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भगवान गणेश और चंद्रदेव का प्रसंग: जानिए क्यों लंबोदर को देखना माना जाता है गणेश चतुर्थी पर अशुभ

Lord Ganesha and Moon God story: एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश अपने प्रिय मोदक खाकर पेट भरकर अपने वाहन नन्हे चूहे (मूषक) पर सवार होकर कैलाश की ओर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक एक बड़ा सा सांप सामने आ गया, जिसे देखकर मूषक डर गया और गणेश जी संतुलन खोकर जमीन पर गिर पड़े। उनका भारी-भरकम शरीर जमीन पर गिरते ही उनका पेट फट गया और सारे मोदक बाहर निकल आए। गणेश जी ने तुरंत उस सांप को उठाया और अपने पेट पर कमरबंद की तरह बांध लिया।

आकाश से यह पूरा दृश्य देवराज इंद्र के साथ-साथ चंद्रदेव भी देख रहे थे। अपनी सुंदरता और कुल पर अहंकार करने वाले चंद्रदेव इस अनोखी घटना को देखकर खुद को रोक नहीं पाए और जोरों से हंस पड़े। चंद्रदेव ने गणेश जी के रूप और उनके वाहन का मज़ाक उड़ाते हुए उनका अपमान किया।

भगवान गणेश का क्रोध और चंद्रमा को शाप
चंद्रमा के इस उपहास और अहंकार से क्रोधित होकर भगवान गणेश ने तुरंत अपना एक दांत (दंत) तोड़ लिया और गुस्से में आकर चंद्रमा को शाप दिया।

गणेश जी ने क्रोधित स्वर में कहा, "हे चंद्रमा! तू अपनी सुंदरता और रूप पर बहुत घमंड करता है और दूसरों का मज़ाक उड़ाता है। जा, आज से तेरा यह रूप काला पड़ जाएगा और जो कोई भी तुझे इस गणेश चतुर्थी के दिन देखेगा, उस पर झूठा कलंक (लांछन) लगेगा।"

शाप का प्रायश्चित और कलंक निवारण का उपाय
गणेश जी के शाप से उसी क्षण चंद्रमा की समस्त कलाएं क्षीण हो गईं और वे बदसूरत व काले हो गए। चंद्रमा के गायब होने या काले होने से पूरे ब्रह्मांड का संतुलन बिगड़ने लगा, क्योंकि चंद्र के बिना औषधियों और वनस्पतियों का पोषण रुक गया। तब सभी देवताओं और स्वयं चंद्रमा ने अत्यंत लज्जित होकर भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना की।

गणेश जी का स्वभाव अत्यंत दयालु था, इसलिए उन्होंने अपना शाप वापस तो नहीं लिया, बल्कि उसे थोड़ा कम कर दिया। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की कलाएं हर महीने घटेंगी और बढ़ेंगी (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष), और गणेश चतुर्थी के दिन जो कोई गलती से चंद्रमा को देख ले, यदि वह स्यमंतक मणि की यह पौराणिक कथा सुन ले या भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा कर ले, तो उस पर लगा झूठा कलंक दूर हो जाएगा। तभी से गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने की मनाही होती है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पुराणों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक भगवान गणेश से जुड़ी पौराणिक कथाओं और उनके संदेशों को पहुंचाना है।

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Plum Chutney Recipe: खट्टी-मीठी आलूबुखारा की चटनी खाने का स्वाद कर देगी दोगुना! इस तरीके से करें तैयार

Plum Chutney Recipe: आप अगर रोजाना एक जैसी चटनी खाकर बोर हो चुके हैं और खाने में नया स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो आलूबुखारा की चटनी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इसका खट्टा-मीठा और हल्का मसालेदार स्वाद दाल-चावल, पराठे, पूरी, स्नैक्स और यहां तक कि पकौड़ों के साथ भी शानदार लगता है। खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।

आलूबुखारा स्वाद के साथ-साथ विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्रोत माना जाता है। इससे बनी चटनी न केवल आपकी थाली का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि मेहमानों के सामने भी एक अलग और खास डिश के रूप में परोसी जा सकती है। आइए जानते हैं आलूबुखारा की स्वादिष्ट चटनी बनाने की आसान रेसिपी।

आलूबुखारा की चटनी बनाने के लिए सामग्री

  • 250 ग्राम पके हुए आलूबुखारा
  • 2 बड़े चम्मच गुड़ या चीनी
  • 1 छोटा चम्मच सेंधा या सामान्य नमक (स्वादानुसार)
  • 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
  • 1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच सौंफ (हल्की कुटी हुई)
  • 1 छोटा चम्मच अदरक (बारीक कटी हुई)
  • 1 छोटा चम्मच तेल
  • थोड़ा-सा हरा धनिया (गार्निश के लिए)

आलूबुखारा की चटनी बनाने का तरीका

आलूबुखारा चटनी बनाने के लिए सबसे पहले आलूबुखारा को अच्छी तरह धो लें। इसके बीज निकालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें ताकि यह जल्दी पक जाए। एक पैन में तेल गर्म करें। इसमें अदरक और हल्की कुटी सौंफ डालकर कुछ सेकंड तक भूनें, ताकि अच्छी खुशबू आने लगे।

अब कटे हुए आलूबुखारा डालें और 4-5 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं। इसके बाद गुड़ या चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। आलूबुखारा नरम होने लगेगा और हल्का गाढ़ा मिश्रण तैयार होने लगेगा।

अब नमक, लाल मिर्च, भुना जीरा और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिला दें। 3-4 मिनट तक पकाएं, ताकि सभी मसाले अच्छी तरह घुल जाएं और चटनी गाढ़ी हो जाए।

गैस बंद कर दें और चटनी को पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे एयरटाइट कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रखें। यह कई दिनों तक ताजा रह सकती है। परोसते समय ऊपर से हरा धनिया डालें।

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लेखक: (कीर्ति)

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