Plum Chutney Recipe: खट्टी-मीठी आलूबुखारा की चटनी खाने का स्वाद कर देगी दोगुना! इस तरीके से करें तैयार
Plum Chutney Recipe: आप अगर रोजाना एक जैसी चटनी खाकर बोर हो चुके हैं और खाने में नया स्वाद जोड़ना चाहते हैं, तो आलूबुखारा की चटनी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। इसका खट्टा-मीठा और हल्का मसालेदार स्वाद दाल-चावल, पराठे, पूरी, स्नैक्स और यहां तक कि पकौड़ों के साथ भी शानदार लगता है। खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।
आलूबुखारा स्वाद के साथ-साथ विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्रोत माना जाता है। इससे बनी चटनी न केवल आपकी थाली का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि मेहमानों के सामने भी एक अलग और खास डिश के रूप में परोसी जा सकती है। आइए जानते हैं आलूबुखारा की स्वादिष्ट चटनी बनाने की आसान रेसिपी।
आलूबुखारा की चटनी बनाने के लिए सामग्री
- 250 ग्राम पके हुए आलूबुखारा
- 2 बड़े चम्मच गुड़ या चीनी
- 1 छोटा चम्मच सेंधा या सामान्य नमक (स्वादानुसार)
- 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
- 1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
- 1/2 छोटा चम्मच सौंफ (हल्की कुटी हुई)
- 1 छोटा चम्मच अदरक (बारीक कटी हुई)
- 1 छोटा चम्मच तेल
- थोड़ा-सा हरा धनिया (गार्निश के लिए)
आलूबुखारा की चटनी बनाने का तरीका
आलूबुखारा चटनी बनाने के लिए सबसे पहले आलूबुखारा को अच्छी तरह धो लें। इसके बीज निकालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें ताकि यह जल्दी पक जाए। एक पैन में तेल गर्म करें। इसमें अदरक और हल्की कुटी सौंफ डालकर कुछ सेकंड तक भूनें, ताकि अच्छी खुशबू आने लगे।
अब कटे हुए आलूबुखारा डालें और 4-5 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं। इसके बाद गुड़ या चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। आलूबुखारा नरम होने लगेगा और हल्का गाढ़ा मिश्रण तैयार होने लगेगा।
अब नमक, लाल मिर्च, भुना जीरा और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिला दें। 3-4 मिनट तक पकाएं, ताकि सभी मसाले अच्छी तरह घुल जाएं और चटनी गाढ़ी हो जाए।
गैस बंद कर दें और चटनी को पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद इसे एयरटाइट कांच की बोतल में भरकर फ्रिज में रखें। यह कई दिनों तक ताजा रह सकती है। परोसते समय ऊपर से हरा धनिया डालें।
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लेखक: (कीर्ति)
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फल-फूल नहीं, 5 पत्थर चढ़ाते हैं भक्त! भारत के इन अनोखे मंदिरों की परंपरा कर देगी हैरान
भारत के मंदिर अपनी अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। जहां अधिकांश मंदिरों में भक्त भगवान को फल, फूल, मिठाई या धन अर्पित करते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी धाम हैं जहां आस्था का तरीका बिल्कुल अलग है। कहीं लोग अपनी पूरी आपबीती कागज पर लिखकर भगवान के चरणों में रखते हैं, तो कहीं सिर्फ पांच पत्थर चढ़ाकर मनोकामना मांगते हैं। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ अनोखे मंदिरों के बारे में।
चितई गोलू देवता मंदिर: जहां लिखी जाती है फरियाद
उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित चितई गोलू देवता मंदिर न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु अपनी समस्या, शिकायत या मनोकामना साधारण कागज या स्टाम्प पेपर पर लिखकर मंदिर परिसर में टांगते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना सुन ली जाती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त मंदिर में पीतल की घंटी चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं।
मां बगदाई वनदेवी मंदिर: पांच पत्थरों की अनोखी परंपरा
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के खमतराई स्थित मां बगदाई वनदेवी मंदिर में भक्त पांच छोटे पत्थर चढ़ाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा लगभग एक सदी पुरानी है। पहले लोग जंगलों से सुरक्षित यात्रा की कामना करते हुए यहां पत्थर अर्पित करते थे और आज भी मन्नत पूरी होने पर दोबारा पांच पत्थर चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है।
पत्थरों से बनते हैं सपनों के घर
आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमा पर स्थित बंगारू तिरुपति में श्रद्धालु मंदिर परिसर में कंकड़-पत्थर अर्पित कर अपनी इच्छाएं व्यक्त करते हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के कई देवस्थानों और छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के आसपास श्रद्धालु छोटे-छोटे पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर घर जैसी आकृति बनाते हैं। लोकमान्यता है कि ऐसा करने से अपना घर बनाने का सपना जल्द पूरा होने की कामना की जाती है।
आस्था की परंपराएं बनाती हैं इन मंदिरों को खास
भारत के ये मंदिर बताते हैं कि श्रद्धा केवल चढ़ावे की वस्तुओं में नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास में होती है। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन उनका उद्देश्य ईश्वर के प्रति आस्था और मनोकामना की अभिव्यक्ति ही होता है।
नोट: यह लेख विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय लोकविश्वासों पर आधारित है। इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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