Pakistan सेना ने Khyber Pakhtunkhwa में 10 TTP आतंकवादियों को ढेर किया
पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग अभियानों में 10 आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की मीडिया इकाई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ये दोनों घटनाएं बृहस्पतिवार को दक्षिण वजीरिस्तान और अपर दीर जिलों में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुईं।
सरकार टीटीपी आतंकवादियों के लिए ‘फितना अल खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल करती है। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के अनुसार, दक्षिण वजीरिस्तान के आजम वारसक इलाके में आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों की चौकियों पर हमला करने का प्रयास किया। आईएसपीआर ने बताया कि सैनिकों ने हमले का प्रभावी ढंग से जवाब दिया और आठ आतंकवादियों को मार गिराया।
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दूसरी घटना दीर जिले में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने दो और आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अभियान के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए। आईएसपीआर ने कहा कि मारे गए आतंकवादी इलाके में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल थे।
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इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक इसके खिलाफ अभियान पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पिछले कई वर्षों से उग्रवादी हिंसा, अफगानिस्तान से लड़ाकों की सीमा पार आवाजाही और लगातार सैन्य अभियानों के कारण अशांति का सामना करता रहा है।
पाकिस्तान की संघीय सरकार का आरोप है कि नवंबर 2022 में संघर्षविराम समझौता समाप्त होने के बाद प्रतिबंधित टीटीपी ने प्रांत में कई हमले किए हैं।
बिहार में सवर्ण आयोग का बड़ा फैसला, EWS वर्ग की शिकायतों के लिए हर जिले में होंगे नोडल अधिकारी
Bihar News: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने बड़ा सियासी फेरबदल कर दिया है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के तुरंत बाद राज्य सरकार और प्रशासन हरकत में आ गए हैं. बिहार राज्य सवर्ण आयोग ने सवर्ण समाज से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. आयोग ने फैसला किया है कि बिहार के सभी 38 जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी. यह अधिकारी सीधे जिला स्तर पर तैनात रहेंगे और सवर्ण समाज के लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे.
जिलों में ही होगा सवर्ण समाज की समस्याओं का समाधान
सवर्ण आयोग के इस नए फैसले का सीधा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर यानी ईडब्ल्यूएस वर्ग में आने वाले सवर्णों को मिलेगा. अब तक सवर्ण समाज से जुड़े किसी भी मामले या शिकायत के लिए लोगों को राजधानी पटना स्थित आयोग के कार्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती थी. इससे दूर-दराज के जिलों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और उनका समय व पैसा दोनों खर्च होता था. अब सभी 38 जिलों में नोडल अधिकारी तैनात हो जाने से लोग अपने ही जिले में सीधे अधिकारी से मिल सकेंगे और अपनी बात रख सकेंगे. इससे समस्याओं का निपटारा तेजी से हो सकेगा और लोगों को पटना आने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
उपचुनाव में हार और सवर्ण समाज की नाराजगी के कयास
हालांकि, सवर्ण आयोग के इस फैसले को बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार से जोड़कर देखा जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस चुनाव में सवर्ण समाज की नाराजगी साफ तौर पर वोट के जरिए सामने आई है. इसी नाराजगी को भांपते हुए सरकार ने तुरंत यह कदम उठाया है ताकि सवर्ण वर्ग के बीच संदेश दिया जा सके. हालांकि, सरकार और आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उत्थान के लिए उठाया गया एक सामान्य कदम है.
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत
बांकीपुर सीट पर हुए इस उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारी बहुमत से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. चुनावी राजनीति के मैदान में नई-नई उतरी जन सुराज पार्टी की यह पहली बड़ी चुनावी सफलता है. वोटों की गिनती के पूरे 32 राउंड चले, जिसके बाद प्रशांत किशोर को कुल 64151 वोट हासिल हुए. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को सीधे मुकाबले में हरा दिया. बीजेपी प्रत्याशी को कुल 44827 वोट ही मिल सके. वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं. प्रशांत किशोर ने यह मुकाबला 19324 वोटों के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया.
30 साल पुराना किला ढहने के बाद बीजेपी में मंथन
बांकीपुर सीट बीजेपी का एक अभेद्य किला मानी जाती थी और पार्टी पिछले 30 सालों से इस सीट पर लगातार कब्जा बनाए हुए थी. इतने दशकों बाद मिली इस हार ने बीजेपी के खेमे में गहरी चिंता पैदा कर दी है. पार्टी नेतृत्व ने इस हार के कारणों की गहराई से समीक्षा करने की बात कही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से बीजेपी के साथ खड़ा रहने वाला सवर्ण मतदाता इस बार पार्टी से छिटक गया. सवर्ण समाज के वोटों का एक बड़ा हिस्सा जन सुराज पार्टी के पक्ष में चला गया, जिससे बीजेपी को अपने ही सबसे मजबूत गढ़ में करारी मात झेलनी पड़ी.
प्रशासनिक सुधार से साधने की कोशिश
बीजेपी की इस हार के बाद अब राज्य सरकार सवर्ण समाज के विश्वास को वापस पाने के प्रयास में जुट गई है. सवर्ण आयोग द्वारा जिलों में नोडल अफसरों की तैनाती को इसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है. आने वाले समय में यह नोडल अधिकारी जिलों में सवर्ण समाज के कल्याणकारी योजनाओं और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र से जुड़ी अड़चनों को दूर करने में मुख्य भूमिका निभाएंगे. अब देखना यह होगा कि सरकार के इस कदम से सवर्ण समाज का भरोसा वापस लौटता है या बांकीपुर का यह सियासी बदलाव बिहार की आगे की राजनीति पर भी असर डालेगा.
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