसिद्ध शिवालयों में करें दर्शन, हर धाम की अपनी अलग महिमा
Sawan 2026: सावन सिर्फ व्रत और पूजा का महीना नहीं, बल्कि भगवान शिव के दर्शन के लिए यात्रा करने का भी सबसे अच्छा समय माना जाता है। अगर इस बार आप भी किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां एक ही सफर में शिव भक्ति, खूबसूरत नजारे और इतिहास का अनुभव मिले, तो मध्य प्रदेश के ये 7 प्रसिद्ध शिवालय आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए।
1. महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन
अगर सावन में शिव दर्शन की बात हो और महाकाल का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। शिप्रा नदी के किनारे स्थित महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन में पूरा उज्जैन शिव भक्ति में डूबा नजर आता है, इसलिए इस मंदिर का अनुभव हर भक्त के लिए खास बन जाता है।
2. ओंकारेश्वर मंदिर, खंडवा
नर्मदा नदी के बीच बने मंधाता द्वीप पर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर भी भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता है कि यह द्वीप ऊपर से 'ॐ' के आकार जैसा दिखाई देता है। यहां बहती नर्मदा, चारों ओर की हरियाली और मंदिर का शांत माहौल मन को सुकून देता है।
3. भोजेश्वर मंदिर, भोजपुर
भोपाल के पास स्थित भोजेश्वर मंदिर अपने विशाल शिवलिंग की वजह से देशभर में जाना जाता है। माना जाता है कि इसका निर्माण राजा भोज ने करवाया था। मंदिर भले ही पूरा नहीं बन पाया, लेकिन इसकी पत्थरों पर की गई नक्काशी आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है।
4. पशुपतिनाथ मंदिर, मंदसौर
मंदसौर का पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव की आठ मुखों वाली दुर्लभ प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। ऐसी प्रतिमा बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलती है। सावन के महीने में यहां विशेष पूजा और जलाभिषेक होता है। मंदिर के आसपास का शांत माहौल यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अलग ही सुकून का एहसास कराता है।
5. मतंगेश्वर महादेव मंदिर, खजुराहो
खजुराहो अपने ऐतिहासिक मंदिरों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इन्हीं मंदिरों के बीच बना मतंगेश्वर महादेव मंदिर आज भी पूजा के लिए खुला रहता है। यहां का विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप इतिहास और आस्था, दोनों का अनुभव एक साथ करना चाहते हैं, तो यह मंदिर जरूर जाएं।
6. काकनमठ मंदिर, मुरैना
मुरैना का काकनमठ मंदिर अपनी अनोखी बनावट के कारण काफी मशहूर है। करीब एक हजार साल पुराने इस मंदिर को बड़े-बड़े पत्थरों से बनाया गया है और सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में सीमेंट या चूने का इस्तेमाल नहीं किया गया। यही वजह है कि इसे देखने के लिए इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
7. गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, जबलपुर
अगर आप प्राकृतिक सुंदरता के बीच शिव दर्शन करना चाहते हैं, तो जबलपुर का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर आपके लिए बेहतरीन जगह है। यह मंदिर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना है। सावन और बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और ठंडा वातावरण इस जगह को और भी खूबसूरत बना देता है।
इस सावन शिव दर्शन के साथ घूमने का भी लें आनंद
अगर इस सावन आप किसी धार्मिक यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश के ये सात प्रसिद्ध शिव मंदिर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। यहां भगवान शिव के दर्शन के साथ खूबसूरत नजारे करीब से देखने का मौका मिलेगा। ऐसे में इस बार अपनी ट्रैवल लिस्ट में इन शिवालयों को जरूर शामिल करें।
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मंगला गौरी व्रत 2026: इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। जहां सावन के सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं, वहीं मंगलवार के दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं अविवाहित कन्याओं को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाह में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है।
सावन 2026 में कब-कब पड़ेंगे मंगला गौरी व्रत?
- पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार)
मंगला गौरी व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
4 अगस्त 2026 को पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
- अन्य शुभ पूजा समय: सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक
इस दौरान माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल को साफ करें।
- माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
- माता गौरी को सिंदूर, चूड़ियां, चुनरी, कुमकुम, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- फूल, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगल कामना करें।
सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों खास है यह व्रत?
मंगला गौरी व्रत को विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में प्रेम और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं कई अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण उन्हें अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की देवी माना जाता है। सावन के मंगलवार को उनकी पूजा करने की परंपरा इसी आस्था से जुड़ी हुई है। श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता, पारिवारिक सुख और वैवाहिक सौहार्द बढ़ने की मान्यता है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त में अंतर संभव है। अपने क्षेत्र के पंचांग या विद्वान से पुष्टि अवश्य करें।
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